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Supreme Court: एमएसपी से संबंधित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य को भेजा नोटिस
Mon, 13 Apr 2026 12:16 PM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 13 Apr 2026 12:16 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करते समय खेती की सटीक लागत पर राज्यों के प्रस्तावों को महत्व देने की याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा। सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर याचिका पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि याचिका देश के किसानों से संबंधित एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाती है। याचिका में अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे खेती की सटीक लागत के आधार पर गणना किए गए एमएसपी के तहत अधिसूचित सभी फसलों की पूर्ण खरीद सुनिश्चित करें।
याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि उन सभी किसानों से फसलों की पूर्ण खरीद सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं, जो अपनी फसलों को एमएसपी पर बेचना चाहते हैं।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि याचिका देश के किसानों से संबंधित एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाती है। याचिका में अधिकारियों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे खेती की सटीक लागत के आधार पर गणना किए गए एमएसपी के तहत अधिसूचित सभी फसलों की पूर्ण खरीद सुनिश्चित करें।
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याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि उन सभी किसानों से फसलों की पूर्ण खरीद सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं, जो अपनी फसलों को एमएसपी पर बेचना चाहते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में आज और किन मामलों पर होनी है सुनवाई?
- ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर के प्रबंधन से संबंधित याचिका पर सुनवाई करेगा।
- गाजियाबाद में चार साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या के मामले में एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।
- देशभर के न्यायाधीशों के कल्याण से संबंधित अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ की याचिका पर सुनवाई करेगा।
- चंबल रिजर्व में अवैध रेत खनन से संबंधित याचिका पर सुनवाई करेगा।
- कश्मीरी अलगाववादी नेता मसरत आलम भट की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसकी जांच एनआईए द्वारा एक आतंकी मामले में की जा रही है।
- नीतीश कटारा हत्याकांड में दोषी विकास यादव की याचिका पर सुनवाई करेगा।
- सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड़ की याचिका पर सुनवाई करेगा।
बांके बिहारी ट्रस्ट मामले में सुनवाई टली
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 से जुड़े अहम मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी है। अदालत ने साफ कहा कि फिलहाल मंदिर के प्रशासन की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं को उच्चाधिकार प्राप्त समिति की स्टेटस रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए समय दिया। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट सुनवाई से ठीक एक दिन पहले दी गई, इसलिए उचित समय देना जरूरी है। साथ ही अदालत ने एक अन्य आवेदन पर नोटिस जारी कर तथ्यों में स्पष्टीकरण मांगा है।
दरभंगा के ऐतिहासिक तालाबों पर अतिक्रमण
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के दरभंगा शहर के तीन ऐतिहासिक तालाबों पर कथित अतिक्रमण और भराई के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 4 मई तय की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गंगा सागर, डिग्गी और हराही जैसे सैकड़ों साल पुराने तालाबों को राज्य की एजेंसियों द्वारा भरा जा रहा है, जो अदालत और एनजीटी के आदेशों के खिलाफ है।
याचिकाकर्ता एनजीओ तालाब बचाओ अभियान ने दावा किया है कि ये तालाब 800 से 900 साल पुराने हैं और ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर हैं। याचिका में कहा गया है कि बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन जैसी एजेंसियां इन जलाशयों को खत्म कर रही हैं। अदालत से मांग की गई है कि अतिक्रमण हटाकर तालाबों को उनके पुराने स्वरूप में बहाल किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 से जुड़े अहम मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी है। अदालत ने साफ कहा कि फिलहाल मंदिर के प्रशासन की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ताओं को उच्चाधिकार प्राप्त समिति की स्टेटस रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए समय दिया। कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट सुनवाई से ठीक एक दिन पहले दी गई, इसलिए उचित समय देना जरूरी है। साथ ही अदालत ने एक अन्य आवेदन पर नोटिस जारी कर तथ्यों में स्पष्टीकरण मांगा है।
दरभंगा के ऐतिहासिक तालाबों पर अतिक्रमण
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के दरभंगा शहर के तीन ऐतिहासिक तालाबों पर कथित अतिक्रमण और भराई के मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 4 मई तय की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गंगा सागर, डिग्गी और हराही जैसे सैकड़ों साल पुराने तालाबों को राज्य की एजेंसियों द्वारा भरा जा रहा है, जो अदालत और एनजीटी के आदेशों के खिलाफ है।
याचिकाकर्ता एनजीओ तालाब बचाओ अभियान ने दावा किया है कि ये तालाब 800 से 900 साल पुराने हैं और ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर हैं। याचिका में कहा गया है कि बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन जैसी एजेंसियां इन जलाशयों को खत्म कर रही हैं। अदालत से मांग की गई है कि अतिक्रमण हटाकर तालाबों को उनके पुराने स्वरूप में बहाल किया जाए।
उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की समीक्षा याचिका, खुली अदालत में सुनवाई की मांग
छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की समीक्षा की मांग की है, जिसमें उन्हें 2020 दिल्ली दंगों के मामले में जमानत देने से इनकार किया गया था। उनके वकील कपिल सिब्बल ने अदालत से खुली अदालत में सुनवाई की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार समीक्षा याचिकाएं आमतौर पर जजों के चैंबर में सुनी जाती हैं। कोर्ट ने कहा कि दस्तावेज देखने के बाद जरूरत पड़ी तो खुली सुनवाई पर विचार किया जाएगा। इससे पहले अदालत ने खालिद के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला मानते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की समीक्षा की मांग की है, जिसमें उन्हें 2020 दिल्ली दंगों के मामले में जमानत देने से इनकार किया गया था। उनके वकील कपिल सिब्बल ने अदालत से खुली अदालत में सुनवाई की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार समीक्षा याचिकाएं आमतौर पर जजों के चैंबर में सुनी जाती हैं। कोर्ट ने कहा कि दस्तावेज देखने के बाद जरूरत पड़ी तो खुली सुनवाई पर विचार किया जाएगा। इससे पहले अदालत ने खालिद के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला मानते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी थी।