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टीसीएस यौन उत्पीड़न मामला: पॉश कमेटी मेंबर पर लगा अपराध में साथ देने का आरोप, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

Sat, 16 May 2026 11:54 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sat, 16 May 2026 11:54 PM IST
सार

टीसीएस यौन उत्पीड़न और कथित धर्म परिवर्तन मामले में नासिक कोर्ट ने 'पॉश' कमेटी की सदस्य अश्विनी चैनानी और चार अन्य आरोपियों की जमानत खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि अश्विनी ने पीड़िता की मौखिक शिकायतों को नजरअंदाज कर अपराध को बढ़ावा दिया। ऑफिस के जहरीले माहौल के कारण पीड़िता ने इस्तीफा दे दिया था।

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TCS Harassment Case POSH Committee Member Accused of Abetting the Crime Court Rejects Bail Plea
टीसीएस - फोटो : Adobestock

विस्तार

टीसीएस यौन उत्पीड़न और कथित धर्म परिवर्तन के मामले में महाराष्ट्र के नासिक की एक अदालत ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने टीसीएस की साइट हेड और 'पॉश' (POSH) कमेटी की सदस्य अश्विनी चैनानी को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने अपने कड़े फैसले में कहा है कि अश्विनी ने एक पीड़िता की शिकायत को पूरी तरह से नजरअंदाज किया, जो सीधे तौर पर इस घिनौने अपराध को उकसाने और आरोपियों का साथ देने के बराबर है। इस मामले में अश्विनी के अलावा चार अन्य आरोपियों- तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी और आसिफ अंसारी की जमानत याचिका भी शुक्रवार को खारिज कर दी गई है।

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टीसीएस के नासिक कार्यालय में एक महिला कर्मचारी के साथ दफ्तर में यौन उत्पीड़न होने का गंभीर मामला सामने आया है। शनिवार को आए अदालत के विस्तृत आदेश में बताया गया कि अश्विनी चैनानी ने अपनी जिम्मेदारी बिल्कुल नहीं निभाई। वह महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाने के लिए बनी आंतरिक 'पॉश' कमेटी की सदस्य थीं। कानून के मुताबिक उन्हें पीड़िता की लिखित शिकायत दर्ज कराने में मदद करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। इसके विपरीत, उन्होंने पीड़िता की ही गलती निकालकर उसे आरोपियों को छोड़ देने के लिए कहा। जज ने माना कि चैनानी की इस चुप्पी और असंवेदनशीलता ने दफ्तर के जहरीले माहौल का समर्थन किया।
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महिला कर्मचारी के साथ आरोपियों ने दफ्तर में कैसा बर्ताव किया?
प्राथमिकी (एफआईआर) के अनुसार, रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी ने पीड़िता के साथ जबरन नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की। अदालत ने बताया कि आरोपी उसे हल करने के लिए पहेलियां देते थे, उससे बेहद निजी और शर्मनाक सवाल पूछते थे। इसके साथ ही वे लगातार उस पर भद्दी और अश्लील टिप्पणियां भी करते थे। ऑफिस का माहौल इतना ज्यादा खराब और जहरीला हो गया था कि परेशान होकर पीड़िता को एफआईआर दर्ज होने से ठीक पहले मार्च 2026 में अपनी नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा।


बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में क्या दलीलें दीं?
इस मामले में बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में कहा कि अश्विनी चैनानी मुख्य रूप से टीसीएस की पुणे ब्रांच से काम करती थीं और नासिक के रोजमर्रा के कामों को सीधे तौर पर नहीं देखती थीं। वकीलों ने यह भी दलील दी कि पीड़िता ने कोई लिखित शिकायत नहीं दी थी, इसलिए कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं की गई थी। इसके अलावा बचाव पक्ष ने शिकायत दर्ज कराने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायत में देरी के लिए पीड़िता को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि उसने पॉश कमेटी की सदस्य अश्विनी को समय पर सारी बातें मौखिक रूप से बता दी थीं।

एसआईटी की जांच में और क्या चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं?
अदालत ने कहा कि इस बात के स्पष्ट सबूत मौजूद हैं कि अश्विनी चैनानी ने अपराध में आरोपियों का साथ दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी काफी प्रभावशाली हैं, इसलिए अगर उन्हें जमानत दी गई तो वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। वर्तमान में नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) टीसीएस की नासिक इकाई में कथित उत्पीड़न के ऐसे ही नौ मामलों की गहराई से जांच कर रही है। जांच में कुछ अन्य पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें नमाज पढ़ने, खाने की आदतें बदलने और धार्मिक प्रतीकों को अपनाने जैसे इस्लामी तौर-तरीके मानने के लिए मजबूर किया गया था।

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