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SC: सुप्रीम कोर्ट का पिता द्वारा बेटी पर यौन अत्याचार पर कड़ा रुख, कहा- परिवार में ऐसा हो तो टूट जाता है भरोसा

Wed, 06 Aug 2025 07:15 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 06 Aug 2025 07:15 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने पिता द्वारा नाबालिग बेटी के साथ यौन उत्पीड़न को पारिवारिक भरोसे की बर्बादी करार दिया और सख्त सजा व मुआवजे का आदेश दिया। कोर्ट ने हिमाचल की पीड़िता को 10.50 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि घर सुरक्षित होना चाहिए, लेकिन जब परिवार में ही कोई अपराध करे तो उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

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Supreme Court Said harassment by parent tears through foundational fabric of familial trust
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यौन उत्पीड़न के मामले में सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने एक पिता द्वारा अपनी नाबालिग बेटी के साथ किए गए यौन अत्याचार को एक बहुत ही गंभीर अपराध बताया है। कोर्ट ने कहा कि माता-पिता द्वारा ऐसे अपराध करने से परिवार का जो भरोसा होता है, वह पूरी तरह टूट जाता है। इसलिए इस तरह के अपराधों के लिए सख्त सजा होनी चाहिए और पीड़िता को मुआवजा भी मिलना चाहिए।

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कोर्ट ने इस मामले में हिमाचल प्रदेश की उस बेटी को 10.50 लाख रुपये मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया है, जिसे उसके पिता ने परेशान किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की इज्जत की रक्षा करना सबसे जरूरी है और इसे कभी भी कम नहीं आंका जा सकता।

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कोर्ट ने की अहम टिप्पणी
इसके साथ ही मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि घर एक सुरक्षित जगह होती है, लेकिन जब परिवार का ही कोई सदस्य अपने बच्चे को नुकसान पहुंचाए, तो यह बहुत बड़ी गलती है। ऐसे अपराधों को कानून द्वारा सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि कोई और ऐसा करने से डरे।

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कोर्ट ने पिता की जमानत की मांग ठुकरा दी
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी पिता की जमानत की मांग भी ठुकरा दी और कहा कि दोषी को बिना किसी रियायत के सजा मिलनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे मामलों में नरमी दिखाई गई तो यह न्याय के साथ धोखा होगा और कमजोर बच्चों की सुरक्षा का अधिकार खत्म हो जाएगा।

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कोर्ट ने मनुस्मृति की पंक्ति का किया जिक्र
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि जो पिता अपने बच्चे की रक्षा करने वाला होता है, अगर वह ही अपराध करता है तो यह सिर्फ परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का भी बड़ा नुकसान है। इसलिए न्यायपालिका को ऐसे मामलों में पूरी गंभीरता से काम करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने मनुस्मृति के एक श्लोक को भी याद किया, जिसमें कहा गया है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां सब कुछ ठीक चलता है। इस श्लोक को कोर्ट ने सिर्फ सांस्कृतिक नहीं, बल्कि हमारे संविधान का भी हिस्सा बताया। अंत में कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे अपराधों को छूट नहीं दी जा सकती और दोषियों को कड़ी सजा देकर समाज में एक मजबूत संदेश देना जरूरी है।

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