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कैबिनेट का बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या, अब होंगे कुल 38 न्यायाधीश; संसद में आएगा बिल
Tue, 05 May 2026 08:03 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 05 May 2026 08:03 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी। यह कदम न्यायपालिका के बढ़ते बोझ को कम करने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। केंद्र सरकार का क्या कहना है? जानिए...
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शीर्ष अदालत में बढ़ने वाली है जजों की संख्या
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केंद्रीय कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाई जाएगी। वर्तमान में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 34 जज हैं। अब इस संख्या को बढ़ाकर 38 करने का लक्ष्य रखा गया है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस निर्णय की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा, 'वर्तमान में शीर्ष अदालत में 33 जज और एक सीजेआई हैं। जजों की संख्या में चार की बढ़ोतरी करने के लिए संसद के अगले सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा।' संसद से मंजूरी मिलते ही सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश समेत कुल 38 जज हो जाएंगे।
यह भी पढ़ें: कैबिनेट के फैसले: गन्ना और कपास किसानों को बड़ी सौगात, दो नई सेमीकंडक्टर इकाइयों को मंजूरी
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ऐतिहासिक बदलाव का सफर
सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की संख्या अधिनियम 1956 के मूल स्वरूप में मुख्य न्यायाधीश के अलावा केवल 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ इसमें कई संशोधन हुए। 1960 में यह संख्या बढ़ाकर 13 की गई। बाद में एक अन्य संशोधन के जरिए इसे 17 कर दिया गया। 1986 में जजों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 की गई थी।
हालिया वर्षों में हुई बढ़ोतरी
साल 2009 में दोबारा कानून में संशोधन हुआ। तब जजों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या आखिरी बार साल 2019 में बढ़ाई गई थी। तब मूल अधिनियम में संशोधन कर जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33, मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर की गई थी। अब 2026 में इसे फिर से बढ़ाने की तैयारी है।
बढ़ते कार्यभार और लंबित मामलों का दबाव
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का यह निर्णय बढ़ते न्यायिक बोझ को देखते हुए लिया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे न्याय मिलने में देरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जजों की संख्या में इस बढ़ोतरी से विशेष रूप से 'संविधान पीठ'के मामलों और महत्वपूर्ण संवैधानिक अपीलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है। जब अधिक जज उपलब्ध होंगे, तो अधिक संख्या में पीठ का गठन किया जा सकेगा, जिससे आम आदमी के सामान्य दीवानी और फौजदारी मामलों का निपटारा भी समय पर हो पाएगा।
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस निर्णय की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा, 'वर्तमान में शीर्ष अदालत में 33 जज और एक सीजेआई हैं। जजों की संख्या में चार की बढ़ोतरी करने के लिए संसद के अगले सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा।' संसद से मंजूरी मिलते ही सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश समेत कुल 38 जज हो जाएंगे।
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ऐतिहासिक बदलाव का सफर
सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की संख्या अधिनियम 1956 के मूल स्वरूप में मुख्य न्यायाधीश के अलावा केवल 10 जजों का प्रावधान था। समय के साथ इसमें कई संशोधन हुए। 1960 में यह संख्या बढ़ाकर 13 की गई। बाद में एक अन्य संशोधन के जरिए इसे 17 कर दिया गया। 1986 में जजों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 की गई थी।
हालिया वर्षों में हुई बढ़ोतरी
साल 2009 में दोबारा कानून में संशोधन हुआ। तब जजों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई। सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या आखिरी बार साल 2019 में बढ़ाई गई थी। तब मूल अधिनियम में संशोधन कर जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33, मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर की गई थी। अब 2026 में इसे फिर से बढ़ाने की तैयारी है।
बढ़ते कार्यभार और लंबित मामलों का दबाव
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का यह निर्णय बढ़ते न्यायिक बोझ को देखते हुए लिया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे न्याय मिलने में देरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जजों की संख्या में इस बढ़ोतरी से विशेष रूप से 'संविधान पीठ'के मामलों और महत्वपूर्ण संवैधानिक अपीलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है। जब अधिक जज उपलब्ध होंगे, तो अधिक संख्या में पीठ का गठन किया जा सकेगा, जिससे आम आदमी के सामान्य दीवानी और फौजदारी मामलों का निपटारा भी समय पर हो पाएगा।
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