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महिला पत्रकारों से मारपीट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: दिल्ली पुलिस के बड़े अधिकारी को किया तलब, क्या है पूरा मामला?

Tue, 13 Oct 2026 12:36 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 13 Oct 2026 12:36 PM IST
सार

दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों से कथित मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को पेश होकर जवाब देने को कहा है। एनडब्ल्यूएमआई ने पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने की मांग की है। एक अन्य याचिका में पुलिस पर सुप्रीम कोर्ट के 10 अक्तूबर के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। 

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Supreme Court Seeks Delhi Police Response Over Alleged Assault on Women Journalists
महिला पत्रकारों से बदसलूकी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली में हाल के विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों से कथित मारपीट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और आरोपों पर सफाई देने को कहा। अदालत ने मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार को करने की बात कही है।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा? 
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया (एनडब्ल्यूएमआई) की याचिका का जिक्र किया। इसमें विरोध प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों, खासकर महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करने की मांग की गई है। इस पर सीजेआई ने कहा, 'हम चाहेंगे कि कोई वरिष्ठ अधिकारी यहां मौजूद रहे और मामले को समझाए।' उन्होंने कहा कि पुलिस को इन आरोपों पर जवाब देना होगा। इंदिरा जयसिंह ने अदालत को बताया कि इस मामले में सॉलिसिटर जनरल को पहले ही सूचना दी जा चुकी है।
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पुलिस पर किस आदेश के उल्लंघन का आरोप?
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में फ्रीडम स्पीच कलेक्टिव की ओर से दायर अवमानना याचिका का भी जिक्र किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने पत्रकारों से मारपीट कर सुप्रीम कोर्ट के 10 अक्तूबर के आदेश का उल्लंघन किया। उस आदेश में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों को परेशान नहीं करने की बात कही गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह ने भी इसी तरह की एक अन्य याचिका के बारे में बताया। इन याचिकाओं के जरिए प्रदर्शन स्थलों पर पत्रकारों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया है।
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केंद्र सरकार से क्या चाहती है याचिकाकर्ता संस्था?
एनडब्ल्यूएमआई ने केंद्र सरकार से निर्देश देने की मांग की है कि ईमानदारी से खबर जुटाने या रिपोर्टिंग करने वाली महिला पत्रकारों के साथ केवल किसी प्रदर्शन, सार्वजनिक सभा, भीड़ को नियंत्रित करने की कार्रवाई या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक आयोजन के दौरान मौजूद रहने के कारण दुर्व्यवहार न हो। याचिका में शारीरिक रूप से परेशान करने, डराने-धमकाने, मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और जबरन हटाने जैसी कार्रवाइयों से सुरक्षा मांगी गई है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा।
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