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Supreme Court: आश्रयगृह बंद करने पर अदालत गंभीर; कहा- यह बेघर लोगों के अधिकार की बात, दो हफ्ते में रिपोर्ट दें

Sat, 30 Aug 2025 06:56 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 30 Aug 2025 06:56 AM IST
सार

याचिकाकर्ता ईआर कुमार की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि आनंद विहार और सराय काले खां क्षेत्र के आठ आश्रयगृह बंद किए जा रहे हैं, जिनमें वर्तमान में 1,000 से अधिक लोग रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये आश्रयगृह बंद हुए तो सैकड़ों लोग सड़कों पर आ जाएंगे।
 

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Supreme Court serious about closure of shelters for homeless people in Delhi due to DMRC construction work
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली में बेघर लोगों के आश्रयगृहों को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के निर्माण कार्य के कारण बंद करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) को निर्देश दिया कि वह इन आश्रयगृहों का निरीक्षण कर दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट सौंपे। यह बेघर लोगों के अधिकार का मुद्दा है। 

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याचिकाकर्ता ईआर कुमार की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि आनंद विहार और सराय काले खां क्षेत्र के आठ आश्रयगृह बंद किए जा रहे हैं, जिनमें वर्तमान में 1,000 से अधिक लोग रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ये आश्रयगृह बंद हुए तो सैकड़ों लोग सड़कों पर आ जाएंगे। भूषण ने यह भी बताया कि पहले ही छह आश्रयगृह बंद हो चुके हैं, जिससे बेघर लोगों के लिए स्थिति और खराब हो गई है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वैकल्पिक स्थलों पर आश्रय की पर्याप्त क्षमता और सुविधाएं उपलब्ध हों। अदालत ने नालसा को तीन प्रमुख बिंदुओं पर रिपोर्ट देने का आदेश दिया। इसमें मौजूदा आश्रयगृहों में रहने वाले लोगों की सही संख्या, वैकल्पिक स्थलों की क्षमता, उन स्थलों पर उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति बताने को कहा गया है।
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रात को करें निरीक्षण...रिपोर्ट के बाद तय होगा अगला कदम
पीठ ने स्पष्ट किया कि नालसा का निरीक्षण रात 8 बजे के बाद होना चाहिए, क्योंकि उसी समय सबसे अधिक लोग आश्रयगृहों में आते हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हम अपने अधिकारी पर क्यों शक करें? हमने उन्हें स्वयं जाकर स्थिति देखने का निर्देश दिया है। फिलहाल अदालत केवल यह तय कर रही है कि स्थानांतरण उचित है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नालसा की रिपोर्ट आने के बाद ही अगला कदम तय किया जाएगा। यह मामला सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि देशभर में शहरी गरीबों और बेघर लोगों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

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