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Madras High Court: 'जीवित नेताओं के नाम पर न चलाई जाएं सरकारी योजनाएं', हाईकोर्ट का स्टालिन सरकार को निर्देश
Fri, 01 Aug 2025 02:37 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 01 Aug 2025 02:37 PM IST
सार
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह किसी भी सरकारी योजना में किसी जीवित व्यक्ति का नाम, तस्वीर या राजनीतिक दल का प्रतीक इस्तेमाल न करे। यह आदेश एआईएडीएमके सांसद द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद आया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों के मुताबिक ऐसी प्रचार सामग्री निष्पक्षता के खिलाफ है। अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।
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मद्रास हाईकोर्ट।
- फोटो : ANI
विस्तार
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह किसी भी जीवित व्यक्ति के नाम, किसी पूर्व मुख्यमंत्री या वैचारिक नेता की तस्वीर, राजनीतिक दल के प्रतीक, झंडे अथवा चिह्न का उपयोग सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में न करे। कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश एआईएडीएमके सांसद सी.वे. शन्मुगम और वकील इनियन की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु सरकार एक आदेश के जरिए ऐसी योजना चला रही है, जिसमें मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का नाम जोड़ा गया है। उन्होंने चुनाव आयोग और सरकारी विज्ञापन कंटेंट निगरानी समिति से इस पर कार्रवाई की मांग की है। शन्मुगम ने कहा कि इस तरह की योजनाएं मतदाताओं को गुमराह करने और सत्ताधारी दल के प्रचार के लिए चलाई जा रही हैं।
ये भी पढ़ें- राजनीतिक दलों पर पॉश कानून लागू करने की मांग वाली अर्जी खारिज, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार
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निर्देशों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए- हाईकोर्ट
कोर्ट ने कहा कि सरकारी विज्ञापनों के कंटेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई दिशानिर्देश जारी कर चुका है। वर्ष 2015 के ‘कॉमन कॉज बनाम भारत सरकार’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सरकारी विज्ञापनों में केवल प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की तस्वीर की अनुमति हो सकती है, वह भी सीमित उद्देश्य के लिए। किसी पूर्व नेता या वैचारिक व्यक्ति की तस्वीर का उपयोग अनुचित होगा।
ये भी पढ़ें- उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की तारीखों का एलान; 9 सितंबर को मतदान, नतीजे भी उसी दिन
राजनीतिक दलों के प्रतीक भी न हों शामिल
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सरकारी योजना के नाम में किसी जीवित राजनीतिक व्यक्ति का नाम देना या उसमें सत्ताधारी दल का प्रतीक, झंडा या चिह्न लगाना संविधान और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। यह न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है, बल्कि इससे मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास भी होता है।
13 अगस्त को अगली सुनवाई तय
कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल तमिलनाडु सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन को नहीं रोक रहा है, लेकिन यह स्पष्ट कर रहा है कि नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन होना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि यदि चुनाव आयोग या अन्य संस्था चाहे तो वह इस मामले पर कार्रवाई कर सकती है। इस याचिका पर अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।
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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु सरकार एक आदेश के जरिए ऐसी योजना चला रही है, जिसमें मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का नाम जोड़ा गया है। उन्होंने चुनाव आयोग और सरकारी विज्ञापन कंटेंट निगरानी समिति से इस पर कार्रवाई की मांग की है। शन्मुगम ने कहा कि इस तरह की योजनाएं मतदाताओं को गुमराह करने और सत्ताधारी दल के प्रचार के लिए चलाई जा रही हैं।
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निर्देशों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए- हाईकोर्ट
कोर्ट ने कहा कि सरकारी विज्ञापनों के कंटेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई दिशानिर्देश जारी कर चुका है। वर्ष 2015 के ‘कॉमन कॉज बनाम भारत सरकार’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सरकारी विज्ञापनों में केवल प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री की तस्वीर की अनुमति हो सकती है, वह भी सीमित उद्देश्य के लिए। किसी पूर्व नेता या वैचारिक व्यक्ति की तस्वीर का उपयोग अनुचित होगा।
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राजनीतिक दलों के प्रतीक भी न हों शामिल
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सरकारी योजना के नाम में किसी जीवित राजनीतिक व्यक्ति का नाम देना या उसमें सत्ताधारी दल का प्रतीक, झंडा या चिह्न लगाना संविधान और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है। यह न केवल सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है, बल्कि इससे मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास भी होता है।
13 अगस्त को अगली सुनवाई तय
कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल तमिलनाडु सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन को नहीं रोक रहा है, लेकिन यह स्पष्ट कर रहा है कि नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन होना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि यदि चुनाव आयोग या अन्य संस्था चाहे तो वह इस मामले पर कार्रवाई कर सकती है। इस याचिका पर अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।