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Tamil Nadu National Anthem Row: 'मुख्यमंत्री का अहंकार ठीक नहीं'; गहराते विवाद पर तमिलनाडु के राजभवन का बयान
Sun, 12 Jan 2025 06:52 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: श्वेता महतो
Updated Sun, 12 Jan 2025 06:52 PM IST
सार
हाल ही में स्टालिन ने राज्यपाल द्वारा विधानसभा में अपना अभिभाषण नहीं देने को बचकाना बताया था। सीएम की इस टिप्पणी की राज्यपाल रवि ने आलोचना की।
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एमके स्टालिन, आरएन रवि
- फोटो : ANI
विस्तार
तमिलनाडु में राज्यपाल आरएन रवि और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बीच विवाद जारी है। हाल ही में स्टालिन ने राज्यपाल द्वारा विधानसभा में अपना अभिभाषण नहीं देने को बचकाना बताया था। सीएम की इस टिप्पणी की राज्यपाल रवि ने आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह का अहंकार अच्छा नहीं है।
राज्य भवन कूी तरफ से सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा गया, "एम के स्टालिन ने कहा है कि राष्ट्रगान के प्रति उचित सम्मान और संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों का पालन करने पर जोर दिया जाना बेतुका और बचकाना है।" पोस्ट में आगे कहा, "अपने असली इरादे दिखाने के लिए उन्हें धन्यवाद। उन्होंने दिखा दिया कि वह उस विचारधारा को मानते हैं और गठबंधन के नेता हैं जो भारत का एक राष्ट्र के तौर पर सम्मान नहीं करता और संविधान को स्वीकार नहीं करता। ऐसा अहंकार ठीक नहीं है।"
इससे ठीक एक दिन पहले स्टालिन ने आरोप लगाया था कि राज्यपाल रवि इस बात को नहीं पचा पा रहे हैं कि राज्य विकास कर रहा है और विधानसभा को संबोधित न करने का उनका फैसला बचकाना था। दरअसल, राज्यपाल आरएन रवि छह जनवरी को विधानसभा में अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही चले गए थे। राजभवन ने बाद में बताया कि उन्हें इस बात का दुख हुआ कि राष्ट्रगान का धुन नहीं बजाया गया। मुख्यमंत्री ने शनिवार को कहा कि 2022 में राज्यपाल ने बिना किसी बदलाव के अपना अभिभाषण दिया। हालांकि, इसके तीन वर्षों में वह बेतुके कारणों का हवाला देते हुए अपना अभिभाषण देने से बचते रहें।
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राज्य भवन कूी तरफ से सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा गया, "एम के स्टालिन ने कहा है कि राष्ट्रगान के प्रति उचित सम्मान और संविधान में निहित मौलिक कर्तव्यों का पालन करने पर जोर दिया जाना बेतुका और बचकाना है।" पोस्ट में आगे कहा, "अपने असली इरादे दिखाने के लिए उन्हें धन्यवाद। उन्होंने दिखा दिया कि वह उस विचारधारा को मानते हैं और गठबंधन के नेता हैं जो भारत का एक राष्ट्र के तौर पर सम्मान नहीं करता और संविधान को स्वीकार नहीं करता। ऐसा अहंकार ठीक नहीं है।"
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इससे ठीक एक दिन पहले स्टालिन ने आरोप लगाया था कि राज्यपाल रवि इस बात को नहीं पचा पा रहे हैं कि राज्य विकास कर रहा है और विधानसभा को संबोधित न करने का उनका फैसला बचकाना था। दरअसल, राज्यपाल आरएन रवि छह जनवरी को विधानसभा में अपना पारंपरिक अभिभाषण दिए बिना ही चले गए थे। राजभवन ने बाद में बताया कि उन्हें इस बात का दुख हुआ कि राष्ट्रगान का धुन नहीं बजाया गया। मुख्यमंत्री ने शनिवार को कहा कि 2022 में राज्यपाल ने बिना किसी बदलाव के अपना अभिभाषण दिया। हालांकि, इसके तीन वर्षों में वह बेतुके कारणों का हवाला देते हुए अपना अभिभाषण देने से बचते रहें।
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