Teachers Day: भारत को विश्व गुरु बनाने में शिक्षकों का अहम रोल, छात्रों में कौशल-जीवन मूल्यों का कर रहे विकास
प्रधानमंत्री मोदी ने जिस आधुनिक और विकसित भारत की रूपरेखा का लक्ष्य तय किया है उसका रास्ता उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और शिक्षकों से होकर ही जाता है। भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा में सकल घरेलू उत्पाद का 6 फीसदी खर्च करने पर बल देती है।
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भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्राचीन काल से गुरु शिक्षक, मार्गदर्शक, आध्यात्मिक नेतृत्वकर्ता व प्रेरणास्रोत रहे हैं। गुरु की उत्पत्ति के बारे में कहा गया, गारयति ज्ञानम् इति गुरु: अर्थात गुरु उसे कहते हैं जो ज्ञान का घूंट पिलाए। भारत में हमारे संस्कार की शुरुआत ही गुरुकुल से होती रही है। श्रीराम और श्रीकृष्ण जैसे हमारे प्रभुओं तक ने गुरु आश्रम में जाकर शिक्षा ग्रहण की। गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है। अपने शिष्य को नया जन्म देने के कारण उन्हें ब्रह्मा, शिष्यों के गुणों की रक्षा के लिए विष्णु और शिष्यों के अवगुणों का नाश करने के लिए महेश माना जाता है।
वर्तमान भारतीय आधुनिक शिक्षा प्रणाली में गुरु की भूमिका एक अध्यापक निभाते हैं। वे शिक्षा में नई समकालीन शिक्षण प्रक्रियाओं, विधियों व तकनीकों को सीखकर अपने शिष्यों में अद्यतन ज्ञान, कौशल और जीवन मूल्यों का विकास करते हैं। शिक्षकों के इसी कर्तव्य एवं पेशे के प्रति प्रतिबद्धता, परिश्रम, निष्ठा एवं शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान के कारण 1958 से उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाता रहा है। यह पुरस्कार हर वर्ष 5 सितंबर को दिया जाता है। इस वर्ष 75 शिक्षकों का इस पुरस्कार के लिए निष्पक्ष प्रक्रिया के जरिये चयन किया। पहली बार इन पुरस्कारों के लिए उच्च शिक्षा और कौशल विकास के शिक्षकों का चयन भी हुआ है। इन शिक्षकों से इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों के प्रश्नों के उत्तर दिए और खुद भी सवाल किए।
प्रधानमंत्री मोदी ने जिस आधुनिक और विकसित भारत की रूपरेखा का लक्ष्य तय किया है उसका रास्ता उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और शिक्षकों से होकर ही जाता है। भारतीय राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा में सकल घरेलू उत्पाद का 6 फीसदी खर्च करने पर बल देती है। इसी के मद्देनजर भारत सरकार ने 2023-24 में शिक्षा के विभिन्न पहलों व समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए 112899.47 करोड़ का बजट आवंटित किया है जो जीडीपी के 5 फीसदी से अधिक है। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अनुशंसाओं के क्रियान्वयन के लिए कई पहलें भी की हैं।
ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए दीक्षा पोर्टल
सरकार शिक्षकों एवं विद्यालय प्रमुखों के सतत पेशेवर विकास के लिए दीक्षा पोर्टल पर ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसमें कई डिजिटल शिक्षण सामग्री अपलोड की गई। एनसीईआरटी, एससीईआरटी, डाइट्स, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान व राज्य एवं केंद्र के विश्वविद्यालयों की ओर से शिक्षकों के लिए कई अन्य कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। शिक्षक हमारे शिक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्हें अच्छे नागरिकों का विकास करना है जो पुख्ता नैतिक धरातल पर आधारित हों और जिनकी जड़ें भारत में गहरी जमी हों। ऐसे नागरिक जो रचनात्मक कल्पना शक्ति, करुणा और मानवता के साथ स्वतंत्र एवं तर्कसंगत विचारों से कार्य करने में सक्षम हों। अगर हमारे शिक्षक इन तत्वों को आत्मसात कर लें तो वह दिन दूर नहीं जब भारत पुन: विश्वगुरु का स्थान पा लेगा।