{"_id":"62d57f4fcd095302836cefbb","slug":"supreme-court-puts-aside-karnataka-high-court-order-in-bribery-case-news-in-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिश्वत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्देशों पर लगाई रोक, केस को अन्य पीठ को स्थानांतरित करने से किया इनकार","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
रिश्वत मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के निर्देशों पर लगाई रोक, केस को अन्य पीठ को स्थानांतरित करने से किया इनकार
Mon, 18 Jul 2022 09:12 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 18 Jul 2022 09:12 PM IST
सार
चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत अर्जी के दायरे से बाहर कुछ अप्रासंगिक टिप्पणियां कीं।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने रिश्वत के एक मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश एचपी संदेश की ओर से जारी निर्देशों पर सोमवार को रोक लगा दी। इन निर्देशों में राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट और एडीजीपी सहित अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड मांगना शामिल है।
चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत अर्जी के दायरे से बाहर कुछ अप्रासंगिक टिप्पणियां कीं। हालांकि, शीर्ष अदालत ने टिप्पणियों को हटाने और मामले को हाईकोर्ट में किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उसे ‘पक्षों को संतुलित करना’ है।
पीठ ने कहा कर्नाटक हाईकोर्ट की उस कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है, जो आरोपियों की जमानत अर्जी से संबंधित नहीं है। हम हाईकोर्ट से आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करने का अनुरोध करते हैं। इसे तीन सप्ताह के बाद सूचीबद्ध करें। शीर्ष अदालत जस्टिस संदेश की प्रतिकूल टिप्पणी के खिलाफ कर्नाटक सरकार, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एडीजीपी सीमांत कुमार सिंह और जेल में बंद अधिकारी जे मंजूनाथ द्वारा दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने मौखिक रूप से एसीबी को ‘वसूली केंद्र’ और सिंह को ‘दागी अधिकारी’ कहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत अर्जी के दायरे से बाहर कुछ अप्रासंगिक टिप्पणियां कीं। हालांकि, शीर्ष अदालत ने टिप्पणियों को हटाने और मामले को हाईकोर्ट में किसी अन्य पीठ को स्थानांतरित करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उसे ‘पक्षों को संतुलित करना’ है।
विज्ञापन
पीठ ने कहा कर्नाटक हाईकोर्ट की उस कार्यवाही पर रोक लगाई जाती है, जो आरोपियों की जमानत अर्जी से संबंधित नहीं है। हम हाईकोर्ट से आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करने का अनुरोध करते हैं। इसे तीन सप्ताह के बाद सूचीबद्ध करें। शीर्ष अदालत जस्टिस संदेश की प्रतिकूल टिप्पणी के खिलाफ कर्नाटक सरकार, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एडीजीपी सीमांत कुमार सिंह और जेल में बंद अधिकारी जे मंजूनाथ द्वारा दायर तीन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने मौखिक रूप से एसीबी को ‘वसूली केंद्र’ और सिंह को ‘दागी अधिकारी’ कहा था।
विज्ञापन