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Supreme Court: 'जांच पूरी करने की समयसीमा अपवाद, नियम नहीं'; अदालत ने कहा- अनावश्यक देरी पर ही दखल देगा कोर्ट

Sat, 03 Jan 2026 02:57 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 03 Jan 2026 02:57 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जांच एजेंसियों को समयसीमा तय करना सामान्य नियम नहीं बल्कि अपवाद है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनावश्यक देरी होने पर ही हस्तक्षेप किया जाएगा।

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Supreme Court Ruling: Investigation Timelines Are an Exception, Court to Intervene Only in Case of Undue Delay
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि जांच पूरी करने के लिए समयसीमा तय करना सामान्य नियम नहीं बल्कि एक अपवाद है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब जांच में अत्यधिक देरी से आरोपी के अधिकारों पर असर पड़ने लगे, तभी न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी होता है।

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न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश की समीक्षा करते हुए की। हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को एक मामले में 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया था और साथ ही आरोपियों को किसी भी तरह की दमनात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया था।
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कोर्ट ने क्यों रद्द किया हाईकोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियों पर शुरुआत से ही समयसीमा थोपना कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप के समान होगा। पीठ ने माना कि जांच कई कारकों पर निर्भर करती है और इसमें स्वाभाविक अनिश्चितता होती है। अदालत ने अपने फैसले में कहा समयसीमा रिएक्टिव रूप से तय की जाती है, प्रोफिलैक्टिक रूप से नहीं यानी अदालतें तभी समय तय करती हैं, जब रिकॉर्ड पर स्पष्ट रूप से यह दिखे कि जांच में अनुचित देरी, ठहराव या लापरवाही हो रही है।
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अनुच्छेद 21 और त्वरित जांच
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई और समय पर जांच हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। यदि एफआईआर दर्ज होने और चार्जशीट दाखिल करने में अत्यधिक और बिना वजह देरी होती है, तो यह व्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा असर डालती है। कोर्ट ने कहा कि जांच को अनंतकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब आरोपी पर लगातार संदेह की छाया बनी रहे।

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आरोपियों को मिली राहत पर भी आपत्ति
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आरोपियों को दी गई सुरक्षा पर भी सवाल उठाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि आरोपियों को केवल दो हफ्ते की अंतरिम राहत दी जाएगी, इसके बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।

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