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Supreme Court: 'पूरी तरह हत्या का मामला', शीर्ष कोर्ट ने ऑनर किलिंग केस में कठोर आरोप तय करने का दिया आदेश
Fri, 18 Apr 2025 06:00 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 18 Apr 2025 06:00 PM IST
सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने सहारनपुर ऑनर किलिंग मामले में आरोपपत्र में लगाए गए हल्के आरोपों पर सख्त रुख अपनाते हुए हत्या कठोर आरोप तय करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह साफ तौर पर ऑनर किलिंग का मामला है और केवल आग्नेयास्त्र न होने से इसे गैर-इरादतन हत्या नहीं माना जा सकता।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक ऑनर किलिंग के मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। मामले में परिवार के सदस्यों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का आरोप तय किया गया था। शीर्ष कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कठोर आरोप तय करने का आदेश दिया।
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मामले पर चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच सुनवाई कर रही थी। बेंच ने निचली अदालत और उच्च न्यायाालय के आदेश को दरकिनार किया और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह जिया-उर-रहमान (26 वर्षीय) के पिता की सहमति से सहारनपुर की अदालत में मुकदमा चलाने के लिए एक विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करें।
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धारा 302 और धारा 304 में अंतर
धारा 302 के तहत अपराध का मुख्य घटक होता है- जानबूझकर किसी की हत्या करना। अगर ये साबित हो जाए, तो आरोपी को उम्रकैद या फांसी की सजा हो सकती है। अगर किसी पर गैर इरादतन हत्या (धारा 304) का आरोप लगाया जाता है, तो इसका मतलब होता है कि मरने वाले की मौत तो हुई, लेकिन जिसने किया, उसका इरादा जान से मारने का नहीं था या उसे इसकी पूरी जानकारी नहीं थी। इसलिए इसमें सजा भी हल्की होती है। इसमें सजा 10 साल की जेल से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है।
क्या हुआ था मामला
रहमान कथित तौर पर अपनी प्रेमिका के साथ पकड़ा गया था, जो दूसरे धर्म से ताल्लुक रखती थी। इसके बाद लड़की के परिवार के सदस्यों ने लोड़े की छड़ों और लाठी-डंडों से कथित तौर पर जानलेवा हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई था।
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सीजेआई ने जताई हैरानी
सीजेआई ने 17 अप्रैल को इस बात पर हैरानी जताई कि निचली अदालत ने परिवार के सदस्यों के खिलाफ हल्के आरोप तय किए, जिसका मुख्य आधार यह था कि किसी भी प्रकार के आग्नेयास्त्र का उपयोग नहीं किया गया था और सबसे जरूरी बात यह थी कि आरोपी की मंशा और जानकारी गायब थी। सीजेआई ने कहा, यह तो सीधे हत्या (का मामला) है। यह ऑनर किलिंग का मामला है। सिर्फ इसलिए कि व्यक्ति दूसरे धर्म का था, आपने उसे मार डाला.. उस पर दस चोटों के निशान मिले हैं।
जस्टिस खन्ना ने कहा, हमें थोड़ी हैरानी हो रही है कि क्यों आरोपपत्र धारा 304 के तहत दायर की गई और फिर निचली अदालत ने धारा 304 के तहत आरोप तय किए। कोर्ट ने कहा कि कोई हथियार इस्तेमाल नहीं हुआ, इसलिए धारा 302 (हत्या) नहीं लगाई जा सकती… और हाई कोर्ट ने भी इसे सही ठहराया।
बेंच ने राज्य सरकार से कहा कि वह मृतक के पिता अय्यूब अली से सलाह लेकर एक विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नियुक्त करे। इसके साथ ही बेंच ने आरोपियों के परिवार से कहा कि वे हत्या के आरोप लगाए जाने के बाद जमानत की नई याचिका दाखिल करें। हालांकि, आरोपियों को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जब तक उनकी नई जमानत याचिकाओं पर फैसला नहीं हो जाता।
उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी थी याचिका
उच्च न्यायालय ने 31 अगस्त 2024 को अय्यूब अली की याचिका खारिज कर दी थी। 27 फरवरी 2024 को सहारनपुर के अतिरिक्त जिला जज ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने नेशर, मनेशर, प्रियांशु और शिवम पर धारा 302 (हत्या) के तहत आरोप लगाने की मांग की थी। जिसके बाद अय्यूब अली ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
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