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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court: Refusal to stay NGTs decision on wood industries in UP, Court also took cognizance in this matter

सुप्रीम कोर्ट : यूपी में लकड़ी उद्योगों पर एनजीटी के फैसले पर रोक लगाने से इनकार, कोर्ट ने इस मामले में भी लिया संज्ञान

Sat, 23 Apr 2022 05:37 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 23 Apr 2022 05:37 AM IST
सार

प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले कहा था कि राज्य में लकड़ी की कोई कमी नहीं है और नए उद्योग को अनुमति देने का फैसला जनहित में लिया गया है। एनजीटी ने पाया था कि नए लकड़ी उद्योगों के लिए लकड़ी उपलब्ध नहीं है। इधर, एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मौत की सजा का फैसला करने में डाटा और जानकारी जुटाने की प्रक्रिया का परीक्षण करने और इसे संस्थागत बनाने के मुद्दे पर स्वत:संज्ञान लिया है।

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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में नए लकड़ी उद्योगों पर एनजीटी के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। दरअसल एनजीटी ने यूपी सरकार को आदेश दिया था कि जब तक इस उद्योग से जुड़ी लकड़ी की उपलब्धता का आकलन नहीं कर लिया जाता तब तक वह अपने प्रस्ताव पर आगे न बढ़े।

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बी आर गवई की पीठ ने कहा कि प्रथमदृष्टया हम इस बात पर ट्रिब्यूनल के फैसले के साथ हैं कि नए उद्योगों को अनुमति देने से पहले प्रदेश सरकार को आंकड़े जुटाने होंगे। दरअसल यूपी ने प्रदेश में 1350 ऐसे उद्योगों को लाइसेंस देने का प्रस्ताव दिया है। इसका नोटिस मार्च 2019 में ही जारी किया गया था।
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सरकार के उस नोटिस को यूपी टिंबर एसोसिएशन और अन्य की ओर से एनजीटी में चुनौती दी गई थी। एनजीटी ने पाया कि नई लकड़ी उद्योगों के लिए लकड़ी उपलब्ध नहीं है। प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले कहा था कि राज्य में लकड़ी की कोई कमी नहीं है और नए उद्योग को अनुमति देने का फैसला जनहित में लिया गया है।
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मौत की सजा के फैसले की प्रक्रिया के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मौत की सजा का फैसला करने में डाटा और जानकारी जुटाने की प्रक्रिया का परीक्षण करने और इसे संस्थागत बनाने के मुद्दे पर स्वत:संज्ञान लिया है। जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने संकेत दिया कि शीर्ष अदालत मौत की सजा से जुड़े मामलों पर विचार करते हुए पूरे भारत में अदालतों द्वारा पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देशों को निर्धारित करेगी।


सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान मामले की शुरुआत करते हुए भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से इस मामले में सहायता मांगी है। साथ ही राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) को भी नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा, मौत की सजा के मुद्दे से निपटने के लिए व्यवस्था को संस्थागत बनाने की जरूरत है, जिस पर अटॉर्नी जनरल ने सहमति जताई। जस्टिस ललित ने कहा, कई मौत की सजा के दोषियों के लिए मुकदमेबाजी सहायता न्यूनतम है।
 

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