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SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- उपासना स्थल कानून के खिलाफ नहीं ज्ञानवापी में सर्वे, पढ़िए मुस्लिम पक्ष की दलीलें

Sat, 05 Aug 2023 06:03 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 05 Aug 2023 06:03 AM IST
सार

हालांकि चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, यह मुकदमे के परीक्षण के दौरान पारित एक अंतरिम आदेश है। हम संरचना की रक्षा करेंगे। हम आपके हितों की रक्षा करेंगे।

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Supreme Court said Survey in Gyanvapi is not against the place of worship law
supreme court, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वेक्षण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मुस्लिम पक्ष के इस तर्क पर विचार करने से इन्कार कर दिया कि यह उपासना स्थल कानून, 1991 की भावना के खिलाफ है। यह कानून 15 अगस्त, 1947 को प्रचलित धार्मिक स्थलों के चरित्र को बनाए रखने की बात करता है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के वकील हुफेजा अहमदी ने शीर्ष कोर्ट से कहा, सर्वेक्षण की अनुमति देने से देश भर में इसी तरह की याचिका के द्वार खुल जाएंगे। उन्होंने कहा, यह चिंताजनक है क्योंकि वे हमें टुकड़ों में संपत्ति से बेदखल करना चाहते हैं।

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हालांकि चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा, यह मुकदमे के परीक्षण के दौरान पारित एक अंतरिम आदेश है। हम संरचना की रक्षा करेंगे। हम आपके हितों की रक्षा करेंगे। सीजेआई ने कहा, हमें इस स्तर पर हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए? दो अदालतों ने आपके खिलाफ फैसला सुनाया है। इस आश्वासन के बावजूद कि यह (सर्वेक्षण) आपको नुकसान नहीं पहुंचाने वाला है, आप इस पर आपत्ति जता रहे हैं, कल आप सफल हो सकते हैं और यह सर्वेक्षण सिमट कर सिर्फ कागज का एक टुकड़ा भर रह जाएगा।

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पीठ ने यह भी कहा कि अयोध्या मामले में, एएसआई सर्वेक्षण के साक्ष्य मूल्य की जांच की गई और अदालत ने धान से भूसे को अलग कर दिया और फिर कुछ निष्कर्षों को खारिज कर दिया। इस पर अहमदी ने कहा, जब आप अतीत को खोदना शुरू करते हैं तो आप अतीत के घावों को उजागर कर रहे होते हैं और पूजा स्थल अधिनियम यही निषेध करना चाहता है।

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एएसआई का काम स्मारक को संरक्षित करना : हिंदू पक्ष
सुनवाई के दौरान पूजा के अधिकार के लिए मुकदमा दायर करने वाली हिंदू महिलाओं के एक समूह की ओर से वरिष्ठ वकील माधवी दीवान ने दलील दी कि एएसआई का काम स्मारक को संरक्षित करना और इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाना है। उन्होंने कहा, सर्वेक्षण मुकदमे के निर्धारण में अदालत के लाभ के लिए है और किसी भी तरह से पूर्वाग्रहपूर्ण या प्रतिकूल नहीं है, यह किसी भी तरफ जा सकता है। यह एक चांस ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अपने विवेक से सर्वेक्षण का निर्देश दिया था। सर्वेक्षण पर रोक लगाना, अदालत को अक्षम करना है।

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