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'सांसदों-विधायकों को अयोग्य घोषित करने की स्पीकर की शक्तियों पर विचार करे संसद'
Tue, 21 Jan 2020 01:31 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Tue, 21 Jan 2020 01:31 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : social media
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उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को संसद से कहा कि वह जनप्रतिनिधियों की अयोग्यता की मांग करने वाली याचिकाओं पर फैसला लेने संबंधी अध्यक्ष की शक्तियों के बारे में पुन: विचार करे क्योंकि अध्यक्ष स्वयं किसी राजनीतिक दल से आते हैं।
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दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष से कहा कि वह मणिपुर के वन मंत्री एवं भाजपा विधायक टी. श्यामकुमार को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली कांग्रेस नेता की याचिका पर चार हफ्ते में फैसला लें। इसी दौरान अदालत ने अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली याचिकाओं को देखने के लिए एक स्वतंत्र प्रणाली बनाने का सुझाव दिया।
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न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कांग्रेस विधायक फाजुर रहीम और के. मेघचंद्र से कहा कि यदि विधानसभा अध्यक्ष भाजपा के मंत्री की अयोग्यता की मांग करने वाली याचिका पर चार हफ्ते के भीतर फैसला नहीं ले पाते हैं तो वह फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
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भाजपा के मंत्री ने विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीता था लेकिन बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए और मंत्री बन गए। न्यायालय ने कहा कि संसद को इस पर पुन: विचार करना चाहिए कि अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर फैसला अध्यक्ष द्वारा लिया जाना चाहिए अथवा नहीं।
न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियों पर पुन: विचार का सुझाव देते हुए कहा कि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अध्यक्ष स्वयं किसी राजनीतिक दल से आते हैं।