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सुप्रीम कोर्ट ने 11.8 लाख वनवासियों और आदिवासियों को बेदखल करने के आदेश पर लगाई रोक
Thu, 28 Feb 2019 01:29 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 28 Feb 2019 01:29 PM IST
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supreme court
- फोटो : PTI
उच्चतम न्यायालय ने 21 राज्यों को 11.8 लाख वनवासियों और आदिवासियों को बेदखल करने संबंधी अपने 13 फरवरी के निर्देश पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी। जंगल की जमीन पर इन वनवासियों के दावे अधिकारियों ने अस्वीकार कर दिए थे।
न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने इन राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे वनवासियों के दावे अस्वीकार करने के लिये अपनायी गयी प्रक्रिया के विवरण के साथ हलफनामे दाखिल करें।
पीठ इस मामले में अब 30 जुलाई को आगे विचार करेगी।
शीर्ष अदालत बुधवार को 13 फरवरी के अपने आदेश पर रोक लगाने के केंद्र सरकार के अनुरोध पर विचार के लिये सहमत हो गयी थी। न्यायालय ने इस आदेश के तहत 21 राज्यों से कहा था कि करीब 11.8 लाख उन वनवासियों को बेदखल किया जाये जिनके दावे अस्वीकार कर दिए गए हैं।
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पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद कहा, ‘‘हम अपने 13 फरवरी के आदेश पर रोक लगा रहे हैं।’’ पीठ ने कहा कि वनवासियों को बेदखल करने के लिये उठाये गये तमाम कदमों के विवरण के साथ राज्यों के मुख्य सचिवों को हलफनामे दाखिल करने होंगे।
केंद्र ने 13 फरवरी के आदेश में सुधार का अनुरोध करते हुये न्यायालय से कहा कि अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) कानून, 2016 लाभ देने संबंधी कानून है और बेहद गरीब और निरक्षर लोगों, जिन्हें अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है, की मदद के लिये इसमें उदारता अपनाई जानी चाहिए।
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न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने इन राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे वनवासियों के दावे अस्वीकार करने के लिये अपनायी गयी प्रक्रिया के विवरण के साथ हलफनामे दाखिल करें।
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पीठ इस मामले में अब 30 जुलाई को आगे विचार करेगी।
शीर्ष अदालत बुधवार को 13 फरवरी के अपने आदेश पर रोक लगाने के केंद्र सरकार के अनुरोध पर विचार के लिये सहमत हो गयी थी। न्यायालय ने इस आदेश के तहत 21 राज्यों से कहा था कि करीब 11.8 लाख उन वनवासियों को बेदखल किया जाये जिनके दावे अस्वीकार कर दिए गए हैं।
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पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद कहा, ‘‘हम अपने 13 फरवरी के आदेश पर रोक लगा रहे हैं।’’ पीठ ने कहा कि वनवासियों को बेदखल करने के लिये उठाये गये तमाम कदमों के विवरण के साथ राज्यों के मुख्य सचिवों को हलफनामे दाखिल करने होंगे।
केंद्र ने 13 फरवरी के आदेश में सुधार का अनुरोध करते हुये न्यायालय से कहा कि अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) कानून, 2016 लाभ देने संबंधी कानून है और बेहद गरीब और निरक्षर लोगों, जिन्हें अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं है, की मदद के लिये इसमें उदारता अपनाई जानी चाहिए।