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SC: 'समाज के लिए गंभीर खतरा है भ्रष्टाचार, सख्ती से निपटना जरूरी', IRS अधिकारी की अग्रिम जमानत खारिज

Tue, 18 Apr 2023 02:30 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Tue, 18 Apr 2023 02:30 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कहा जा सकता है कि भ्रष्टाचार ऐसा पेड़ है जिसकी शाखाएं बेहिसाब लंबी हैं और हर ओर फैली हैं। यहां से टपकने वाली बूंदें अधिकारियों के कुर्सियों और स्टूलों को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे में अतिरिक्त सावधानी रखने की जरूरत है।

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Supreme Court sets aside pre-arrest bail of IRS officer says corruption poses serious threat to society
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार समाज के लिए गंभीर खतरा है और इससे कड़ाई से निपटने की जरूरत है। यह न सिर्फ सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाता है बल्कि सुशासन को भी रौंद देता है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पीठ ने इन सख्त टिप्पणियों के साथ भ्रष्टाचार के मामले में भारतीय राजस्व सेवा के एक अधिकारी को गुजरात हाईकोर्ट से 19 दिसंबर 2022 में मिली अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया। आईआरएस अधिकारी संतोष करनानी को हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

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पीठ ने कहा, इस मामले में हाईकोर्ट को अपराध की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखना चाहिए था। इसके कारण आम लोगों को सामाजिक कल्याण योजनाओं के लाभों से वंचित होना पड़ा और वही सबसे अधिक प्रभावित हुए। पीठ ने कहा, कहा जा सकता है कि भ्रष्टाचार ऐसा पेड़ है जिसकी शाखाएं बेहिसाब लंबी हैं और हर ओर फैली हैं। यहां से टपकने वाली बूंदें अधिकारियों के कुर्सियों और स्टूलों को भी प्रभावित करती हैं। ऐसे में अतिरिक्त सावधानी रखने की जरूरत है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत खारिज करने के लिए वह लगाए गए आरोप के आधार पर प्रथमदृष्टया अपना विचार व्यक्त कर रही है। यदि प्रतिवादी नंबर 1(करनानी) नियमित जमानत के लिए उचित कोर्ट में जाते हैं तो उनके अनुरोध पर कानून के अनुसार और केस के मेरिट के आधार पर फैसला लिया जाएगा और इस अदालत की टिप्पणी का उसपर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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क्या था मामला
गुजरात की भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) ने चार अक्तूबर, 2022 को मिली एक शिकायत के आधार पर अहमदाबाद में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसपर कार्रवाई करते हुए स्थानीय पुलिस ने जाल बिछाया और उसी दिन 30 लाख रुपये की रिश्वत की रकम जब्त की। इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई जिसने 12 अक्तूबर को फिर से एफआईआर दर्ज किया। इस मामले में शिकायत सफल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लि. ने दर्ज कराई थी। आरोप है कि आयकर विभाग के एडिशनल कमिश्नर करनानी ने कंपनी से 30 लाख की रिश्वत मांगी थी। एसीबी ने करनानी को पूछताछ के लिए बुलाया लेकिन वह नहीं आए और हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली।
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प्रमुख वन संरक्षक भरतरी की बहाली पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
उधर, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी राजीव भरतरी को प्रमुख वन संरक्षक (एचओएफएफ) के पद पर बहाल करने के नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने पूर्व प्रमुख वन संरक्षक विनोद कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह रोक लगाई। शीर्ष अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए उनसे चार हफ्ते में जवाब भी देने को कहा है।

हाईकोर्ट ने तीन अप्रैल के अपने फैसले में 24 घंटे के भीतर राज्य सरकार को भरतरी को बहाल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद चार अप्रैल को उन्होंने पद संभाल लिया था।


कॉर्बेट के बफर जोन में पखरो और मोरघट्टी वन प्रभाग में व्यापक पैमाने पर पेड़ों की कटाई और निर्माण के आरोप के बाद नवंबर 2021 में उन्हें प्रमुख वन संरक्षक के पद से हटाकर उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया था। भरतरी ने अपने तबादले को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण और हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों ने भरतरी के पक्ष में फैसला सुनाया था।

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