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SC: फर्जीवाड़ा कर सुप्रीम कोर्ट से कराया फैसला! अदालत ने आदेश वापस लिया, जांच के आदेश

Wed, 14 May 2025 02:58 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Wed, 14 May 2025 02:58 PM IST
सार

फर्जी याचिकाकर्ता ने धोखाधड़ी कर अदालत का अपने पक्ष में फैसला लिया। फैसला आने के कुछ समय बाद मामले से जुड़े असली याचिकाकर्ता हरीश जायसवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिससे पूरे मामले का भंडाफोड़ हुआ। 

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Supreme court says ghost respondent took favourable order via malafide recalls ruling directs probe
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने जमीन विवाद के मामले में दिया अपना आदेश वापस ले लिया है। दरअसल फर्जीवाड़ा कर सुप्रीम कोर्ट से अपने फायदे वाला फैसला कराया गया। अब फर्जीवाड़े के खुलासे पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है और जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री विभाग से मामले की जांच कर तीन हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। 
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क्या है मामला
13 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में मुजफ्फरपुर ट्रायल कोर्ट और पटना उच्च न्यायालय का फैसला पलट दिया था। अब पता चला है कि फर्जी याचिकाकर्ता ने दोनों पक्षों के बीच कथित समझौता होने की बात कही। जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। हालांकि अब पता चला है कि दोनों पक्षों में कोई समझौता नहीं हुआ था और फर्जी याचिकाकर्ता ने धोखाधड़ी कर अदालत का अपने पक्ष में फैसला लिया। फैसला आने के कुछ समय बाद मामले से जुड़े असली याचिकाकर्ता हरीश जायसवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिससे पूरे मामले का भंडाफोड़ हुआ। 
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हरीश जायसवाल के दामाद ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर फैसला देखा तो उन्हें इस फर्जीवाड़े का पता चला। जिसके बाद जायसवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि धोखाधड़ी कर सुप्रीम कोर्ट का अपने पक्ष में आदेश लिया गया और उनका दूसरे पक्ष के साथ कोई समझौता नहीं हुआ है। इतना ही नहीं फर्जी याचिकाकर्ता की तरफ से चार वकील अदालत में पेश हुए, लेकिन ताजा सुनवाई में पता चला कि जिस वकील को याचिकाकर्ता की तरफ से पेश बताया गया था, वह 80 साल के हैं और लंबे समय से वकालत नहीं कर रहे हैं। इस पूरे खुलासे पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई और न्यायपालिका के लिए इसे गंभीर मसला बताया और जांच के आदेश दिए।

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