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Himachal: 'अगर अब नहीं चेते तो राज्य हवा में गायब हो जाएगा', हिमाचल की तबाही पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी

Fri, 01 Aug 2025 06:51 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 01 Aug 2025 06:51 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो हिमाचल हवा में गायब हो सकता है। अदालत ने अनियोजित विकास, सुरंग निर्माण और हाईड्रो प्रोजेक्ट्स को आपदा का कारण बताया।

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Supreme Court warning on Himachal's devastation say wake up now or state will vanish into air
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन और अनियंत्रित विकास कार्यों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो हिमाचल प्रदेश 'हवा में विलीन' हो सकता है। कोर्ट का यह कड़ा रुख उस याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया जिसमें राज्य सरकार द्वारा कुछ क्षेत्रों को ‘ग्रीन एरिया’ घोषित करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।
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कोर्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का खतरनाक असर साफ दिखाई दे रहा है। चार लेन की सड़कों, सुरंगों और बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के निर्माण के चलते क्षेत्र में भूस्खलन, सड़कें धंसना, मकानों का गिरना जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल राजस्व कमाना सरकार का लक्ष्य नहीं होना चाहिए, पर्यावरण की कीमत पर विकास नहीं किया जा सकता।
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हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता पर मंडरा रहा है संकट- कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि हिमाचल की प्राकृतिक संपदा और हरियाली पर इंसानी लालच और लापरवाही भारी पड़ रही है। राज्य की 66 फीसदी जमीन जंगलों से ढकी है, लेकिन तेजी से हो रहे अंधाधुंध निर्माण और पर्यटन के बेतहाशा विस्तार ने पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाया है। यदि यह रफ्तार यूं ही जारी रही तो राज्य की पहचान और अस्तित्व दोनों संकट में पड़ जाएंगे।
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हिमालयी राज्यों को मिलकर करना होगा समाधान
शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि हिमालयी राज्यों को आपस में सहयोग करते हुए विशेषज्ञों और संसाधनों का साझा उपयोग करना चाहिए ताकि पर्यावरणीय चुनौतियों का टिकाऊ समाधान निकाला जा सके। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को भी आगाह किया कि वह राज्य की पर्यावरणीय असंतुलन को नजरअंदाज न करे और अपनी जिम्मेदारी निभाए।

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कोर्ट ने केंद्र-राज्य से मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को जनहित याचिका में तब्दील कर लिया है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि उसने अब तक क्या कदम उठाए हैं और भविष्य की क्या योजना है। अदालत ने कहा कि चाहे अब तक जितना नुकसान हो चुका हो लेकिन कुछ नहीं से कुछ बेहतर होता है। अब यह मामला 25 अगस्त को दोबारा सुप्रीम कोर्ट में सुना जाएगा।
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