Supreme Court: पेड़ों की कटाई मामले में DDA को अवमानना नोटिस; 8 मई को अगली सुनवाई; पढ़ें कोर्ट की अहम खबरें
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी किया है। नोटिस मैदान गढ़ी के पास छतरपुर रोड और सार्क विश्वविद्यालय के बीच सड़क के निर्माण के लिए 1,000 से अधिक पेड़ों की कटाई के मामले में जारी किया गया है। जस्टिस बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि अदालत के मना करने के बावजूद डीडीए ने सड़क निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई जारी रखी। यह कोर्ट के आदेश की अवहेलना है।
पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया हमने पाया कि सड़क निर्माण के लिए पेड़ों को काटने की डीडीए की कार्रवाई कोर्ट के आदेश का अवमानना है। कोर्ट ने 8 फरवरी और 4 मार्च 2024 को इससे जुड़ा आदेश पारित किया था। पीठ ने मामले को 8 मई को सुनवाई के लिए पोस्ट करते हुए कहा कि डीडीए के उपाध्यक्ष को नोटिस जारी किया जाए और कारण बताने के लिए कहा जाए कि अदालत के आदेश की अवमानना करने के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए?
कलेसर वन्यजीव अभयारण्य के अंदर 4 बांधों के निर्माण पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के यमुनानगर जिले में स्थित कलेसर वन्यजीव अभयारण्य के अंदर चार प्रस्तावित बांधों के निर्माण पर बुधवार को रोक लगा दी। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र, हरियाणा सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा। कोर्ट ने कहा कि बांधों का निर्माण न केवल कलेसर में वन्यजीवों और आबादी के लिए हानिकारक होगा, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी नुकसानदेह होगा और जिस उद्देश्य के लिए बांधों का निर्माण प्रस्तावित है, वह भी हासिल नहीं किया जा सकेगा।
चुनावी हिंसा का मामला, बंगाल की अर्जी पर एक मई को सुप्रीम सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी हिंसा की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से की जा रही जांच के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई एक मई तक स्थगित कर दी है। बंगाल सरकार ने आरोप लगाया है कि सीबीआई राज्य से पूर्व अनुमति लिए बिना ही मामलों की जांच कर रही है।
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता के आग्रह पर सुनवाई स्थगित कर दी, जिन्होंने अदालत को बताया कि उन्हें नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ के सामने पेश होना है।
मेहता ने पीठ से कहा, मुझे पता है कि मैंने कई मौकों पर स्थगन की मांग की है, लेकिन आज संविधान पीठ के सामने मेरी बारी आ रही है। यह मेरे नियंत्रण में नहीं है।
2जी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बदलाव की कोई कोशिश नहीं
केंद्र सरकार दूरसंचार स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए नीलामी को अहमियत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में किसी भी तरह के बदलाव की कोशिश नहीं कर रही है। एक शीर्ष सूत्र ने बुधवार को यह बात कही।
दरअसल सरकार ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर रक्षा, सैटेलाइट आदि विशिष्ट क्षेत्रों को स्पेक्ट्रम आवंटन के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की अपील की है। एक शीर्ष सूत्र ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2012 के अपने फैसले में दूरसंचार स्पेक्ट्रम के आवंटन के लिए नीलामी को ही जरिया बनाने का निर्देश दिया था। हालांकि सैटेलाइट संचार और रक्षा जैसे विशिष्ट क्षेत्रों को इसके दायरे में नहीं रखा गया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले साल 15 दिसंबर को शीर्ष अदालत में एक अर्जी दायर कर कुछ विशिष्ट क्षेत्रों को स्पेक्ट्रम आवंटन के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की अपील की थी। इसमें विशिष्ट उद्देश्यों वाले क्षेत्र जैसे सैटेलाइट संचार, रक्षा बलों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, मेट्रो या रेलवे संचालन के लिए नीलामी के बगैर स्पेक्ट्रम आवंटित करने को लेकर स्पष्टीकरण देने का आग्रह किया गया था। याचिका दिसंबर के अंत में संसद में दूरसंचार विधेयक को पारित करने से पहले दायर की गई थी। यह याचिका सोमवार को सुनवाई के लिए रखी गई। नए विधेयक में 19 छूटें दी गई हैं।