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पश्चिम बंगाल में काम नहीं कर रहा लोकतंत्र: सुप्रीम कोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 04 Jul 2018 09:03 AM IST
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Clat 2018, Supreme Court
हाल ही में पश्चिम बंगाल में हुए पंचायत चुनाव में 34 फीसदी सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताई है। जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आकड़ों से यही प्रतीत होता है कि संविधान में जमीनी स्तर का लोकतंत्र वहां काम नहीं कर रहा है।
जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ वाली इस पीठ ने कहा कि यह परेशान करने वाली बात है कि 48650 ग्राम पंचायत सीटों में से 16 हजार सीटों पर एक के सिवा कोई दूसरा प्रत्याशी मुकाबले में ही नहीं उतरा। पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग को बुधवार तक वास्तविक सांख्यकीय आकड़े पेश करने के निर्देश दिए हैं।
इस साल मई में हुए ग्राम पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समिति के हिंसायुक्त चुनाव में 58692 सीटों में 20159 सीटों पर मुकाबला ही नहीं हुआ। इनमें संवेदनशील माने जा रहे बीरभूम, बांकुरा और मुर्शीदाबाद जैसे जिले भी शामिल हैं। चुनाव में ग्राम पंचायत की 48650 सीटों के अलावा जिला परिषद की 825 और पंचायत समिति सदस्य की 9217 सीटें थीं।
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जस्टिस एएम खानविल्कर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ वाली इस पीठ ने कहा कि यह परेशान करने वाली बात है कि 48650 ग्राम पंचायत सीटों में से 16 हजार सीटों पर एक के सिवा कोई दूसरा प्रत्याशी मुकाबले में ही नहीं उतरा। पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग को बुधवार तक वास्तविक सांख्यकीय आकड़े पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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इस साल मई में हुए ग्राम पंचायत, जिला परिषद और पंचायत समिति के हिंसायुक्त चुनाव में 58692 सीटों में 20159 सीटों पर मुकाबला ही नहीं हुआ। इनमें संवेदनशील माने जा रहे बीरभूम, बांकुरा और मुर्शीदाबाद जैसे जिले भी शामिल हैं। चुनाव में ग्राम पंचायत की 48650 सीटों के अलावा जिला परिषद की 825 और पंचायत समिति सदस्य की 9217 सीटें थीं।
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सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग के उस फैसले पर भी सवाल उठाए
सांकेतिक तस्वीर
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग के उस फैसले पर भी सवाल उठाए जिसमें पहले उसने नामांकन दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाई और एक दिन में ही उस आदेश को वापस ले लिया। सुप्रीम कोर्ट में भाजपा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने कहा कि चुनाव में हिंसक घटनाएं हुई और लोगों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया गया। उन्होंने जिलावार उन सीटों का ब्योरा भी पेश किया जहां किसी ने चुनाव में भाग नहीं लिया।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने कोलकाता हाईकोर्ट के उस आदेश पर स्टे दिया था जिसमें नामांकन को ईमेल से स्वीकार करने के साथ-साथ निर्विरोध चुने जाने वाले प्रत्याशियों के नाम गजट में घोषित नहीं करने का आदेश राज्य निर्वाचन आयोग को दिया गया है।
सीपीआई (एम) और भाजपा की ओर से पेश वकीलों ने आरोप लगाया था कि उनके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया गया जिससे सत्तासीन पार्टी त्रिणमूल कांग्रेस के 34 फीसदी प्रत्याशी बिना चुनाव लड़े ही जीत गए। राज्य निर्वाचन आयोग की पिटीशन में सीपीआई (एम) को राज्य सरकार, सत्तासीन पार्टी त्रिणमूल कांग्रेस, राज्य पंचायत सचिव और अन्य के खिलाफ याची पेश किया गया है। बाद में भाजपा को भी मुकदमे में बतौर पार्टी शामिल किया गया।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने कोलकाता हाईकोर्ट के उस आदेश पर स्टे दिया था जिसमें नामांकन को ईमेल से स्वीकार करने के साथ-साथ निर्विरोध चुने जाने वाले प्रत्याशियों के नाम गजट में घोषित नहीं करने का आदेश राज्य निर्वाचन आयोग को दिया गया है।
सीपीआई (एम) और भाजपा की ओर से पेश वकीलों ने आरोप लगाया था कि उनके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिया गया जिससे सत्तासीन पार्टी त्रिणमूल कांग्रेस के 34 फीसदी प्रत्याशी बिना चुनाव लड़े ही जीत गए। राज्य निर्वाचन आयोग की पिटीशन में सीपीआई (एम) को राज्य सरकार, सत्तासीन पार्टी त्रिणमूल कांग्रेस, राज्य पंचायत सचिव और अन्य के खिलाफ याची पेश किया गया है। बाद में भाजपा को भी मुकदमे में बतौर पार्टी शामिल किया गया।