फिर खुलेंगे 84 सिख दंगों के 186 मामले, सुप्रीम कोर्ट ने SIT को सौंपा जिम्मा
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सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से संबंधित 186 मामलों की फिर से जांच करने केआदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) इन सभी मामलों की दोबारा जांच करेगा। इनमें वे सभी मामले हैं जिन्हें आईपीएस अधिकारी प्रमोद अस्थाना की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने जांच केबाद बंद करने का निर्णय लिया था।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को 186 मामलों की नई एसआईटी से जांच करने का आदेश देते हुए केंद्र सरकार को इसके सदस्यों के नाम सुझाने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि है कि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता वाली इस तीन सदस्यीय एसआईटी में एक कार्यरत और एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी होंगे। पीठ ने साफ किया कि कम से कम डीआईजी रैंक से सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी को ही इसमें शामिल किया जाना चाहिए। गुरुवार को एसआईटी के अध्यक्ष और सदस्यों केनाम तय किए जाएंगे।
निगरानी समिति की रिपोर्ट पर लिया फैसला
मालूम हो कि पिछले साल 16 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दो पूर्व जजों न्यायमूर्ति जेएस पांचाल और न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन की एक निगरानी समिति का गठन करने का निर्णय लिया था। इस समिति को 241 मामलों में पूर्व एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट की जांच-पड़ताल कर यह बताने केलिए कहा गया था कि इन सभी मामलों में दायर क्लोजर रिपोर्ट का निर्णय सही है या नहीं?
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सिख दंगों से संबंधित 241 मामलों में से 186 मामलों को बिना जांच केबंद कर दिया गया। पीठ ने बुधवार को निगरानी समिति की रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद नई एसआईटी के गठन का निर्णय लिया है।
मोदी सरकार ने भी बनाई थी एसआईटी
इससे पहले केंद्र सरकार ने 12 फरवरी, 2015 को आईपीएस अधिकारी प्रमोद अस्थाना की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कपूर और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कुमार ज्ञानेश सदस्य थे। एसआईटी को 293 मामलों की पुन:जांच करने के लिए कहा गया था।
एसआईटी ने इनमें से 241 मामलों को यह कहते हुए बंद कर दिया कि इन मामलों में उपलब्ध साक्ष्य अपर्याप्त हैं। एसआईटी ने कहा था कि आठ मामलों में चार्जशीट दायर की जा चुकी है और पांच मामलों की जांच एसआईटी द्वारा की जा रही है।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे दंगे
31 अक्तूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़के थे। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में हुए दंगों में 3,325 लोग मारे गए थे। अकेले दिल्ली में 2,733 लोगों की हत्या हुई थी।