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TCS: सीओओ ने कहा- मूनलाइटिंग के खिलाफ सख्ती ‘बर्बाद’ कर सकती है कर्मचारियों का करियर, कंपनी दिखाएगी सहानुभूति

Tue, 18 Oct 2022 12:21 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 18 Oct 2022 12:21 AM IST
सार

‘मूनलाइटिंग’ को लेकर छिड़ी बहस के बीच सुब्रमण्यम ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि मूनलाइटिंग पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से कंपनी को कोई नहीं रोक सकता है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई सेवा समझौते का एक हिस्सा है लेकिन युवा कर्मचारियों को इसे रोकना होगा।
 

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TCS COO says action for moonlighting can ruin a career, company will show empathy
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

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टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) एन गणपति सुब्रमण्यम ने कहा है कि ‘मूनलाइटिंग’ यानी नौकरी के साथ दूसरे संस्थान के लिए काम करने को लेकर किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई उसका करियर बर्बाद कर सकती है और इसलिए, इस मुद्दे से निपटने के दौरान सहानुभूति दिखाना महत्वपूर्ण है। जब कोई कर्मचारी अपनी नियमित नौकरी के अलावा स्वतंत्र रूप से कोई अन्य काम भी करता है, तो उसे तकनीकी तौर पर ‘मूनलाइटिंग’ कहा जाता है।

‘मूनलाइटिंग’ को लेकर छिड़ी बहस के बीच सुब्रमण्यम ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि मूनलाइटिंग पर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने से कंपनी को कोई नहीं रोक सकता है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई सेवा समझौते का एक हिस्सा है लेकिन युवा कर्मचारियों को इसे रोकना होगा। सुब्रमण्यम ने कहा कि कार्रवाई करने का नतीजा यह होगा कि कर्मचारी का करियर बर्बाद हो जाएगा। इस तरह कर्मचारी भविष्य में अगली नौकरी के लिए पृष्ठभूमि की जांच में विफल हो जाएगा। इसलिए हमें कुछ सहानुभूति दिखानी होगी।

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उन्होंने कहा कि कंपनी एक कर्मचारी को परिवार का हिस्सा होने की तरह देखती है और किसी भी कार्रवाई के परिणामों को देखते हुए परिवार के सदस्य को भटकने से रोकने पर ध्यान केंद्रित करेगी। उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों में प्रतिभा की बढ़ती मांग के बीच 220 अरब डॉलर से अधिक के आईटी उद्योग में नौकरी के साथ अन्य काम पकड़ने के मामले सामने आये हैं।
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टेक महिंद्रा ने ‘मूनलाइटिंग’ को लेकर नरम रुख दिखाया
टीसीएस जैसे कई कंपनियों ने इसके बारे में चिंता व्यक्त की है जबकी विप्रो ने 300 कर्मचारियों को भी निलंबित कर दिया है। वहीं, टेक महिंद्रा जैसी कंपनियों ने ‘मूनलाइटिंग’ को लेकर नरम रुख दिखाया है। टीसीएस के सीओओ ने कहा कि कुछ आईटी कंपनियां ऐसे मॉडल पर काम करती हैं जहां कर्मचारियों का ‘फ्रीलांसिंग’ करना ठीक है। लेकिन टीसीएस जैसी कंपनियां, जो शीर्ष वैश्विक निगमों के साथ काम करती है, 'मूनलाइटिंग' जैसी गतिविधि को जारी नहीं रहने दे सकती क्योंकि ग्राहकों का डाटा सुरक्षित रहना चाहिए।

टीसीएस के सीओओ ने कहा कि हम मूल्य प्रणालियों का उल्लंघन करते हुए युवा कर्मचारियों को दंडित नहीं करना चाहते हैं। टीसीएस में छह लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं और वहीं पिछले 18 महीनों में 1.35 लाख फ्रेशर्स को काम पर रखा गया है। सुब्रमण्यम ने इस पर जोर देते हुए कहा कि कंपनी की अपने कर्मचारियों के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है और हमारे संबंध पारस्परिक हैं।

प्रवेश स्तर के कर्मचारियों के लिए कई वर्षों से समान स्तर पर वेतन पैकेज के बारे में पूछे जाने पर सुब्रमण्यम ने कहा कि कंपनी मानती है कि युवा जॉइनर्स के लिए यह पैकेज पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि कुछ टेस्ट को पास करने के बाद उनके पास यह संभावना होती है कि एक वर्ष के भीतर अपनी कमाई को दोगुना कर सकते हैं। 

उन्होंने कहा कि एक कर्मचारी को काम पर रखने के बाद कंपनी छह महीने से अधिक समय तक उनकी ट्रेनिंग में निवेश करती है और इसके बाद ही कर्मचारी को एक प्रोजेक्ट पर रखती है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में लगभग 20-30 प्रतिशत कर्मचारियों ने परीक्षा उत्तीर्ण की है और अपने वेतन को दोगुना करने में सफल रहे हैं। 



सुब्रमण्यम ने ‘मूनलाइटिंग’ के मुद्दे को वर्क फ्रॉम होम (डब्ल्यूएफएच) से भी जोड़ा, यह इशारा करते हुए कि जब एक कर्मचारी कार्यालय में होता है तो उससे जुड़ी बहुत सारी चिंताओं को ध्यान रखा जाता है। उन्होंने कहा कि एक कर्मचारी कार्यालय में उपलब्ध मेंटरशिप से सीख सकता है और यह उसे उच्च स्तर का कौशल हासिल करने में सहायक होता है, जो घर से काम करते समय संभव नहीं है।

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