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सुप्रीम कोर्ट: जजों की नियुक्ति तबादले में नहीं होने देंगे तीसरे पक्ष का दखल, कहा- केंद्र की भूमिका बहुत कम

Sat, 04 Feb 2023 06:18 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 04 Feb 2023 06:18 AM IST
सार

जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका ने कहा कि हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्ति के लिए कॉलेजियम ने एक जज के नाम की सिफारिश की थी। अब तक फैसला नहीं हुआ। संबंधित जज 19 दिनों में पद छोड़ने जा रहे हैं। क्या आप चाहते हैं कि वह चीफ जस्टिस बने बिना ही सेवानिवृत्त हो जाएं?

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Supreme Court said third party will not allow transfer and appointment of judges, role of the Center very less
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने जजों की नियुक्ति व तबादलों में हो रही देर पर नाराजगी जताते हुए केंद्र से दो टूक कहा कि इस प्रक्रिया में किसी तीसरे पक्ष का दखल नहीं होने देंगे। शीर्ष अदालत ने कहा, जजों के एक हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट में तबादले में देरी का सवाल ही नहीं उठता जबकि सरकार की इसमें बहुत कम भूमिका है।

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जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका ने कहा कि हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्ति के लिए कॉलेजियम ने एक जज के नाम की सिफारिश की थी। अब तक फैसला नहीं हुआ। संबंधित जज 19 दिनों में पद छोड़ने जा रहे हैं। क्या आप चाहते हैं कि वह चीफ जस्टिस बने बिना ही सेवानिवृत्त हो जाएं? वेंकटरमणी ने कहा कि इसकी जानकारी है और जरूरी कार्रवाई की जा रही है। इस पर पीठ ने कहा, कभी-कभी नामों को रातोंरात मंजूरी दे दी जाती है, तो कभी-कभी इसमें बहुत समय लगता है। इसमें एकरूपता नहीं होती है। याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा, कुछ मामलों में कॉलेजियम के नाम दोहराने के बावजूद अब तक नियुक्ति नहीं की गई है।
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भूषण ने कहा, कानून के अनुसार सरकार के पास उन लोगों को नियुक्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है जिनके नाम दोहराए गए हैं। यह इस तरह नहीं चल सकता। एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश एक वकील ने कहा, अदालत पर ‘अदालत के बाहर हमला’ किया जा रहा है। इस पर जस्टिस कौल ने कहा, हम इसके अभ्यस्त हैं ... हम इसे संभालने के आदी हैं। निश्चिंत रहें, यह एक चरण से परे, हमें परेशान नहीं करता है। यह अलग-अलग प्राधिकारियों को देखना है कि क्या उचित है और क्या अनुचित। पीठ इस मामले में अब 13 फरवरी को सुनवाई करेगी।
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मामला 2: धर्मांतरण रोधी कानूनों के खिलाफ 21 याचिकाओं के स्थानांतरण की मांग पर केंद्र समेत 6 राज्यों को नोटिस
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शादी के लिए धर्मांतरण रोकने के लिए बने राज्यों के कानून के खिलाफ 21 मामलों को सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र व छह राज्यों से जवाब मांगा है। शीर्ष अदालत ने कहा, हम अंतिम दलीलें शुरू नहीं कर रहे क्योंकि कई याचिकाओं में नोटिस जारी नहीं किए गए थे। एक बार सभी पक्षों के जवाब रिकॉर्ड में आ जाने के बाद मामले की सुनवाई शुरू होगी। पीठ अब तीन हफ्ते बाद इस मामले में सुनवाई करेगी।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने जमियत- उलमा-ए-हिंद की याचिका पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को जवाब दाखिल करने को कहा। याचिका में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित छह, इलाहाबाद हाईकोर्ट में पांच, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और झारखंड हाईकोर्ट में तीन-तीन और कर्नाटक हाईकोर्ट में लंबित एक याचिका को सुप्रीम कोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की गई। इन सभी याचिकाओं में संबंधित राज्यों के कानून को चुनौती दी गई है। पीठ ने कहा, अब तक जिनमें कोई नोटिस जारी नहीं हुए हैं उनसे जवाब मांगा जाए। इसमें स्थानांतरण याचिका को भी शामिल किया जाए।

  • गुजरात व मप्र में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं, जिसमें संबंधित हाईकोर्ट के धर्मांतरण पर राज्य के कानूनों के कुछ प्रावधानों पर रोक वाले अंतरिम आदेशों को चुनौती दी गई है।
  • अश्विनी उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कहा, पिछली सुनवाई में कई पक्षों ने अतिरिक्त हलफनामे में की गई दलीलों पर आपत्ति जताई थी और इसलिए वह इसे वापस ले रहे हैं। वहीं एक पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा, उपाध्याय ने न केवल अतिरिक्त हलफनामे में, बल्कि रिट याचिकाओं में भी आपत्तिजनक दलीलें दी हैं।
  • पीठ ने दातार से कहा, आप यहां अदालत के एक अधिकारी के रूप में उपस्थित हैं। इसलिए, सुनिश्चित करें कि याचिका में भी ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया है। यदि याचिकाएं सामान्य प्रश्न उठाती हैं, तो अदालत याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगी।


सिंगापुर के चीफ जस्टिस मेनन सीजेआई चंद्रचूड़ की पीठ में बैठे
सिंगापुर के मुख्य न्यायाधीश सुंदरेश मेनन शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के साथ बैठे। सिंगापुर में 2012 से चौथे मुख्य न्यायाधीश मेनन शनिवार को होने वाले सुप्रीम कोर्ट की 73वीं वर्षगांठ समारोह में बतौर मुख्य अतिथि ‘बदलते विश्व में न्यायपालिका की भूमिका’ पर व्याख्यान देंगे। इस कार्यक्रम को जस्टिस एसके कौल और चीफ जस्टिस भी संबोधित करेंगे। भारत के सुप्रीम कोर्ट की 28 जनवरी, 1950 को स्थापना हुई थी।

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