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आज की अहम खबरें: हाईकोर्ट का निर्देश- मूर्ति तस्कर सुभाष कपूर को जर्मनी भेजने की प्रक्रिया शुरू करे केंद्र
Thu, 10 Sep 2026 01:59 AM IST
नितिन गौतम
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 10 Sep 2026 01:59 AM IST
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न्यूज अपडेट
- फोटो : Amar Ujala
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने केंद्र सरकार को प्राचीन मूर्तियों के तस्कर सुभाष चंद्र कपूर को हिरासत में लेकर उन्हें जर्मनी भेजने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति ए.डी. जगदीश चंदिरा और न्यायमूर्ति एन. गुणशेखरन की खंडपीठ ने कहा कि कपूर लंबे समय से जेल में बंद हैं और यह कानून के खिलाफ है। अमेरिकी नागरिक कपूर को साल 2012 में जर्मनी से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। उनका प्रत्यर्पण उदयारपालयम पुलिस द्वारा दर्ज मूर्ति चोरी और तस्करी के एक विशेष मामले में किया गया था।
कुंभकोणम की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 2022 में कपूर को दोषी ठहराया था। इसके बाद वह प्रत्यर्पित किए गए मामले में सुनाई गई 10 साल की कारावास की सजा पूरी कर चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि कपूर का प्रत्यर्पण भारत और जर्मनी के बीच प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 19 में निहित 'रूल ऑफ स्पेशियलिटी' के तहत सख्ती से नियंत्रित था। इस अंतरराष्ट्रीय प्रावधान के तहत प्रत्यर्पित व्यक्ति को प्रत्यर्पण से पहले किए गए अपराधों के लिए प्रत्यर्पण करने वाले देश की स्पष्ट सहमति के बिना हिरासत में नहीं रखा जा सकता, मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर किसी अन्य तरह की पाबंदी नहीं लगाई जा सकती।
तमिलनाडु सरकार कपूर के खिलाफ लंबित कई अन्य मामलों में भी मुकदमा चलाना चाहती थी। हालांकि, जर्मनी के विदेश कार्यालय ने उनके खिलाफ अभियोजन का दायरा बढ़ाने के प्रस्ताव पर स्पष्ट रूप से सहमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने केंद्र के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर तिरुचिरापल्ली सेंट्रल जेल से कपूर को अपनी हिरासत में लें और उन्हें जर्मनी वापस भेजने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करें।
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कुंभकोणम की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 2022 में कपूर को दोषी ठहराया था। इसके बाद वह प्रत्यर्पित किए गए मामले में सुनाई गई 10 साल की कारावास की सजा पूरी कर चुके हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि कपूर का प्रत्यर्पण भारत और जर्मनी के बीच प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 19 में निहित 'रूल ऑफ स्पेशियलिटी' के तहत सख्ती से नियंत्रित था। इस अंतरराष्ट्रीय प्रावधान के तहत प्रत्यर्पित व्यक्ति को प्रत्यर्पण से पहले किए गए अपराधों के लिए प्रत्यर्पण करने वाले देश की स्पष्ट सहमति के बिना हिरासत में नहीं रखा जा सकता, मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर किसी अन्य तरह की पाबंदी नहीं लगाई जा सकती।
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तमिलनाडु सरकार कपूर के खिलाफ लंबित कई अन्य मामलों में भी मुकदमा चलाना चाहती थी। हालांकि, जर्मनी के विदेश कार्यालय ने उनके खिलाफ अभियोजन का दायरा बढ़ाने के प्रस्ताव पर स्पष्ट रूप से सहमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने केंद्र के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर तिरुचिरापल्ली सेंट्रल जेल से कपूर को अपनी हिरासत में लें और उन्हें जर्मनी वापस भेजने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करें।
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