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सुप्रीम कोर्ट: सीआईएसएफ कांस्टेबल की बर्खास्तगी का आदेश कायम रखा, कहा- बल में अनुशासन और अखंडता सर्वोपरि
Sun, 06 Mar 2022 05:55 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 06 Mar 2022 05:55 PM IST
सार
यह मामला साल 2000 का है जब कनिहा में स्थित नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन प्लांट के एक वॉचटावर में कांस्टेबल को एक अधिकारी ने सोते हुए पाया था। अधिकारी के फटकार लगाने पर कांस्टेबल ने अधिकारी पर ही हमला कर दिया था।
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सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : PTI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने एक सीआईएसएफ कांस्टेबल को बर्खास्त करने का साल 2001 का आदेश बरकरार रखा है। इस कांस्टेबल ने एक अधिकारी पर कथित तौर पर हमला कर दिया था जब अधिकारी ने उसे गश्त ड्यूटी के दौरान सोता हुआ पाया था और फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा कि अखंडता, अनुशासन और सौहार्द की भावना बल की प्रकृति को देखते हुए सर्वोपरि है।
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न्यायाधीश संजीव खन्ना और बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने यह फैसला केंद्र सरकार और अन्य की ओर से ओडिशा हाईकोर्ट की एक खंड पीठ के जनवरी 2018 के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनाया। खंड पीठ ने अपने आदेश में कांस्टेबल को सुनाई गई बर्खास्तगी की सजा को रद्द करने वाले एकल-न्यायाधीश पीठ के आदेश की पुष्टि की थी।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि बर्खास्त किया गया व्यक्ति केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में एक कांस्टेबल था। यह एक ऐसा विशेष पुलिस बल है जो अंतरिक्ष विभाग, परमाणु ऊर्जा विभाग और भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है। पीठ ने यह आदेश बीती 24 फरवरी को सुनाया था, जो रविवार को उपलब्ध कराया गया।
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