TEDx SRCC: देश की नामचीन हस्तियों ने युवाओं को दिए सफलता के मंत्र, बताया पहचान का महत्व
युवाओं में छिपी नवोन्मेषी क्षमता को निखारने और उन्हें विचारों के जरिए नई परिभाषाएं गढ़ने का अवसर देने के लिए एशिया का सबसे प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) की ओर से 03 जुलाई, 2021 को टेडएक्स का आयोजन किया गया है।
विस्तार
'टेडएक्स एसआरसीसी' कार्यक्रम में देश की नामचीन हस्तियों ने युवाओं को सफलता के मंत्र दिए हैं। इन हस्तियों ने युवाओं को व्यक्तिगम पहचान का महत्व भी समझाया है। दरअसल, युवाओं में छिपी नवोन्मेषी क्षमता को निखारने और उन्हें विचारों के जरिए नई परिभाषाएं गढ़ने का अवसर देने के लिए एशिया का सबसे प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) की ओर से 03 जुलाई, 2021 को टेडएक्स का आयोजन किया गया था। इस आयोजन से अमर उजाला मीडिया पार्टनर के रूप में जुड़ा। 'टेडएक्स एसआरसीसी' कार्यक्रम की थीम 'पहचान की पहेली' रखी गई थी।
आयोजन में जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे, गीतकार जावेद अख्तर,पर्वतारोही अजीत बजाज, युवा उद्यमी अंकुर वारिकू और सामाजिक कार्यकर्ता हरतीरथ सिंह ने युवाओं का मार्गदर्शन किया है। भाजपा सासंद मीनाक्षी लेखी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। जहां, म्यूजिक आर्टिस्ट अवंती नागराल ने संगीत की दुनिया की रोचक बातें बताईं तो वहीं, भारतीय सेना के मेजर जनरल विक्रम देव डोगरा आयरनमैन ट्रायथलॉन पूरी करने के अपने अनुभव साझा किया। इनके बाद प्रसिद्ध भारतीय फैशन डिजाइनर राहुल मिश्रा ने अपनी सफलता की कहानी बताई और पहचान बनाने के टिप्स दिए।
कार्यक्रम की शुरुआत एक वीडियो दिखाने के साथ की गई, जिसमें सवाल उठाए गए कि आखिर हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं, कहां और किसके लिए कर रहे हैं? बता दें कि 'टेडएक्स एसआरसीसी' में शामिल होने वाले वक्ताओं ने नए विचारों को तो सामने रखेंगे ही, इसके अलावा दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हुए नूतन अनुसंधानों से रूबरू कराने के साथ ही सफलता के मंत्र भी बताए। वहीं, कार्यक्रम के दौरान कॉमेडियन तन्मय टंडन, निशांत सूरी और सलमान इलाही समेत कई कलाकारों ने हास्य और संगीत की प्रस्तुतियां भी दीं।
सांसद मीनाक्षी लेखी ने समझाया आइडेंटिटी का महत्व
भारतीय जनता पार्टी की नेता और नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से सांसद मीनाक्षी लेखी ने 'टेडएक्स एसआरसीसी' में युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कार्यक्रम की थीम 'पहचान की पहेली' के बारे में बात करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की। लेखी ने अपने संबोधन के दौरान एलजीबीटीक्यू समुदाय के पहचान के संघर्ष के बारे में भी बात की।
लेखी ने कहा कि कुछ लोग आइडेंटिटी के लिए जीते हैं। कुछ उसके मर जाते हैं। लेकिन कुछ लोग आइडेंटिटी के साथ पैदा होते हैं तो वहीं कुछ ऐसे भी जो अपनी आइडेंटिटी खुद बनाते हैं। उसके लिए संघर्ष करते हैं। सांसद मीनाक्षी लेखी ने महात्मा गांधी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, स्वामी विवेकानंद के वक्तव्यों और भगत सिंह की कहानी के जरिये आइडेंटिटी का महत्व और उसकी फिलॉस्फी को समझाया। उन्होंने वेद वाक्य - अहं ब्रह्मास्मि का अर्थ बताते हुए कहा कि कुछ लोग खुद को ही सबकुछ समझते हैं।
परिस्थिति के साथ व्यक्ति की आइडेंटिटी बदलती है : सांसद लेखी
लेखी ने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि समय और परिस्थिति के साथ व्यक्ति की आइडेंटिटी बदलती रहती है। एक पत्नी के तौर पर, एक मां के तौर पर, एक वकील के तौर पर, एक सांसद या राजनेता के तौर पर, और अन्य भूमिकाओं में हमें अपने आप ढालना पड़ता है। उन्होंने कहा कि परिस्थिति के साथ सामंजस्य बनाना जरूरी है। लेकिन यह पहचान का संघर्ष नहीं है। अपने आप की आइडेंटिटी को पहचाना जरूरी है। खुद की एक पहचान भी जरूरी है। सोशल मीडिया से लेकर ऑफिस और क्लास रूम कल्चर की बात करते हुए उन्होंने युवाओं को समझाया कि इंस्टाग्राम पर आप कूल ड्यूड बनकर रह सकते हैं, लेकिन जब आप क्लास रूम में हैं या ऑफिस में हैं तो आपकी आइडेंटिटी एक डिसेंट स्टूडेंट और सिंसियर इंप्लाॅय के तौर पर होती है।
लेखी ने की महाभारत से सीख लेने की अपील
सांसद लेखी ने कहा कि महाभारत काल के दौर की बात करें तो गांधारी और धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव 100 भाई थे। सबकी एक ही पहचान थी कि वे कौरव हैं। लेकिन पांडव पांच भाई थे, सबकी अपनी अलग पहचान थी। युद्धिष्ठिर न्याय और धर्म के ज्ञाता, भीम सर्वश्रेष्ठ गदाधारी, अर्जुन सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे जबकि नकुल और सहदेव की अपनी अलग पहचान थी। इसलिए जीवन में व्यक्तिगत सफलता के लिए व्यक्तिगत पहचान बनाना भी जरूरी है।
युवाओं से बोले अन्ना- व्यर्थ लगने लगी थी जिंदगी, फिर बनाया ध्येय
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने युवाओं को संबोधित किया। अन्ना हजारे ने कहा कि युवावस्था में मन में बहुत अलग-अलग ख्याल आते हैं। उनके मन में भी ऐसे ख्याल आए। उन्होंने कहा, 25 साल की उम्र में मेरे मन में सवाल आने लगे कि आखिर जीवन क्या है? किस लिए जीते हैं लोग? इसके बाद आत्महत्या के ख्याल मन में आने लगे। जिंदगी एकदम व्यर्थ लगने लगी थी।
अन्ना हजारे को ऐसे मिली थी जीवन जीने की प्रेरणा
उन्होंने कहा कि इसी दौरान किसी काम से दिल्ली जाना हुआ। दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक बुक स्टॉल पर स्वामी विवेकानंद की किताब दिखाई दी, जिसे खरीद लिया। किताब को पढ़ा तो जिंदगी की डोर हाथ लग गई। विवेकानंद ने लिखा था कि पूरे जीवन का ध्येय बनाइए। ध्येय सुनिश्चित करने के बाद मंजिल की ओर से आगे बढ़िए। जब मंजिल की राह पर चलेंगे तो कई तरह की मुसीबतें आएंगी। बस तभी मुझे अपने सवालों का जवाब मिल गया और उसके बाद निश्चय किया कि सेवा करनी है। अन्ना ने कहा कि बस चल पड़ा मंजिल पर, कई तरह की मुश्किलें भी आईं। खाने को पैसे नहीं, बस में सफर के लिए पैसे नहीं, कहीं जाने पर ठहरने के पैसे नहीं। लेकिन बढ़ता गया। छोटे-छोटे प्रयास करता गया और उनमें सफलता भी मिली।
युवाओं का अन्ना की सीख - जिंदगी का ध्येय सुनिश्चित कीजिए
84 वर्षीय अन्ना हजारे ने युवाओं से धूम्रपान, तंबाकू और शराब या अन्य तरह नशा न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ये कोई अच्छी चीज नहीं है। उन्होंने युवा शक्ति से अपील की कि युवाओं में शक्ति का भंडार है, देश को युवाओं की जरूरत है। देश में तमाम तरह की समस्याएं हैं, जिनको युवा ही खत्म कर सकते हैं। इस दौरान उन्होंने दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए गए आंदोलन समेत कई अन्य आंदोलनों और कार्यों का जिक्र किया। उन्होंने युवाओं से कहा कि देश में अलग-अलग क्षेत्रों में आप लोगों की जरूरत है। आप जिंदगी का ध्येय बनाइए और चल पढ़िए अपनी मंजिल पर।
जावेद अख्तर बोले- सपने देखना मत छोड़िए
गीतकार जावेद अख्तर ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि लाइफ शेड्स ऑफ कलर है। उन्होंने कहा कि जिंदगी इंद्रधनुष के रंगों सी सतरंगी है। कोरोना संकट का जिक्र करते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि अंधेरा कितना भी हो, लेकिन भरोसा रखिए कि हर रात के बाद सवेरा होता है। उम्मीद की किरणों के साथ सूरज उगता ही है। उन्होंने कहा कि जिंदगी भी इसी तरह चलती है। तमाम मुश्किलें आईं और आगे भी आती रहेंगी, लेकिन जिदंगी को रुकने मत दीजिए, सपने देखना मत छोड़िए और उनको पूरा करने के लिए जान लगा दीजिए।
कहा- धर्म, कला- संस्कृति को धर्म को समझिए और गर्व कीजिए
कार्यक्रम की थीम 'पहचान की पहेली' का जिक्र करते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि खुद की क्षमताओं को निखारिए और अपनी पहचान बनाइए। उन्होंने कहा कि अपनी राष्ट्रीयता, अपना धर्म, अपनी कम्युनिटी, अपनी कला, अपनी संस्कृति हर चीज को समझिए और उस गर्व कीजिए। ये सब हमारी पहचान से जुड़े हैं। वहीं धर्म को लेकर पूछ गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि न्याय और समानता दोनों ही मानवता के धर्म हैं। इनके लिए खड़े रहिए। बच्चों को लेकर माता-पिता को फैसले लेने चाहिए या नहीं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हर माता-पिता को बच्चों के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन फैसले उन्हें खुद लेने देना चाहिए। मैंने अपने बच्चों के साथ यही किया है। जावेद अख्तर ने अपनी कविता 'अंधेरे का समंदर' शीर्षक से एक कविता सुनाकर अपना संबोधन समाप्त किया।
युवा उद्यमी अंकुर वारिकू का मंत्र - लर्निंग, ऑब्जर्विंग और अपडेशन है जरूरी
'टेडएक्स एसआरसीसी' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युवा उद्यमी अंकुर वारिकू ने युवाओं को सफलता का आसान मंत्र - लर्निंग, ऑब्जर्विंग और अपडेशन बताया है। सबसे पहले उन्होंने युवाओं से कोरोना वायरस महामारी को हराने के लिए टीकाकरण अभियान में जुड़ने के लिए अपील की। इसके बाद वारिकू ने अपने कॉलेज दिनों को याद करते हुए कहा, मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से पढ़ा हूं। इस पढ़ाई के दौरान मेरी दोस्ती मिरांडा कॉलेज की एक छात्रा से हुई, जो आज मेरी पत्नी है। यह कोई आसान काम नहीं मगर एक यादगार पल रहा है।
उन्हाेंने अपने सफर के बारे में बात करते हुए कहा कि जब उन्होंने अपनी खुद की शुरुआत करने की योजना बनाई थी, तब इंडिया में डिजिटल क्षेत्र में काफी कम काम था। लेकिन 2009 के बाद से ही इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं बनी हैं। उस दौरान काफी सोच विचार के बाद उन्होंने बिजनेस शुरू किया। उन्होंने 2011 में ग्रुप ऑन इंडिया बिजनेस शुरू किया और 2015 तक एपीएसी जीएम रहे। उसके बाद, उन्होंने 2016 में ब्रांड वारिकू की शुरुआत की। अंकुर बताते हैं कि वह उस वक्त नियरबाय डॉट कॉम के सीईओ थे। उन्होंने 2015 में नियरबाय डॉट कॉम की स्थापना की थी और 2019 तक सीईओ भी रहे।
लर्न करो, ऑब्जर्वर बनो, खुद को अपडेट रखो
अंकुर वारिकू ने कहा कि स्कूल-कॉलेज आपको पढ़ाई नहीं कराते हैं। वह आपको लर्न करना सिखाते हैं। जब आप सीखना सीख जाएंगे तो कुछ भी असंभव नहीं है। हर 05-10 साल में अपने आप को बदलना चाहिए। नहीं तो हम पीछे रह जाएंगे। क्योंकि दुनिया बदल रही है। लर्निंग की कोई सीमा नहीं है। भविष्य में संभव है कि आपका काम भी रोबोट करने लग जाएं, इससे पहले ही अपने आप को नई चुनौतियों के लिए तैयार कर लो। हमने स्कूल-कॉलेज से लर्निंग ही सीखने को मिली है। हमें लाइफ और आसपास के माहौल को भी ऑब्जर्व करना चाहिए। जिंदगी भर लर्निंग और ऑब्जर्व करते रहेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। बकौल अंकुर, मैं किसी एक को फॉलो नहीं करता हूं। सबसे सीखने की कोशिश करनी चाहिए। जिस क्षेत्र में काम करना चाहते हैं उसमें इंटर्नशिप से शुरुआत कर सकते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता हरतीरथ सिंह ने साझा किए कोरोना काल के अनुभव, कहा- सेवा ही धर्म
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हेमकुंत फाउंडेशन के संस्थापक हरतीरथ सिंह ने वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान हजारों लोगों की मदद करने के अपने अनुभवों को साझा किया। हरतीरथ ने अपने फाउंडेशन के जरिये कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था करके करीब 10 हजार लोगों की जिंदगियां बचाने में मदद की थी।
हरतीरथ ने बताया कि समाजसेवा की प्रेरणा बाल्यकाल में अपने पिता से मिली थी। उन्होंने किसी की मदद के लिए रंग, धर्म, भाषा, जात-पांत नहीं देखी जाती है। सेवा हमारा धर्म है और हमें बिना अहंकार और बगैर स्वार्थ के सेवा करनी चाहिए। बचपन में गुरुद्वारा साहिब में झाडू-पोछा भी किया। कई बड़े-बड़े लोग वहां सेवा करते थे। बकौल हरतीरथ, हेमकुंत फाउंडेशन भी इसी भावना से सेवाकार्य करता है। हाल ही में कोरोना महामारी के दौरान जनता के सहयोग के कई लोगों की मदद कर पाए हैं। यह मेरे कारण या मेरे पिता के कारण नहीं बल्कि जनसहयोग से संभव हो पाया है।
100 फीसदी पारदर्शिता जरूरी : सिंह
हरतीरथ सिंह ने कहा कि हमारा प्रयास सेवा है और सेवा ही हमारी पहचान है। उन्होंने कहा कि देश के हर क्षेत्र की जरूरत अलग है। वहां की भौगोलिक स्थिति अलग होती है। सेवाकार्य की चुनौतियां भी अलग होती हैं। खान-पान भी अलग होता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सामाजिक सेवा क्षेत्र में कार्य करने के लिए 100 फीसदी पारदर्शिता जरूरी है। अन्यथा आप आपके कारण और लोगों पर भी सवाल उठ सकते हैं। यह ध्यान रखना जरूरी होता है।
अवंती नागराल ने बताईं संगीत के बारे रोचक बातें
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए म्यूजिक आर्टिस्ट अवंती नागराल ने संगीत की दुनिया में अपने सफर की रोचक बातें बताई हैं। सामाजिक स्थितियों पर आधारित संगीत की रचना करने वाली अवंती नागराल को 'एग्नेस ऑफ गॉड' एलबम में एग्नेस की भूमिका के लिए नेशनल थिएटर अवार्ड्स इन इंडिया में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नामित किया गया था। इसके साथ ही वह संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रमों में भी बोल चुकी हैं और प्रस्तुति दे चुकी हैं। टेडएक्स कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने अपने शुरुआती सफर के बारे में बात की। उन्होंने संगीत और मनौविज्ञान के अंतर्संबंधों पर भी बात की।
संगीत व्यक्ति के मन के अंदर से आता है
अवंती ने बताया कि उन्हें बचनप से संगीत से लगाव हो गया था। बकौल अवंती, संगीत व्यक्ति के मन के अंदर से आता है। हम सिर्फ उसे अपनी आवाज देते हैं। यह एक प्रकार की फीलिंग हैं। जिससे सुकून मिलता है। अवंती ने अपने इंडियन पॉप स्टाइल म्यूजिक के बारे में भी बात की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लाइव प्रस्तुतियां भी दीं। उनकी प्रस्तुति आई लाइक भले ही वर्चुअल थी, लेकिन युवाओं में जोश देखते ही बन रहा था। प्रशंसक भी अपनी प्रतिक्रियाओं के जरिये उनका मनोबल बढ़ा रहे थे।
अजीत बजाज ने सुनाई अपनी कहानी, बढ़ाया युवाओं का जज्बा
पर्वतारोही अजीत बजाज ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युवाओं के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि राफ्टिंग और स्कीइंग करना मेरी जिंदगी की सबसे कीमती कमाई है। इससे बेहतर मेरे लिए कुछ नहीं हो सकता था। उन्होंने कहा, ''मुझे बचपन से ही पहाड़ियों पर चढ़ने का शौक था। वह 12 वर्ष साल की उम्र में 15 सौ फीट ऊंची चोटी पर चढ़ गया था। 16 साल की उम्र में हनुमान टीबा नामक स्थान पर वह 5 हजार ऊंची फीट चोटी पर चढ़ा था। इस तरह मेरा सफर आगे बढ़ता चला गया। मेरे बचपन के इस सपने को पूरा करने में मेरे माता-पिता ने मेरा समर्थन किया।''
अजीत बजाज ने अपनी कहानी सुनाते हुए युवाओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जब मैंने 21वां जन्मदिन 23000 फीट ऊंचाई पर मनाया। वर्ष 2012 में अजीत ने नार्थ पोल और साउथ पोल पर चढ़ाई करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उक्त रिकार्ड की बदौलत भारत सरकार ने उन्हें पदमश्री अवॉर्ड से नवाजा था। लेकिन सबसे बड़ी खुशी तब मिली, जब 2018 में मैंने अपनी बेटी दीया के साथ माउंट एवरेस्ट फतह किया।
मुश्किलों आएंगी, लेकिन रुकिए मत: बजाज
अजीत बजाज ने कहा, 'मेरे शौक के चलते दुनिया भर में मुझे पहचान मिली। स्विट्जरलैंड और रूस समेत कई देशों से सम्मान मिला। अगर मैं अपने शौक को फॉलो नहीं करता तो शायद आज जो हूं वो नहीं होता।' इसके साथ ही उन्होंने युवाओं से अपने शौक को जिम्मेदारी के साथ फॉलो करने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं से कहा कि लोग क्या कहते हैं, उस पर गौर मत कीजिए। परिवार और दोस्तों के समर्थन से सफलता की सीढ़िया चढ़ते जाइए। नॉर्थ पोल (उत्तरी ध्रुव) तक स्की करने वाले अजीत बजाज ने कहा कि शुरुआत में मुश्किलें आती हैं, लेकिन रुकना नहीं है। आपको अपने जुनून के साथ आगे बढ़ते जाना है।
मेजर जनरल विक्रम देव डोगरा ने बताई प्रेरक कहानी, बोले- खुद का वजूद बनाना जरूरी
भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल विक्रम देव डोगरा ने कार्यक्रम के दौरान अपनी प्रेरक कहानी बताई। उन्होंने बताया कि उनके पिता भी भारतीय सेना में रहे हैं और देश के लिए जंग भी लड़े हैं। बता दें कि मेजर जनरल डोगरा भारतीय सेना के ऐसे पहले अधिकारी हैं जिन्होंने आयरनमैन ट्रायथलॉन पूरी की है। इस एक दिवसीय प्रतियोगिता को दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में से एक माना जाता है। इसमें बिना रुके एक दिन में 3.8 किमी तैराकी, 180 किमी साइकिलिंग और 42.2 किमी मैराथन होती है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी यूनिट और कमांड के दिनों को याद किया और उस दौर के संघर्ष की कहानी बताई। उन्होंने कहा, मैंने पास एक दर्जा था। मैं जनरल बन गया था। मेरे पास दुनिया की सबसे अच्छी नौकरी थी। एक रूतबा था। लेकिन जब मैं रिटायर हो चुका था, तो एक दिन ऐसे ही साेचा कि मैं क्या हूं? अब मेरा क्या वजूद है क्या पहचान है? बस ऐसे ही नई कहानी शुरू हो गई। हर व्यक्ति की एक पहचान होनी जरूरी है। किसी भी कार्य को करने के लिए सबसे पहले खुद को कन्वेंस करना जरूरी है।
हमें अपने वजूद को तलाशना चाहिए : डोगरा
हमें अपने वजूद को तलाशना चाहिए। प्रेरक चीजें सबके आसपास रहती हैं। उन्हें खोजना चाहिए। आगे बढ़ने के बारे में सोचना चाहिए। खुद को डिस्कवर करना बेहद जरूरी है। पैशनेट बनें। अपनी एनर्जी को एक्सप्लोर करें। दूसरों की अपेक्षाओं के अनुसार, जीवन नहीं जिया जा सकता है। अपने जीवन को खुद जीना होगा। बकौल डोगरा, उन्हें खुद को अपना वजूद तलाशने में 40 साल से ज्यादा का वक्त लगा। पूरी नौकरी इसमें बीत गई।
लग्जरी फैशन डिजाइनर राहुल मिश्रा ने दिया इनोवेशन का मंत्र
टेडएक्स कार्यक्रम के समापन के मौके पर बोलते हुए प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर राहुल मिश्रा ने अपने अनुभव साझा किए हैं। बता दें कि लग्जरी फैशन डिजाइनर राहुल मिश्रा का जन्म कानपुर में हुआ है। वह साल 2014 में इंटरनेशनल वूलमार्क अवार्ड अपने नाम करने वाले पहले भारतीय डिजाइनर बने थे। हालांकि, 2008 में एमटीवी इंडिया ने भी उन्हें 'एमटीवी यूथ आइकन ऑफ द ईयर' अवार्ड से नवाजा था।
राहुल मिश्रा ने गांव के एक लड़के के इंजीनियरिंग करने और फैशन इंडस्ट्री में कदम रखने के सफर के बारे में बताया। उन्होंने लखनऊ में अपनी बोर्डिंग स्कूलिंग के दिनों को भी याद किया। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों को अपनी पांच साल की बेटी के साथ उनके अपने अनुभवों की तुलना करते हुए बताया कि समय के साथ कैसे स्थितियां बदलती हैं और आपकी पहचान भी बदल जाती है।
बचपन से ही था ड्रॉइंग का शौक
मिश्रा ने बताया कि उन्हें बचपन से ही ड्रॉइंग का शौक था। लेकिन पिता आईआईटी में भेजना चाहता थे। मेरा रुझान फैशन डिजाइनिंग की ओर था। मेरे दोस्त उस समय आईआईटी में दाखिले की योजना बना रहे थे, जब मैं उनसे अपनी इच्छा को लेकर बात करता था तो मजाक बनाते थे। कुछ तो कहते थे कि लेडीज टेलर बनेगा क्या? खैर, जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो यह सब बाते याद आती है। क्योंकि सारा संघर्ष पहचान का है। एक आइडेंटिटी का है। अपनी जिज्ञासु प्रवृत्ति को मैंने रोका नहीं बल्कि उसे आगे बढ़ाया। मैं मेरी बेटी के साथ भी ऐसा ही करता हूं।
दुनिया के तानों की परवाह छोड़ दीजिए
बकौल मिश्रा, हमें एक इमेज फ्रेम में नहीं बंधे रहना चाहिए। वी नीड अ स्पेस टू डू समथिंग डिफरेंट। वी शुड हैव टू एक्सप्लोर अवर सेल्फ। हमें खुद को खोजना चाहिए। लाइफ में कुछ तो क्रिएटिव करना चाहिए। अपने कार्य क्षेत्र में ही कुछ नया करने का प्रयास करें। दुनिया के बनाए इमेज फ्रेम से बाहर निकलना बेहद जरूरी। यह मत सोचिए कि कौन क्या कह रहा है। इस पर ध्यान दीजिए कि आपको क्या करना है। इसी से आप सफल बन पाएंगे।
ये नौ वक्ता हुए शामिल
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और गीतकार जावेद अख्तर समेत राजनीति, फैशन, फिल्म और खेल जगत की कई बड़ी हस्तियां इस कार्यक्रम में वक्ता के तौर पर जुड़ीं थीं। इसके अलावा पांच कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां भी दीं।
वक्ताओं की सूची इस प्रकार है
- राहुल मिश्रा: कानपुर में जन्मे राहुल मिश्रा एक लग्जरी फैशन डिजाइनर हैं। साल 2014 में उन्होंने इंटरनेशनल वूलमार्क अवार्ड अपने नाम किया था। यह अवार्ड जीतने वाले वह पहले भारतीय फैशन डिजाइनर हैं। उल्लेखनीय है कि साल 2008 में एमटीवी इंडिया ने उन्हें 'एमटीवी यूथ आइकन ऑफ द ईयर' अवार्ड दिया था।
- अजीत बजाज: पर्वतारोही अजीत पहले भारतीय हैं जिन्होंने नॉर्थ पोल (उत्तरी ध्रुव) तक स्की किया व पोलर ट्रायलॉजी पूरी की। पोलर ट्रायलॉजी में नॉर्थ पोल, साउथ पोल (दक्षिणी ध्रुव) और ग्रीनलैंड आइसकैप में स्कीइंग आते हैं। बजाज और उनकी बेटी दीया पहले भारतीय पिता-पुत्री हैं जिन्होंने माउंट एवरेस्ट फतेह की है।
- मीनाक्षी लेखी: भारतीय जनता पार्टी की नेता और नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से संसद सदस्य मीनाक्षी लेखी सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता भी हैं। वह जर्नल्स और अखबारों में सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर लेख लिखती हैं। मीनाक्षी लेखी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से संबंधित कई टीवी कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया है।
- अंकुर वारिकू: इंटरनेट उद्यमी, मोटीवेशनल स्पीकर और निजी निवेशक अंकुर नियरबाई एप के सह संस्थापक हैं और 2015 से 2019 तक वह इसके सीईओ रहे। बता दें कि नियरबाई भारत का पहला हाइपर लोकल ऑनलाइन प्लेटफार्म है जो ग्राहकों और स्थानीय विक्रेताओं को एक दूसरे से जुड़ने की सुविधा देता है।
- अवंती नागराल: संगीतज्ञ अवंती नागराल का संगीत सामाजिक स्थितियों पर आधारित रहता है। 'एग्नेस ऑफ गॉड' में एग्नेस की भूमिका के लिए उन्हें नेशनल थिएटर अवार्ड्स इन इंडिया में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नामित किया गया था। इसके साथ ही वह संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रमों में भी बोल चुकी हैं और प्रस्तुति दे चुकी हैं।
- हरतीरथ सिंह: हेमकुंत फाउंडेशन के संस्थापक हरतीरथ सिंह ने वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान हजारों लोगों की मदद की। उनका परिवार 2003 से यह एनजीओ चला रहा है। महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान उन्होंने हजारों लोगों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की।
- विक्रम देव डोगरा: मेजर जनरल डोगरा भारतीय सेना के पहले अधिकारी हैं जिसने आयरनमैन ट्रायथलॉन पूरी की है। इस एक दिवसीय प्रतियोगिता को दुनिया की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में से एक माना जाता है। इसमें बिना रुके एक दिन में 3.8 किमी तैराकी, 180 किमी साइकिलिंग और 42.2 किमी मैराथन होती है।