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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court refuses to consider two petitions against UP conversion prohibition ordinance 2020

यूपी धर्म परिवर्तन निषेध अध्यादेश के खिलाफ दो याचिकाओं पर विचार करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Thu, 04 Feb 2021 04:38 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Thu, 04 Feb 2021 04:38 AM IST
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Supreme Court refuses to consider two petitions against UP conversion prohibition ordinance 2020
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन निषेध अध्यादेश, 2020 को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया। सीजेआई की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा है।

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सीजेआई की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने के लिए कहा
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट इस मामले पर पहले से ही विचार कर रहा है, ऐसे में हमारे द्वारा इस मामले पर विचार करने का कोई कारण नहीं बनता।
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बेहतर होगा कि हमें हाईकोर्ट के फैसले का भी लाभ मिले। याचिकाकर्ता पीयूसीएल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय पारिख ने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण मामला है। निर्दोष लोगों को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया जा रहा है। यूपी और उत्तराखंड में कानून आ चुका है।
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हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात आदि में भी इस तरह के कानून लाए जा रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर सुनवाई करनी चाहिए। जवाब में सीजेआई बोबडे ने कहा कि हम इस बात से इनकार नहीं कर रहे हैं कि यह महत्वपूर्ण मामला नहीं है।

चूंकि हाईकोर्ट इस मामले को देख रहा है, इसलिए हमें नहीं देखना चाहिए। साथ ही पीठ ने कहा कि हमने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें हाईकोर्ट के मामले को सुप्रीम कोर्ट हस्तांतरित करने की अपील की गई थी।


इस पर पारिख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पूर्व में इस मामले में नोटिस जारी कर चुका है, ऐसे में उनकी याचिका को इस याचिका के साथ जोड़ दिया जाए, लेकिन पीठ ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार के अध्यादेश में विवाह के उद्देश्य से धोखाधड़ी व छल के जरिए धर्म परिवर्तन कराने वालों के लिए 10 साल कैद की सजा का प्रावधान है।

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