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सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय हाईकोर्ट के जज सुदीप रंजन को नोटिस जारी किया
Mon, 25 Feb 2019 10:29 PM IST
Gaurav Pandey
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Mon, 25 Feb 2019 10:29 PM IST
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supreme court
- फोटो : PTI
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उच्चतम न्यायालय ने मेघालय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सुदीप रंजन सेन की एक विवादास्पद टिप्पणी हटाने के लिये दायर याचिका पर सोमवार को उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति सेन ने कहा था कि 1947 में देश के बंटवारे के साथ ही भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया जाना चाहिए था।
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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने सोना खान और अन्य की याचिका पर उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया। इस याचिका में दलील दी गयी है कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सेन के इस फैसले में कानूनी त्रुटियां हैं और यह ऐतिहासिक रूप से गुमराह करने वाला है।
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शीर्ष अदालत ने इससे पहले न्यायमूर्ति सेन से न्यायिक कार्य वापस लेने के अनुरोध पर विचार करने से इंकार कर दिया था और याचिकाकर्ता से कहा था कि वह अपनी याचिका में संशोधन करके इस कथित विवादास्पद टिप्पणी को हटाने का अनुरोध करें।
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न्यायमूर्ति सेन ने अपने फैसले में लिखा था, पाकिस्तान ने खुद को एक इस्लामिक देश घोषित कर दिया था और भारत, चूंकि इसका बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था, को भी इसे हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था परंतु यह पंथनिरपेक्ष देश बना रहा।
आज भी, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई, पारसी, खासी, जयंतिया और गारो समुदाय को प्रताड़ित किया जाता है और उनके पास जाने के लिये कोई जगह नहीं है और हिंदू जो बंटवारे के दौरान भारत आये, वे अभी भी विदेशी ही माने जाते हैं जो मेरी समझ से अत्यधिक तर्कहीन, गैरकानूनी है और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।
याचिका में कहा गया है कि न्यायाधीश की इन टिपपणियों से नागरिकता कानून का उल्लंघन होता है और यह भारत को हिंदुओं का और हिंदूओं के लिए देश समझने का मामला बनाता है।