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Supreme Court: सीएए से जुड़े मामलों पर पांच मई से सुनवाई; स्टालिन के चुनाव को चुनौती मामले में फैसला सुरक्षित

Thu, 19 Feb 2026 10:58 PM IST
देवेश त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देवेश त्रिपाठी Updated Thu, 19 Feb 2026 10:58 PM IST
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Supreme Court News Updates CAA pleas from May 5 Tamil Nadu Stalin 2011 election Sonam Wangchuk case Hearing
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (2019) की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली आईयूएमएल समेत 200 से ज्यादा याचिकाओं पर कहा कि इनकी अंतिम सुनवाई 5 मई से सुनवाई शुरू होगी। सीएए का मकसद हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन और पारसी समुदायों के उन प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करना है, जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से देश में आए थे।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमालया बागची और विपुल एम पंचोली की पीठ ने 2019-2020 से लंबित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के संबंध में प्रक्रियात्मक निर्देश जारी किए। पीठ ने कहा कि इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के साथ अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर डेढ़ दिन तक सुनवाई करेगी। केंद्र को अपनी दलीलें पेश करने के लिए एक दिन का समय दिया जाएगा।
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पीठ 12 मई को याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर लेगी। पीठ ने पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अतिरिक्त दस्तावेज और दलीलें दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा कि वह पहले पूरे भारत में सीएए के लागू होने से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई करेगी और उसके बाद असम और त्रिपुरा से संबंधित याचिकाओं पर ध्यान देगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एआईएडीएमके नेता सैदाई एस दुरैसामी की ओर से दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ है जिसमें तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एमके स्टालिन के खिलाफ उनकी चुनाव याचिका खारिज कर दी गई थी। याचिका में स्टालिन पर 2011 के विधानसभा चुनावों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।

न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों की ओर से दी गईं दलीलों को सुना। 2017 में मद्रास उच्च न्यायालय ने दुरैसामी की चुनाव याचिका खारिज कर दी थी। गौरतलब है कि दुरैसामी 2011 के चुनावों में कोलाथुर सीट से स्टालिन से 2,739 वोटों से हार गए थे। दुरैसामी ने आरोप लगाया था कि निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं को निर्धारित व्यय सीमा से अधिक धनराशि बांटी गई और साथ ही पूरक मतगणना भी की गई। दुरैसामी ने डीएमके पर अपने पदाधिकारियों और धन का इस्तेमाल करके मतदाताओं को लुभाने के लिए नए-नए तरीके अपनाने का भी आरोप लगाया।

'दोबारा विचार करें', बार काउंसिल ऑफ इंडिया से क्यों बोला सुप्रीम कोर्ट? 
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से उस नियम पर दोबारा विचार करने को कहा, जिसके तहत बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को राज्य बार काउंसिल के चुनाव लड़ने से रोका जाता है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने वकील धन्या कुमार जैन की याचिका पर यह आदेश पारित किया और याचिका का निपटारा कर दिया। याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के वर्ष 2016 के चुनावों के लिए बनाए गए समान नियमों और अनिवार्य दिशानिर्देशों को चुनौती दी गई थी। विवादित प्रावधान के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को छोड़कर किसी भी बार एसोसिएशन का पदाधिकारी राज्य बार काउंसिल का चुनाव लड़ने के लिए पात्र नहीं होगा। नियम में यह भी कहा गया है कि संबंधित राज्य बार काउंसिल के चुनाव की अधिसूचना की तारीख को जो व्यक्ति किसी बार एसोसिएशन का पदाधिकारी था या है, उसका नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर खारिज कर देगा। अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि राज्य बार काउंसिल एक वैधानिक संस्था है, जबकि बार एसोसिएशन किसी विशेष अदालत या अधिकरण में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के निजी संगठन होते हैं।

पतंजलि को झटका: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, योग शिविरों में एंट्री फीस लेने पर देना होगा सर्विस टैक्स

सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि योग पीठ ट्रस्ट को बड़ा झटका देते हुए उसकी क्यूरेटिव (सुधारात्मक) याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने साफ कर दिया कि योग शिविरों के लिए एंट्री फीस लेने पर ट्रस्ट को सर्विस टैक्स देना होगा। इससे पहले शीर्ष अदालत ने अपीलीय ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखा था। 

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस उज्जवल भुइंया की पीठ ने 4 फरवरी के आदेश में कहा कि क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं बनता। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि 2002 के रूपा अशोक हुरा बनाम अशोक हुरा मामले में तय मानकों के अनुसार इस याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। इससे पहले 7 जनवरी 2024 को जस्टिस अभय एस ओका (सेवानिवृत्त) और जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने पतंजलि ट्रस्ट की पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी थी।

19 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के उस फैसले को सही ठहराया था, जिसमें कहा गया था कि आवासीय और गैर-आवासीय योग शिविरों के लिए ली जाने वाली एंट्री फीस पर सर्विस टैक्स लागू होगा। इस फैसले के खिलाफ पतंजलि ने क्यूरेटिव (सुधारात्मक) याचिका दाखिल की थी, जो अब खारिज हो चुकी है।
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