{"_id":"680245de48745e97280e8df3","slug":"supreme-court-quashes-dowry-harassment-complaint-against-husband-s-kin-news-in-hindi-2025-04-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: सुप्रीम कोर्ट ने पति के रिश्तेदारों पर दर्ज दहेज प्रताड़ना का केस किया खारिज, कहा- उन्हें बेवजह घसीटा गया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: सुप्रीम कोर्ट ने पति के रिश्तेदारों पर दर्ज दहेज प्रताड़ना का केस किया खारिज, कहा- उन्हें बेवजह घसीटा गया
Fri, 18 Apr 2025 06:00 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 18 Apr 2025 06:00 PM IST
सार
Supreme Court: देश की सर्वोच्च अदालत की तरफ से एक महिला की तरफ से पति के रिश्तेदारों पर दर्ज कराया गया दहेज प्रताड़ना का केस खारिज कर दिया गया है। इस मामले में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा- पति पक्ष के रिश्तेदारों को इस मामले में बेवजह घसीटा गया है।
विज्ञापन
Supreme Court
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की तरफ से अपने पति के रिश्तेदारों के खिलाफ दायर दहेज प्रताड़ना की शिकायत को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इन रिश्तेदारों को बेवजह इस मामले में घसीटा गया है और उनके खिलाफ मुकदमा चलाना अनावश्यक और परेशान करने वाला होगा। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि पति के रिश्तेदारों को दहेज मामलों में बिना किसी ठोस आरोप के शामिल करने की प्रवृत्ति पहले भी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गलत ठहराई जा चुकी है।
तीन साल बाद दर्ज की गई शिकायत
कोर्ट ने बताया कि पति-पत्नी की शादी जून 2010 में हुई थी और वे कुछ समय कोटा में साथ रहे। लेकिन अक्तूबर 2010 में महिला अपने मायके चली गई और फिर कभी ससुराल नहीं लौटी। इसके बाद पति ने तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी और मई 2012 में कोर्ट ने एकतरफा तलाक दे दिया क्योंकि महिला कोर्ट में पेश नहीं हुई। तलाक के करीब तीन साल बाद, अगस्त 2015 में महिला ने एक मजिस्ट्रेट कोर्ट में अर्जी देकर आरोप लगाया कि उसके पति के पांच रिश्तेदार उसके घर आए और दहेज की मांग करते हुए उसे धमकाया और प्रताड़ित किया।
यह भी पढ़ें - Supreme Court: 'पूरी तरह हत्या का मामला', शीर्ष कोर्ट ने ऑनर किलिंग केस में कठोर आरोप तय करने का दिया आदेश
विज्ञापन
मजिस्ट्रेट ने चलाई कार्रवाई, हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत
महिला की अर्जी को एक आपराधिक शिकायत मानते हुए मजिस्ट्रेट ने उन रिश्तेदारों को कोर्ट में पेश होने का समन जारी कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
यह केवल परेशान करने वाला मुकदमा- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल को दिए अपने फैसले में साफ कहा कि जिन रिश्तेदारों को महिला ने आरोपी बनाया है, उनके खिलाफ शादीशुदा जीवन के दौरान किसी प्रकार की प्रताड़ना का कोई खास आरोप नहीं है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब मई 2012 में तलाक हो चुका था, तो अगस्त 2015 में पति के रिश्तेदार महिला से मिलने क्यों आते? कोर्ट ने कहा कि अगर मान भी लें कि ऐसा कोई वाकया हुआ, तो भी उस समय पति-पत्नी का रिश्ता खत्म हो चुका था। ऐसे में पति के रिश्तेदारों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा विवाहिता महिला को प्रताड़ित करना) और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 4 (दहेज मांगना) के तहत मामला नहीं बनता।
यह भी पढ़ें - Supreme Court: मेस के खाने पर भड़के सैनिक की सजा माफ नहीं; जवानों पर चलाई थी गोलियां; हाईकोर्ट का फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि ऐसे मामलों में बिना किसी ठोस आधार के पति के परिवार को घसीटना न्याय का दुरुपयोग है। इससे केवल परिवार के सदस्यों को मानसिक पीड़ा और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
तीन साल बाद दर्ज की गई शिकायत
कोर्ट ने बताया कि पति-पत्नी की शादी जून 2010 में हुई थी और वे कुछ समय कोटा में साथ रहे। लेकिन अक्तूबर 2010 में महिला अपने मायके चली गई और फिर कभी ससुराल नहीं लौटी। इसके बाद पति ने तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी दी थी और मई 2012 में कोर्ट ने एकतरफा तलाक दे दिया क्योंकि महिला कोर्ट में पेश नहीं हुई। तलाक के करीब तीन साल बाद, अगस्त 2015 में महिला ने एक मजिस्ट्रेट कोर्ट में अर्जी देकर आरोप लगाया कि उसके पति के पांच रिश्तेदार उसके घर आए और दहेज की मांग करते हुए उसे धमकाया और प्रताड़ित किया।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें - Supreme Court: 'पूरी तरह हत्या का मामला', शीर्ष कोर्ट ने ऑनर किलिंग केस में कठोर आरोप तय करने का दिया आदेश
विज्ञापन
मजिस्ट्रेट ने चलाई कार्रवाई, हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत
महिला की अर्जी को एक आपराधिक शिकायत मानते हुए मजिस्ट्रेट ने उन रिश्तेदारों को कोर्ट में पेश होने का समन जारी कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
यह केवल परेशान करने वाला मुकदमा- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल को दिए अपने फैसले में साफ कहा कि जिन रिश्तेदारों को महिला ने आरोपी बनाया है, उनके खिलाफ शादीशुदा जीवन के दौरान किसी प्रकार की प्रताड़ना का कोई खास आरोप नहीं है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब मई 2012 में तलाक हो चुका था, तो अगस्त 2015 में पति के रिश्तेदार महिला से मिलने क्यों आते? कोर्ट ने कहा कि अगर मान भी लें कि ऐसा कोई वाकया हुआ, तो भी उस समय पति-पत्नी का रिश्ता खत्म हो चुका था। ऐसे में पति के रिश्तेदारों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498A (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा विवाहिता महिला को प्रताड़ित करना) और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 4 (दहेज मांगना) के तहत मामला नहीं बनता।
यह भी पढ़ें - Supreme Court: मेस के खाने पर भड़के सैनिक की सजा माफ नहीं; जवानों पर चलाई थी गोलियां; हाईकोर्ट का फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी दोहराया कि ऐसे मामलों में बिना किसी ठोस आधार के पति के परिवार को घसीटना न्याय का दुरुपयोग है। इससे केवल परिवार के सदस्यों को मानसिक पीड़ा और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन