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Sri Lanka: भारत-श्रीलंका पर्यावरणीय सहयोग 'अस्तित्व का सवाल', न कि 'दया या कूटनीति', बोले जस्टिस सूर्यकांत
Wed, 22 Oct 2025 11:30 PM IST
लव गौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Wed, 22 Oct 2025 11:30 PM IST
सार
Justice Surya Kant: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बुधवार (22 अक्तूबर) को कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच पर्यावरण सहयोग दान या कूटनीति का मामला नहीं, बल्कि अस्तित्व का प्रश्न है।
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जस्टिस सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 'भारत-श्रीलंका' पर अपने विचार साझा किए हैं। कोलंबो विश्वविद्यालय के लॉ फैकल्टी में 'भारत-श्रीलंका नीति संवाद: पर्यावरणीय स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाना' विषय पर एक गोष्ठी में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, 'बंगाल की खाड़ी हमें विभाजित नहीं करती, बल्कि एक साझा पारिस्थितिक भाग्य के माध्यम से दोनों देशों को बांधती है।'
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'भारत-श्रीलंका नीति संवाद' पर बोले पर रहे थे न्यायमूर्ति सूर्यकांत
लॉ फैकल्टी के कार्यक्रम में न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच पर्यावरण सहयोग कोई दान या कूटनीति का विषय नहीं है, बल्कि यह अस्तित्व का सवाल है। उन्होंने कहा कि पाल्क खाड़ी और मन्नार की खाड़ी जैव विविधता के प्रमुख स्थान हैं, जहां प्रवाल भित्तियां, सीग्रास (समुद्री घास) मैदानी क्षेत्र और कई संकटग्रस्त प्रजातियां पाई जाती हैं। लेकिन अधिक मछली पकड़ने, विनाशकारी ट्रॉलिंग प्रथाओं और अनियंत्रित तटीय निर्माण के कारण इन क्षेत्रों का पारिस्थितिक संतुलन गंभीर संकट में हैं।
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पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा उठाया
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारत और श्रीलंका की न्यायपालिका को अब एक 'क्षेत्रीय पर्यावरणीय संवैधानिक मॉडल' को अपनाने की जरूरत है, क्योंकि कई पर्यावरणीय अधिकार और दायित्व सीमाओं से परे हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि दोनों देशों को साझा भौगोलिक जिम्मेदारी निभानी होगी क्योंकि पर्यावरणीय क्षति की रफ्तार तेज हो रही है। तेल रिसाव, प्रवाल भित्तियों का सफेद होना और मत्स्य समुदायों की आजीविका पर प्रभाव जैसे मुद्दे अब दोनों देशों के साझा संकट बन गए हैं।
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संयुक्त निगरानी और डेटा साझा पर जोर
उन्होंने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन और समुद्र स्तर में वृद्धि से तमिलनाडु और उत्तरी श्रीलंका के तटीय इलाकों में कृषि और मत्स्य उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। नमकीन पानी की घुसपैठ और अनिश्चित मानसून ने स्थिति को और खराब कर दिया है। उन्होंने साथ ही उन समस्याओं से निपटने के लिए संयुक्त निगरानी और डेटा साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया जो बिखरी हुई हैं और जिन पर नजर नहीं रखी जा रही है।
पर्यावरणीय आपदाएं राजनीतिक सीमाओं से अलग-सूर्यकांत
उन्होंने बताया कि 2004 की सुनामी से लेकर बार-बार आने वाले चक्रवातों तक, दोनों देशों ने अनुभव किया है कि कैसे पर्यावरणीय आपदाएं राजनीतिक सीमाओं को पार कर जाती हैं। न्यायमूर्ति कांत ने कहा, 'ये ऐसी घटनाएं हैं जो राष्ट्रीय सीमाओं को नहीं पहचानतीं और आपदा प्रबंधन में सहयोग को बढ़ावा देती हैं, फिर भी पारिस्थितिक बहाली अभी भी खंडित बनी हुई है।'