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तमिलनाडु की सियासत: विजय सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होगी कांग्रेस, निकाय और लोकसभा चुनाव भी लड़ेंगे साथ
Sun, 10 May 2026 10:20 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sun, 10 May 2026 10:20 PM IST
सार
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थागई ने एलान किया है कि कांग्रेस दूसरे चरण में टीवीके के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होगी। विभागों का बंटवारा पार्टी आलाकमान करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस निकाय और लोकसभा चुनाव भी टीवीके के साथ ही लड़ेगी। आइए, विस्तार से समझते कांग्रेस ने क्या-क्या कहा।
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कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद अब मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। टीवीके के नेतृत्व वाली नई सरकार में कांग्रेस पार्टी भी शामिल है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थागई ने रविवार को को बताया कि कांग्रेस दूसरे चरण के मंत्रिमंडल विस्तार में सरकार का अहम हिस्सा बनेगी। यह खबर राज्य के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है और इससे यह तय हो गया है कि सत्ता में कांग्रेस की भागीदारी पक्की है।
रविवार को नई सरकार के मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सेल्वापेरुन्थागई ने स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि भले ही शुरुआती कैबिनेट की लिस्ट में कांग्रेस पार्टी के किसी नेता का नाम शामिल नहीं था, लेकिन गठबंधन की तय योजना के तहत उनका मंत्रिमंडल में शामिल होना बिल्कुल कन्फर्म है। यानी आने वाले समय में जब मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार करेंगे, तब कांग्रेस के विधायक भी मंत्री पद की शपथ लेते हुए दिखाई देंगे। यह कदम टीवीके और कांग्रेस के बीच मजबूत राजनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।
ये भी पढ़ें- प्रधानमंत्री की अपील: 'पेट्रोल-डीजल बचाएं, सोने के गहने न खरीदें', पीएम ने बताया-देशहित में और क्या-क्या करें
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कांग्रेस को मंत्रिमंडल में कौन से विभाग मिलेंगे?
इस गठबंधन सरकार में कांग्रेस को कितनी और कौन सी अहम जिम्मेदारियां मिलेंगी, इसे लेकर भी चर्चा जोरों पर है। जब प्रदेश अध्यक्ष से पूछा गया कि कांग्रेस के कोटे में कौन-कौन से मंत्रालय या विभाग आएंगे, तो उन्होंने इसका बहुत ही सीधा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रालयों और विभागों का बंटवारा पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। यानी दिल्ली में बैठे कांग्रेस के आलाकमान ही यह अंतिम फैसला लेंगे कि राज्य में कांग्रेस के मंत्रियों को कौन सी जिम्मेदारी संभालनी है। फिलहाल इस पर कोई स्थानीय फैसला नहीं लिया गया है।
क्या कांग्रेस ने डीएमके को बिना बताए गठबंधन छोड़ा?
इस बीच ऐसी कई बातें सामने आ रही थीं कि कांग्रेस ने 'सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस' (से अलग होने से पहले अपने पुराने साथी डीएमके (DMK) को कोई जानकारी नहीं दी थी और उन्हें अंधेरे में रखा था। हालांकि, सेल्वापेरुन्थागई ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने डीएमके के बड़े नेताओं से सीधे तौर पर बात की थी। बातचीत करने वालों में टीआर बालू और कनिमोझी जैसे बड़े नेता शामिल थे। इसलिए डीएमके को कुछ न बताने वाली बात पूरी तरह से गलत है।
टीवीके और कांग्रेस का यह गठबंधन कितना मजबूत है?
टीवीके के नेतृत्व वाले इस नए गठबंधन की ताकत और भविष्य को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इस पर सेल्वापेरुन्थागई ने जोर देते हुए कहा कि उनकी यह नई साझेदारी आने वाली सभी राजनीतिक चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए बहुत मजबूत है। उन्होंने जनता और समर्थकों को आश्वस्त करते हुए साफ तौर पर कहा कि टीवीके और कांग्रेस का यह गठबंधन न केवल अभी, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और उसके बाद होने वाले लोकसभा चुनावों तक भी ऐसे ही मजबूती के साथ जारी रहेगा।
नई सरकार के वादों को लेकर कांग्रेस की क्या अपील?
नई सरकार से तमिलनाडु की जनता को बहुत सारी उम्मीदें हैं और चुनावी वादों को पूरा करने का भारी दबाव भी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आम जनता और मीडिया से थोड़ा धैर्य रखने की खास अपील की है। उन्होंने कहा कि नई प्रशासनिक टीम को अपनी जड़ें जमाने और ठीक से काम शुरू करने के लिए थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि आज तो सिर्फ कार्यभार संभालने का दिन है, इसलिए थोड़ा इंतजार करें और देखें कि सरकार अपने वादे किस तरह से लागू करती है।
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रविवार को नई सरकार के मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सेल्वापेरुन्थागई ने स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया। उन्होंने बताया कि भले ही शुरुआती कैबिनेट की लिस्ट में कांग्रेस पार्टी के किसी नेता का नाम शामिल नहीं था, लेकिन गठबंधन की तय योजना के तहत उनका मंत्रिमंडल में शामिल होना बिल्कुल कन्फर्म है। यानी आने वाले समय में जब मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार करेंगे, तब कांग्रेस के विधायक भी मंत्री पद की शपथ लेते हुए दिखाई देंगे। यह कदम टीवीके और कांग्रेस के बीच मजबूत राजनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।
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कांग्रेस को मंत्रिमंडल में कौन से विभाग मिलेंगे?
इस गठबंधन सरकार में कांग्रेस को कितनी और कौन सी अहम जिम्मेदारियां मिलेंगी, इसे लेकर भी चर्चा जोरों पर है। जब प्रदेश अध्यक्ष से पूछा गया कि कांग्रेस के कोटे में कौन-कौन से मंत्रालय या विभाग आएंगे, तो उन्होंने इसका बहुत ही सीधा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रालयों और विभागों का बंटवारा पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। यानी दिल्ली में बैठे कांग्रेस के आलाकमान ही यह अंतिम फैसला लेंगे कि राज्य में कांग्रेस के मंत्रियों को कौन सी जिम्मेदारी संभालनी है। फिलहाल इस पर कोई स्थानीय फैसला नहीं लिया गया है।
क्या कांग्रेस ने डीएमके को बिना बताए गठबंधन छोड़ा?
इस बीच ऐसी कई बातें सामने आ रही थीं कि कांग्रेस ने 'सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस' (से अलग होने से पहले अपने पुराने साथी डीएमके (DMK) को कोई जानकारी नहीं दी थी और उन्हें अंधेरे में रखा था। हालांकि, सेल्वापेरुन्थागई ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने डीएमके के बड़े नेताओं से सीधे तौर पर बात की थी। बातचीत करने वालों में टीआर बालू और कनिमोझी जैसे बड़े नेता शामिल थे। इसलिए डीएमके को कुछ न बताने वाली बात पूरी तरह से गलत है।
टीवीके और कांग्रेस का यह गठबंधन कितना मजबूत है?
टीवीके के नेतृत्व वाले इस नए गठबंधन की ताकत और भविष्य को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। इस पर सेल्वापेरुन्थागई ने जोर देते हुए कहा कि उनकी यह नई साझेदारी आने वाली सभी राजनीतिक चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए बहुत मजबूत है। उन्होंने जनता और समर्थकों को आश्वस्त करते हुए साफ तौर पर कहा कि टीवीके और कांग्रेस का यह गठबंधन न केवल अभी, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और उसके बाद होने वाले लोकसभा चुनावों तक भी ऐसे ही मजबूती के साथ जारी रहेगा।
नई सरकार के वादों को लेकर कांग्रेस की क्या अपील?
नई सरकार से तमिलनाडु की जनता को बहुत सारी उम्मीदें हैं और चुनावी वादों को पूरा करने का भारी दबाव भी है। इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आम जनता और मीडिया से थोड़ा धैर्य रखने की खास अपील की है। उन्होंने कहा कि नई प्रशासनिक टीम को अपनी जड़ें जमाने और ठीक से काम शुरू करने के लिए थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि आज तो सिर्फ कार्यभार संभालने का दिन है, इसलिए थोड़ा इंतजार करें और देखें कि सरकार अपने वादे किस तरह से लागू करती है।
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