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Supreme Court: 'अदालत को न बनाएं जंग का मैदान, पहले अपनाएं मध्यस्थता', वैवाहिक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

Tue, 20 Jan 2026 08:46 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Tue, 20 Jan 2026 08:46 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि पति-पत्नी आपसी झगड़ों के लिए अदालतों को युद्धक्षेत्र न बनाएं। कोर्ट ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप से विवाद बढ़ता है और सिस्टम पर बोझ पड़ता है। 

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Supreme Court takes a tough stance marital disputes Dont turn the court into a battlefield try mediation first
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने गहा कि वैवाहिक रिश्ते में लड़ रहे पति-पत्नी अदालतों को अपना युद्धक्षेत्र नहीं बना सकते। कोर्ट ने साफ कहा कि आरोप-प्रत्यारोप से न सिर्फ विवाद बढ़ता है, बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी अनावश्यक बोझ पड़ता है। ऐसे मामलों में मध्यस्थता (मेडिएशन) के जरिए जल्द समाधान तलाशा जाना चाहिए। बता दें कि यह टिप्पणी जस्टिस राजेश बिंदल और मनमोहन की पीठ ने उस मामले में की, जिसमें पति-पत्नी केवल 65 दिन साथ रहे थे और 10 साल से ज्यादा समय से अलग रह रहे थे।

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कोर्ट ने इसे शादी का पूरी तरह टूट जाना मानते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह को समाप्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पति-पत्नी के बीच तालमेल नहीं है, तो विवाद सुलझाने के कई रास्ते मौजूद हैं। अदालत जाने से पहले और मुकदमा शुरू होने के बाद भी मध्यस्थता अपनाई जा सकती है। खासकर जब आपराधिक मामलों में मुकदमे दर्ज होते हैं, तो फिर सुलह की संभावना बहुत कम रह जाती है।

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झूठे आरोप और एआई का दुरुपयोग
इस दौरान कोर्ट ने चिंता जताई कि आजकल वैवाहिक विवादों में एक-दूसरे को सबक सिखाने की तैयारी शुरू हो जाती है। सबूत इकट्ठा किए जाते हैं और कई बार झूठे या बनावटी सबूत भी पेश किए जाते हैं, जो अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में और आसान हो गया है। इससे समाज पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

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मध्यस्थता केंद्रों की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश के हर जिले में मध्यस्थता केंद्र हैं, जहां मुकदमा दर्ज होने से पहले भी सुलह कराई जा सकती है। कई मामलों में इसका अच्छा परिणाम सामने आया है और कुछ दंपति विवाद सुलझने के बाद फिर साथ रहने लगे हैं।

बच्चे बन जाते हैं विवाद का कारण
कोर्ट ने माना कि बच्चे होने के बाद विवाद और जटिल हो जाता है। कई बार बच्चे ही पति-पत्नी के बीच झगड़े का कारण बन जाते हैं। ऐसे में पक्षकारों, उनके वकीलों और परिवारजनों की जिम्मेदारी है कि वे पहले काउंसलिंग और मध्यस्थता का रास्ता अपनाएं।



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पुलिस और अदालतों को भी सलाह
कोर्ट ने कहा कि अगर घरेलू विवाद से जुड़े मामूली मामलों में भी केस दर्ज होता है, तो सबसे पहले मध्यस्थता की कोशिश होनी चाहिए, न कि तुरंत जवाब-दर-जवाब और आरोपों की प्रक्रिया शुरू की जाए। यहां तक कि पुलिस के पास शिकायत जाने पर भी पहले सुलह का प्रयास होना चाहिए।

बढ़ते वैवाहिक मुकदमों पर चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बदलते समय में वैवाहिक मुकदमे बहुत तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि कानूनी लड़ाई शुरू करने से पहले विवाद सुलझाने की ईमानदार कोशिश करें। यह फैसला अदालतों पर बढ़ते बोझ को कम करने और पारिवारिक विवादों को मानवीय तरीके से सुलझाने की दिशा में एक अहम संदेश माना जा रहा है।

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