स्नातक, परास्नातक के अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा के मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
जस्टिस भूषण की बेंच देखेगी कि स्नातक, परास्नातक के छात्रों की परीक्षाएं आयोजित कराना संभव है या नहीं, यूजीसी रखेगी अपना पक्ष...
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देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्नातक और परास्नातक के अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा अनिवार्य रूप से लेने के यूजीसी के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दी गई है। अब इस मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस भूषण की बेंच में होगी। बेंच पहले से ही इस मुद्दे से जुड़ी दो अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
देश के 13 राज्यों और जम्मू-कश्मीर की एक यूनिवर्सिटी के 31 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं रोकने का अनुरोध किया है। छात्रों का कहना है कि देश के अनेक हिस्सों में कोरोना के तेज होते संक्रमण और बाढ़ की विभीषिका के बीच परीक्षा कराना संभव नहीं होगा।
इसी मुद्दे से जुड़े एक अन्य मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में भी चल रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बुधवार को यूजीसी से पूछा कि क्या विश्वविद्यालयों के अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से असाइनमेंट के आधार पर या किसी अन्य माध्यम से कराई जा सकती है। यूजीसी को 24 जुलाई तक अपना जवाब देने को कहा गया है।1
ऑनलाइन डिग्री देने पर हो विचार
अपने हितों के मुद्दों के लिए छात्रों को बार-बार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं। हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालयों के इस रवैये पर सख्त नाराजगी भी जताई है, और कहा है कि छात्रों को ऑनलाइन डिग्री, मार्कशीट और अन्य जरूरी दस्तावेज देने के लिए एक विशेष शाखा का गठन किया जाए।
यह मामला लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के पांच एमबीबीएस डॉक्टरों की याचिका की सुनवाई के दौरान आया। इन डॉक्टरों का कोर्स 2018 में ही पूर्ण हो चुका था, लेकिन अब तक उन्हें इसकी डिग्री नहीं मिल सकी है।