अमित शाह: आपदा प्रबंधन, एसडीआरएफ में चार गुना तो एनडीआरएफ में तीन गुना वृद्धि; गृह मंत्री ने और क्या कहा?
भारत में आपदा प्रबंधन के लिए राज्य आपदा मोचन निधि में करीब चार गुना और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। पिछले 11 वर्षों में करीब ढाई लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सरकार अब राहत के बजाय जोखिम कम करने और शून्य हताहत पर जोर दे रही है। लेकिन क्या नई व्यवस्था बढ़ती आपदाओं से निपटने के लिए पर्याप्त होगी और गांवों-शहरों को आपदा रोधी कैसे बनाया जाएगा?
विस्तार
देश में आपदा प्रबंधन को लेकर सरकार ने पिछले करीब 12 वर्षों में अपनी नीति और काम करने के तरीके में बड़े बदलाव किए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान यानी एनआईडीएम के संस्थान निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य आपदा मोचन निधि में करीब चार गुना और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष में करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। पिछले 11 वर्षों में इस क्षेत्र में करीब ढाई लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य अब राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय आपदा से पहले तैयारी और शून्य हताहत पर है।
आपदा प्रबंधन के लिए सरकार ने कितनी बड़ी राशि बढ़ाई है?
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आपदा निधि के वितरण को वैज्ञानिक प्रक्रिया के आधार पर संचालित करने का निर्णय लिया है। राज्य आपदा मोचन निधि में लगभग चार गुना और राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। पिछले 11 वर्षों में करीब ढाई लाख करोड़ रुपये इस क्षेत्र में खर्च किए गए हैं। इसके अलावा 16वें वित्त आयोग ने इस अवधि के लिए दो लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में आपदा प्रबंधन के नजरिये और काम करने के तरीके में आमूल-चूल बदलाव आया है।
राहत और पुनर्वास से आगे अब क्या है सरकार की रणनीति?
शाह ने कहा कि पहले आपदा को मुख्य रूप से राहत और पुनर्वास के नजरिये से देखा जाता था। अब जोखिम कम करने, समय पर चेतावनी देने और शून्य हताहत के लक्ष्य के साथ काम किया जा रहा है। कई आपदाओं का सरकार ने शून्य हताहत के साथ सफलतापूर्वक सामना किया है। 20 वर्षों के बाद आपदा प्रबंधन अधिनियम में संशोधन किया गया है। शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की परिकल्पना के साथ उसकी स्थापना भी की गई है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर डिजिटल आपदा डेटाबेस बनाने की शुरुआत हुई है। राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति को कानूनी दर्जा भी दिया गया है।
एनआईडीएम की भूमिका अब क्यों बढ़ने वाली है?
शाह ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले समय में आपदाओं की संख्या बढ़ सकती है। विज्ञान के नए इस्तेमाल और नए क्षेत्रों के विस्तार से नई तरह की आपदाएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में एनआईडीएम और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भूमिका और महत्वपूर्ण होगी। दोनों संस्थानों के बीच नीति बनाने से लेकर प्रशिक्षण और उसे जमीन पर लागू करने तक जिम्मेदारियां बांटी गई हैं। एनआईडीएम को दुनिया में हो रहे शोध का अध्ययन कर उसके निष्कर्षों को भारत की स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू करने पर भी जोर दिया गया है।
गांवों और शहरों को आपदा से सुरक्षित बनाने के लिए क्या करना होगा?
गृह मंत्री ने कहा कि आपदा रोकने का सबसे प्रभावी उपाय पर्यावरण संरक्षण है। जोखिम कम करने, लचीलापन बढ़ाने और व्यापक राष्ट्रीय सोच के साथ भारत दुनिया के सामने एक आदर्श मॉडल बन सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आपदा रोधी गांव और आपदा रोधी शहर बनाना है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है, लेकिन प्राथमिकता देश के पांच लाख गांव होने चाहिए। कृषि विभाग को पाकिस्तान की तरफ से आने वाले टिड्डे दलों के हमलों से बचाव की स्थायी तैयारी करने और विदेशों में अपनाए जा रहे बेहतर उपायों को देश में लागू करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
एनआईडीएम को मजबूत करने के लिए शाह ने क्या निर्देश दिए?
अमित शाह ने सभी संबंधित विभागों में एक सेल बनाने और विभागीय प्रमुखों को कम से कम तीन महीने में एक बार इसकी समीक्षा बैठक करने का निर्देश दिया। एनआईडीएम और एनडीएमए को मिलकर हर आपदा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने हैं, जिनमें बताया जाए कि क्या करना है, क्या नहीं करना है और कैसे करना है। एनआईडीएम प्रशिक्षण देगा, जबकि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल और अन्य एजेंसियां इन्हें जमीन पर लागू करेंगी। एनआईडीएम को अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षण, नीति समर्थन और विभागीय सहयोग का राष्ट्रीय केंद्र बनाने पर जोर दिया गया है। संस्थान को मजबूत करने के लिए हाल ही में चार एकड़ जमीन भी आवंटित की गई है। शाह ने एनआईडीएम की हर साल कम से कम एक शीर्ष स्तरीय बैठक अनिवार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान को क्षमता, क्षमता को तैयारी और तैयारी को परिणाम में बदलकर शून्य हताहत का लक्ष्य हासिल करना होगा।