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इतालवी नाविकों का मामला बंद करने से पहले पीड़ित परिवारों का पक्ष सुनेगा सुप्रीम कोर्ट

Fri, 07 Aug 2020 05:32 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 07 Aug 2020 05:32 PM IST
सार

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र को स्पष्ट कर दिया कि फरवरी, 2012 में केरल तट से दूर दो भारतीय मछुआरों को गोली मारने के आरोपी दो इतालवी नाविकों के मामले को बंद करने की उसकी अर्जी पर पीड़ित परिवारों का पक्ष सुने बगैर कोई आदेश नहीं दिया जाएगा। 

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Supreme Court to hear the side of families of Victims before closing case if Italian sailors
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से केंद्र की अर्जी पर सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को यह स्पष्ट किया। पीठ ने कहा कि पीड़ित परिवारों को समुचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। 

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पीठ ने केंद्र को इस घटना में मारे गए मछुआरों के परिवार के सदस्यों को पक्षकार बनाते हुए इतालवी नाविकों का मामला बंद करने के लिए आवेदन दायर करने की अनुमति दी। पीठ ने केंद्र को मामला बंद करने के लिए नए आवेदन में पीड़ितों के परिवारों को पक्षकार बनाते हुए एक सप्ताह में इसे दायर करने की अनुमति दे दी।
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मेहता ने पीठ को सूचित किया कि इटली सरकार ने भारत सरकार को यह आश्वासन दिया है कि वह इन नाविकों पर मुकदमा चलाएगी। पीड़ितों के परिवारों को समुचित मुआवजा दिए जाने पर जब पीठ ने जोर दिया तो मेहता ने कहा कि केंद्र यह सुनिश्चित करेगा कि पीड़ित परिवारों को अधिकतम मुआवजा दिया जाए।
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इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने इन नाविकों पर मुकदमा चलाने के लिए उठाए गए इटली के कदमों की सराहना की। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि वह पीड़ित परिवारों के लिए समुचित मुआवजे के विषय पर बात कर रही है जो पीड़ित परिवारों को दिया जाना चाहिए।

पीठ ने विशेष अदालत में इतालवी नाविकों का मामला लंबित होने का जिक्र किया और सवाल किया कि वहां मुकदमा वापस लेने के लिए आवेदन के बगैर केंद्र कैसे मामला बंद कराने के लिए यहां आ सकता है। मेहता ने जवाब दिया कि शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि विशेष अदालत की कार्यवाही विलंबित रखी जाए।

इस पर पीठ ने कहा, ‘आप वहां मुकदमा वापस लेने का आवेदन कर सकते हैं। पीड़ित परिवारों को इसका विरोध करने का अधिकार है। पीड़ितों के परिवार यहां पक्षकार भी नहीं हैं। हम पीड़ित परिवारों को सुने बगैर कोई आदेश पारित नहीं करेंगे।’


केंद्र ने तीन जुलाई को शीर्ष अदालत में इतालवी नाविकों के खिलाफ चल रही कार्यवाही बंद करने के लिए एक आवेदन दायर किया था। केंद्र ने कहा था कि उसने हेग स्थित पंचाट की स्थाई अदालत का 21 मई, 2020 का फैसला स्वीकार कर लिया है कि भारत इस मामले में मुआवजा पाने का हकदार है। लेकिन, नाविकों को प्राप्त छूट की वजह से वह इन पर मुकदमा नहीं चला सकता।

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