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Supreme Court: छत्तीसगढ़ के व्यवसायी की जमानत याचिका सुनवाई 3 को; महादेव सट्टेबाजी एप मामले में लगाई अर्जी

Tue, 01 Oct 2024 02:17 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Tue, 01 Oct 2024 02:17 PM IST
सार

केंद्रीय जांच एजेंसी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा सहित 10 लोगों की संपत्तियों की तलाशी भी ली थी। मामले में दम्मानी के अलावा उनके भाई अनिल दम्मानी, छत्तीसगढ़ पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक चंद्र भूषण वर्मा और रायपुर निवासी सतीश चंद्राकर को भी गिरफ्तार किया गया था।

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Supreme Court Updates: Mahadev betting app case SC to hear bail plea of Chhattisgarh businessman on Oct 3
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के व्यवसायी सुनील दम्मानी की जमानत याचिका पर 3 अक्टूबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई। सुनील दम्मानी को प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले साल अगस्त में अवैध जुआ महादेव एप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ से जेल में बंद व्यवसायी के वकील ने आग्रह किया कि जमानत याचिका पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है।
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दम्मानी के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल 13 महीने से अधिक समय से जेल में हैं। इस पर सीजेआई ने कहा कि हम आमतौर पर किसी निश्चित दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध मामलों को नहीं छोड़ते हैं, लेकिन यह जमानत याचिका है। हम इस पर गुरुवार को सुनवाई करेंगे। पिछले साल 23 अगस्त को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव एप मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित संलिप्तता के लिए दम्मानी के साथ तीन अन्य को गिरफ्तार किया था।
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10 लोगों की संपत्तियों की तलाशी भी ली थी
केंद्रीय जांच एजेंसी ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा सहित 10 लोगों की संपत्तियों की तलाशी भी ली थी। मामले में दम्मानी के अलावा उनके भाई अनिल दम्मानी, छत्तीसगढ़ पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक चंद्र भूषण वर्मा और रायपुर निवासी सतीश चंद्राकर को भी गिरफ्तार किया गया था। ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग मामला दुर्ग जिले के मोहन नगर पुलिस स्टेशन में अवैध जुआ ऐप 'महादेव' के खिलाफ 2022 में राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है।
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ईडी के आरोप
ईडी के मुताबिक, दम्मानी बंधुओं की एक ज्वैलरी शॉप और एक पेट्रोल पंप है और कथित तौर पर हवाला लेन-देन में उनकी भूमिका थी। एएसआई वर्मा ने कथित तौर पर अन्य आरोपियों को पुलिस कार्रवाई से बचाने के लिए उनसे पैसे लिए और संदेह है कि उसने अन्य पुलिस अधिकारियों को भी पैसे दिए।

Supreme Court Updates: Mahadev betting app case SC to hear bail plea of Chhattisgarh businessman on Oct 3
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

गिर सोमनाथ के कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
सुम्मासत पाटनी मुस्लिम जमात ने गिर सोमनाथ के कलेक्टर और अन्य अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका दरगाह मंगरोली शाह बाबा, ईदगाह और प्रभास पाटन, वेरावल, गिर सोमनाथ में स्थित कई अन्य संरचनाओं के कथित अवैध विध्वंस के संबंध में हैं।

महादेव एप मामले में कारोबारी की जमानत अर्जी पर सुनवाई कल
सुप्रीम कोर्ट महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार छत्तीसगढ़ के कारोबारी सुनील दमानी की जमानत याचिका पर 3 अक्तूबर को सुनवाई करेगा। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ से जेल में बंद कारोबारी के वकील की दलीलें सुनने के बाद बृहस्पतिवार को सुनवाई पर सहमति जताई।

भाजपा पार्षद ने सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली मेयर के खिलाफ अवमानना याचिका वापस ली
दिल्ली नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा पार्षद राजा इकबाल सिंह ने महापौर शैली ओबेरॉय के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस ले ली। सिंह ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर ओबेरॉय के खिलाफ अदालत के आदेश की अनदेखी के आरोप में अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्ज्वल भुइंया की पीठ ने इसके साथ ही याचिका को वापस मानते हुए खारिज कर दिया।

दरअसल, शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। याचिका के अनुसार, चुनाव पहले से तय थे, लेकिन मेयर ओबेरॉय ने मनमाने ढंग से इसे 5 अक्तूबर, 2024 तक के लिए स्थगित कर दिया। यह कृत्य कथित तौर पर दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत निर्धारित एक महीने की समय सीमा की अवहेलना थी, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में संभावित व्यवधानों पर चिंताएं पैदा हुईं। स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने हस्तक्षेप करते हुए चुनाव को निर्धारित दिन पर ही देर से कराने का आदेश दिया, लेकिन मेयर ने इसे फिर से स्थगित कर दिया। स्थगन की इस शृंखला ने एमसीडी के भीतर कानूनी और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के उचित निष्पादन पर विवाद को जन्म दिया।

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