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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court says Can not dismiss close relatives of deceased for testimony

सुप्रीम कोर्ट: मृतक के करीबी रिश्तेदारों को गवाही के लिए खारिज नहीं कर सकते

Sat, 04 Sep 2021 02:30 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 04 Sep 2021 02:30 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने एक मां और बेटे को आईपीसी की धारा 306 (खुदकुशी के लिए उकसाने) और 498-ए (पति या पति के रिश्तेदार को महिला पर क्रूरता) के तहत दो साल कैद की सजा सुनाई थी।

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Supreme Court says Can not dismiss close relatives of deceased for testimony
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मृतक से जुड़े करीबी रिश्तेदारों या इच्छुक गवाहों को किसी मामले में गवाही के लिए खारिज नहीं किया जाना चाहिए। कानून भी ऐसे गवाहों को अयोग्य नहीं ठहराता।

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जस्टिस एसए नजीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की।

शीर्ष अदालत ने कहा कि विवाहित महिला पर ज्यादातर क्रूरता की घटना उसी घर की चारदीवारी में होती है, जहां पर किसी निष्पक्ष गवाह के मिलने की संभावना न के बराबर होती है।
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पीठ ने कहा, यहां तक कि यदि कोई स्वतंत्र गवाह मिल भी जाए और वह गवाही देने को तैयार भी हो, तो बड़ा सवाल यह रहता है कि पीड़ित से न जुड़े होने के कारण वह कई वजहों से गवाह नहीं बनना चाहता।
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पीठ ने कहा कि यह कोई अस्वाभाविक नहीं है कि घरेलू हिंसा की शिकार अपनी वेदना अपने माता-पिता, भाई-बहन या अपने करीबी रिश्तेदार के साथ साझा करती हैं।

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