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Supreme Court: मेस के खाने पर भड़के सैनिक की सजा माफ नहीं; जवानों पर चलाई थी गोलियां; हाईकोर्ट का फैसला पलटा
Fri, 18 Apr 2025 05:13 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 18 Apr 2025 05:13 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने सहकर्मियों पर गोली चलाने वाले सैन्यकर्मी की सजा बरकरार रखने का आदेश पारित किया है। शीर्ष अदालत ने सैन्यकर्मी को बरी करने के हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया है। मामला सेना की मेस में खाने की खराब गुणवत्ता से जुड़ा है।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सहकर्मियों पर सर्विस हथियार से गोली चलाने वाले एक सैन्यकर्मी की सजा को बरकरार रखा है। सैन्यकर्मी ने मेस में परोसे गए खाने से असंतुष्ट होकर घटना को अंजाम दिया था। जस्टिस पंकज मित्थल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 2014 के फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत बरी कर दिया गया था।
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एके-47 से अंधाधुंध गोलीबारी की
पीठ ने कहा, तथ्यों और परिस्थितियों से पता चलता है कि आरोपी ने गुस्से में अपने सर्विस हथियार एके-47 से अंधाधुंध गोलीबारी की। वह अच्छी तरह जानता था कि गोली उसके किसी सहकर्मी को शारीरिक चोट पहुंचा सकती है, जिससे आगे चलकर उसकी मृत्यु भी हो सकती है।
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सहकर्मियों को शारीरिक चोट पहुंचाने के इरादे से चलाई गोली
पीठ ने 17 अप्रैल के अपने फैसले में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी कांस्टेबल ने अपने सहकर्मियों को शारीरिक चोट पहुंचाने के इरादे से घटना को अंजाम दिया। इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि घायलों को चार चोटें आईं थीं, दोनों ऊपरी जांघों पर दो-दो और वे गंभीर प्रकृति की थीं।
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सजा को लेकर क्या बोली शीर्ष अदालत
चोटें भले ही जानलेवा न हों, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि हत्या का इरादा था। हालांकि, पीठ ने कहा, न्याय के हित में हम सजा को सात वर्ष के कठोर कारावास के स्थान पर पहले से भुगती गई सजा (लगभग 1 वर्ष 5 महीने) तक घटाते हैं।