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नेपाल बाढ़: तमिलनाडु के 37 पर्यटक, ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य लापता; हेल्पलाइन नंबर भी जारी, कितने भारतीय फंसे?

Wed, 26 Aug 2026 10:54 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 26 Aug 2026 10:54 PM IST
सार

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारतीय पर्यटकों और कैलाश मानसरोवर यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। 130 से अधिक भारतीयों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 37 का अब तक पता नहीं चला है, जबकि ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य भी संपर्क से बाहर हैं। आखिर कितने भारतीय सुरक्षित हैं? कितनों तक अभी मदद नहीं पहुंच पाई है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Nepal Flood Tamil Nadu Tourists Isha Foundation Members Missing Helplines Issued How Many Indians Are Stranded
नेपाल बाढ़ - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नेपाल के मध्य हिस्सों में आई अचानक बाढ़ के बाद 130 से अधिक भारतीयों के लापता होने और कई लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों की है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में संपर्क और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है, जिससे लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटाना मुश्किल हो रहा है। भारतीय दूतावास और कई राज्यों ने प्रभावित लोगों तथा उनके परिवारों की मदद के लिए हेल्पलाइन शुरू की हैं।

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तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में कितने लोगों का पता चला?

तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 37 का अब तक पता नहीं चल सका है, जबकि 20 लोगों के बारे में जानकारी मिल गई है। अधिकारियों के अनुसार, ये पर्यटक हिमालय क्षेत्र में एक मंदिर की ओर जा रहे थे। बाढ़ के बाद संपर्क टूटने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। राज्य सरकार प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाने और नेपाल में फंसे तमिलनाडु के नागरिकों की सहायता के लिए प्रयास कर रही है।

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ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य कहां हैं?

कोयंबटूर स्थित ईशा फाउंडेशन ने बताया है कि उसके 77 सदस्य उस समय एक आव्रजन केंद्र में मौजूद थे और अब उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरू ने कहा कि केंद्र में मौजूद लोगों के बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। उनके अनुसार, संगठन के 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं। बाद में नेपाल सरकार ने बताया कि उस आव्रजन केंद्र का पूरा स्टाफ भी संपर्क से बाहर है।

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कोलकाता के कितने पर्यटक लापता?

  • कोलकाता से गए 32 पर्यटकों का दल भी लापता है। दल में 30 पर्यटक और दो पर्यटन कंपनी के कर्मचारी शामिल हैं। सभी 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुए थे और 22 अगस्त को नेपाल पहुंचे थे।
  • मंगलवार को दल काठमांडो में था। वहां से तस्वीरें व वीडियो भी भेजे थे। जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह दल को नेपाल-तिब्बत सीमा पार करनी थी। सुबह करीब साढ़े आठ बजे दल आव्रजन विभाग में मौजूद था, इसके बाद सभी से संपर्क टूट गया।
  • पर्यटन कंपनी के अनुसार, मानसरोवर यात्रा का प्रबंधन करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ने हेलीकॉप्टर से खोज की कोशिश की, लेकिन खराब परिस्थितियों के कारण घटनास्थल पर उतरना संभव नहीं हुआ। दल में शामिल एक भारतीय पर्यटक मानसरोवर दर्शन के लिए अमेरिका से आया था।
  • राज्य सरकार ने हेल्पलाइन भी शुरू की। नेपाल में फंसे पश्चिम बंगाल के लोगों और उनके परिजनों की सहायता के लिए राज्य सरकार ने भवानी भवन में हेल्पलाइन शुरू की है। लोग 033-24793311 और 9147890181 पर संपर्क कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के लोगों का क्या हाल है?

उत्तर प्रदेश के कई लोगों के नेपाल में फंसे होने की आशंका है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भी अपने साथियों के साथ सड़क मार्ग से नेपाल गए थे और पोखरा में फंस गए। उन्होंने बताया कि वे काठमांडू होते हुए विमान से दिल्ली लौटेंगे। महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे के दो-दो पर्यटक नेपाल में फंसे हैं, लेकिन अधिकारियों के अनुसार चारों सुरक्षित हैं। महाराष्ट्र सरकार अन्य संभावित प्रभावित लोगों की सूची तैयार कर रही है।

क्या कैलाश मानसरोवर यात्री भी बड़ी संख्या में प्रभावित हैं?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कम से कम 59 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्री लापता लोगों में शामिल हैं। बाढ़ से संचार व्यवस्था प्रभावित होने के कारण अभी पूरी तस्वीर साफ नहीं है। अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की ओर से लोगों की पहचान और स्थिति की पुष्टि की जा रही है। ऐसे में परिजनों से अपील की गई है कि आधिकारिक पुष्टि से पहले किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें।

कैलाश यात्रा पर गए आंध्र के तीर्थयात्री तिब्बत में फंसे

कुर्नूल के अडोनी निवासी तीर्थयात्री निवर्थी रंगनाथ शास्त्री ने बताया कि बाढ़ से सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण तीर्थयात्रियों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। डारचेन कैलाश पर्वत की परिक्रमा के लिए प्रमुख आधार केंद्र है। फिलहाल वहां स्थिति सामान्य है और होटल भोजन व जरूरी सामान उपलब्ध करा रहे हैं। शास्त्री के अनुसार, इलाके में ईशा फाउंडेशन से जुड़े कई समूह भी मौजूद हैं। तीर्थयात्रियों की आवाजाही के लिए चीनी अधिकारियों की अनुमति जरूरी है। उन्होंने भारत सरकार से फंसे यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए पहल करने की अपील की है।

केरल और सिक्किम ने क्या इंतजाम किए हैं?

केरल सरकार ने नेपाल में प्रभावित राज्य के लोगों के लिए नॉर्का-रूट्स के जरिए हेल्पडेस्क शुरू किया है। राज्य के अधिकारियों के अनुसार, नेपाल घूमने गया 36 लोगों का एक दल सुरक्षित है और प्रभावित इलाकों से दूर है। सिक्किम सरकार ने भी नेपाल में फंसे राज्य के लोगों के परिजनों की सहायता के लिए हेल्पलाइन शुरू की है। भारतीय दूतावास ने भी प्रभावित भारतीयों के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं।

भारतीय परिवारों के लिए कौन-कौन से मदद नंबर जारी हुए?

भारतीय दूतावास, काठमांडू के अनुसार, नेपाल में प्रभावित भारतीय नागरिक सहायता और जानकारी के लिए +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। केरल के लिए नॉर्का ग्लोबल कॉन्टैक्ट सेंटर का टोल-फ्री नंबर 18004253939 है। केरल के मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी प्रभावित परिवारों के लिए 9447111844 और 9747132147 नंबर जारी किए हैं। सिक्किम में 03592-201145, 03592-202461 और 03592-202256 पर संपर्क किया जा सकता है।

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