Supreme Court: 'अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं, उच्च पद पर दावा नहीं कर सकते', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
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इस पर बेंच ने पूछा, "तो हमें सभी को चांद पर भेज देना चाहिए या कहीं और?" याचिकाकर्ता ने कहा कि हाल ही में जापान में एक बड़ा भूकंप आया था। बेंच ने कहा, "पहले हमें इस देश में ज्वालामुखी लाने होंगे, फिर हम इसकी तुलना जापान से कर सकते हैं।" याचिकाकर्ता ने कहा कि अधिकारियों को भूकंप आने की स्थिति में नुकसान को कम करने के लिए इंतजाम करने चाहिए। जिस पर बेंच ने कहा, "इसका ध्यान सरकार को रखना है; यह कोर्ट ऐसा नहीं कर सकता।" और इसी के साथ याचिका को खारिज कर दिया।
कानून के सिद्धांत संवेदना के आधार पर नहीं बदले जा सकते- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत जिम्मेदारी तय करने के लिए ठोस और विश्वसनीय सबूत आवश्यक हैं और अदालतें केवल सहानुभूति के आधार पर कानून के सिद्धांतों को नहीं बदल सकतीं। अदालत ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें 2013 की एक सड़क दुर्घटना के दावों को खारिज कर दिया गया था। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि दुर्घटना में दो युवकों की मौत दुखद है, लेकिन कानून सबूतों पर चलता है। पीठ ने कहा कि दावेदार यह साबित नहीं कर सके कि जिस वाहन पर आरोप लगाया गया वह वास्तव में दुर्घटना में शामिल था। अदालत ने कहा कि केवल एफआईआर पर्याप्त नहीं होती, बल्कि वाहन और चालक की पहचान और उनका दुर्घटना से संबंध पुख्ता सबूतों से साबित होना चाहिए। मोटर वाहन निरीक्षक की रिपोर्ट में भी वाहन को कोई नुकसान नहीं दिखा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निचली अदालतों ने सबूतों की सही जांच की है और उनके निष्कर्षों में कोई त्रुटि नहीं पाई जाती। इसलिए अपीलों को खारिज किया जाता है।
CAPF कर्मियों पर जुर्माने और बेदखली की तलवार, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के सैकड़ों जवान और अधिकारी अब जुर्माने और बेदखली के खतरे से घिरे हैं। 2017 में आए एक आदेश के बाद दिल्ली, कोलकाता और चंडीगढ़ में सामान्य पूल आवास (GPRA) में रह रहे इन कर्मियों को सिर्फ तीन साल तक घर रखने की अनुमति दी गई। पहले वे कठिन इलाकों में तैनाती के दौरान परिवारों को इन शहरों में रख सकते थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में मंत्रालय के फैसले को सही ठहराया, जिसके बाद कई जवानों को लाखों के जुर्माने और बेदखली नोटिस मिले हैं।
कई प्रभावित कर्मी अब सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल करने की तैयारी में हैं। गृह मंत्रालय ने भी स्थिति को गंभीर मानते हुए आवास मंत्रालय से समाधान निकालने को कहा है। मंत्रालयों के बीच बातचीत जारी है और दंड माफी तथा पुराने नियम बहाल करने पर विचार हो रहा है। लगभग 500 CAPF कर्मियों पर इसका सीधा असर पड़ा है। जवानों का कहना है कि वे देश की सुरक्षा में जान जोखिम में डालते हैं, ऐसे में परिवारों को संकट में डालना अन्यायपूर्ण है। सरकार से उम्मीद है कि मार्च 2026 तक घर रखने की अनुमति और आर्थिक राहत जल्द मिलेगी।
Supreme Court: 'अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं, उच्च पद पर दावा नहीं कर सकते', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
अदालत ने यह फैसला तमिलनाडु प्रशासन की दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनाया, जिनमें मद्रास हाई कोर्ट के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें दयापूर्ण आधार पर झाड़ू लगाने वाले (sweepers) दो कर्मचारियों को जूनियर असिस्टेंट पद पर पदोन्नत करने का निर्देश दिया गया था। पीठ ने कहा कि सिर्फ पात्रता ही आवेदक को उच्च पद पर नियुक्ति का दावा करने का आधार नहीं बन सकती।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'एक बार दिवंगत कर्मचारी के परिवार के सदस्य को दयापूर्ण आधार पर नियुक्ति दे दी जाती है, तो मूल उद्देश्य पूरा हो जाता है। इसलिए, यह दावा कि उन्हें उच्च पद पर पुनर्विचार का अधिकार है, स्वीकार्य नहीं है।' अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए, जबकि दयापूर्ण नियुक्ति इन मानकों का अपवाद है। पीठ ने कहा, 'दयापूर्ण आधार एक रियायत है, अधिकार नहीं।'