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सुप्रीम कोर्ट : पारदर्शिता के लिए लाई गई निविदा नीति की उलट है जमीनी हकीकत
Sat, 18 Sep 2021 01:49 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sat, 18 Sep 2021 01:49 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पारदर्शिता के लिए लाई गई निविदा नीति की जमीनी हकीकत वास्तव में पूरी तरह से विपरीत है। निविदा प्रणाली को आर्थिक गतिविधियों में सरकार की भूमिका बढ़ाने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कोई भी निविदा विवाद रहित नहीं होती है।
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Supreme Court
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पारदर्शिता के लिए लाई गई निविदा नीति की जमीनी हकीकत वास्तव में बिल्कुल उलट है और यह इसके उद्देश्यों को परास्त कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निविदा प्रणाली को आर्थिक गतिविधियों में सरकार की भूमिका बढ़ाने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कोई भी निविदा विवाद रहित नहीं होती है। शीर्ष अदालत ने इस तरह की ‘नासमझ’ याचिकाएं दायर करने की प्रवृत्ति से नाराज होकर ऐसे मुकदमों में लिप्त वाणिज्यिक संस्थाओं पर जुर्माना लगाने का फैसला किया है।
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जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि निविदा क्षेत्राधिकार वाणिज्यिक मामलों के परीक्षण के लिए बनाया गया था। कंपनियां लगातार निविदाओं के अवार्ड को चुनौती देती हैं। कोर्ट ने कहा कि हमारा मानना है कि जो पक्ष इस मुकदमेबाजी में सफल हो, उसे आर्थिक लाभ मिलना चाहिए और इसका भुगतान हारने वाले पक्ष द्वारा किया जाना चाहिए।
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इसके साथ ही पीठ ने तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी एक निविदा की शर्तों को लेकर कॉरपोरेट संस्थाओं के बीच उठे वाणिज्यिक विवाद का निपटारा करते हुए कहा कि ऐसे संविदात्मक मामलों की न्यायिक समीक्षा की अपनी सीमाएं हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूफ्लेक्स लिमिटेड को करीब 23.25 लाख रुपए का अवार्ड दिया। साथ ही तमिलनाडु सरकार को 7.58 लाख रुपए बतौर मुआवजा देने का निर्देश दिया। इस मुआवजे का भुगतान मुकदमे का बचाव करने वाली दो कंपनियों को करने का निर्देश दिया गया है।
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