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केरल HC के शादी रद्द करने के फैसले की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट

Wed, 04 Oct 2017 04:37 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Oct 2017 04:37 AM IST
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Supreme Court to investigate the decision to cancel the marriage of Kerala HC
केरल के रहने वाले शख्स शफीन जहां

सुप्रीम कोर्ट इस पर विचार करेगा कि क्या केरल हाईकोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए एक मुस्लिम युवक की हिंदू से मुस्लिम बन चुकी लड़की से शादी को निरस्त करने का अधिकार है।

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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ केरल निवासी शफीन जहां की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें उसने अपनी शादी को लव जिहाद करार देते हुए उसकी एनआईए जांच के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।
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शफीन के वकील दुष्यंत दवे ने मंगलवार को अपनी दलील में कहा कि एनआईए जांच के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने हमारे बहुधर्मी समाज की बुनियाद को हिलाकर रख दिया है। उन्होंने इस जांच आदेश को वापस लने का आग्रह करते हुए मामले की जल्द सुनवाई की गुहार लगाई।
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ये भी पढ़ें- केरल ‘लव जिहाद’ मामले की NIA जांच रोकने को सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इस पर पीठ ने कहा कि लव जिहाद की साजिश है या नहीं, यह तो बाद की बात है। पहले तो सवाल यह है कि क्या हाईकोर्ट संविधान के अनुच्छेद 226 में प्रदत्त परमादेश जारी करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए दो वयस्कों की शादी को निरस्त कर सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि 24 साल की एक लड़की के पिता को उसकी जिंदगी में दखल नहीं देना चाहिए। मालूम हो कि इससे पहले शीर्ष अदालत ने 16 अगस्त को अपने आदेश में कहा था कि एनआईए इस बात की जांच करे कि शफीन की शादी कहीं लव जिहाद की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा तो नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आरवी रवींद्रन की निगरानी में यह जांच चल रही है।

अदालत ने कहा चिल्लाइए मत

Supreme Court to investigate the decision to cancel the marriage of Kerala HC

दवे ने ऊंची आवाज में अपनी दलील पेश करनी शुरू की तो पीठ ने कहा कि चिल्लाइए मत। इस पर दवे ने कहा कि मैं चिल्लाऊंगा क्योंकि केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ न तो राज्य सरकार, न ही लड़की का पिता और न ही एनआईए ने अपील की।

उसके खिलाफ जहां ने अपील की लेकिन अदालत ने एनआईए जांच का आदेश दे दिया। इस मामले में विद्वान न्यायाधीशों ने एनआईए जांच का आदेश देकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है। भाजपा के दो बड़े नेताओं ने अल्पसंख्यकों से विवाह किया है, तो क्या अदालत उन मामलों में भी एनआईए जांच का आदेश देगी?

क्या है मामला
पिछले साल दिसंबर में जहां ने एक हिंदू लड़की से शादी की थी, जिसने विवाह से पहले ही मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया था। केरल हाईकोर्ट ने 24 मई को इस शादी को लव जिहाद बताते हुए निरस्त कर दिया।

इसके बाद से ही लड़की अपने पिता के पास रह रही है। जहां ने इसे स्त्रियों की स्वतंत्रता का उल्लंघन करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जबकि उस लड़की के पिता का आरोप है कि जहां को महज कठपुतली है।

दरअसल, उनकी लड़की को बहला-फुसलाकर मुसलमान बनाया गया है और उसे आतंकी संगठन आईएस में भर्ती कर दिया गया है। यह अकेले मामला नहीं है। राज्य में एक संगठित गिरोह काम कर रहा है तो धर्म परिवर्तन करवाकर इस्लामिक कट्टरता को बढ़ावा दे रहा है।

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