{"_id":"60e640428ebc3e9e7f6f9319","slug":"supreme-court-inquiry-handed-over-to-cbi-to-release-400-acres-of-land-acquired-in-rohtak","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट: रोहतक में अधिग्रहीत 400 एकड़ जमीन रिलीज करने की जांच सीबीआई के हवाले","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट: रोहतक में अधिग्रहीत 400 एकड़ जमीन रिलीज करने की जांच सीबीआई के हवाले
Thu, 08 Jul 2021 05:31 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 08 Jul 2021 05:31 AM IST
सार
- जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने पिछले पांच वर्ष से इस मामले में कुछ नहीं हो पाने पर नाराजगी जताते हुए कहा, अब इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का समय आ गया है।
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शासनकाल में रोहतक में अधिग्रहीत करीब 400 एकड़ भूमि रिलीज करने की जांच सीबीआई को सौंप दी है। कोर्ट ने साथ ही 280 एकड़ भूमि पर आवासीय कॉलोनी बनाने के लिए उद्दार गगन प्रॉपर्टीज लिमिटेड नामक एक रियल एस्टेट डेवलपर को लाइसेंस जारी करने की जांच भी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी है।
विज्ञापन
जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ ने पिछले पांच वर्ष से इस मामले में कुछ नहीं हो पाने पर नाराजगी जताते हुए कहा, अब इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का समय आ गया है। पीठ ने पाया कि 2016 में इस मामले में अधिकारियों की भूमिका तय करने के आदेश के बावजूद अब तक कुछ नहीं हो सका है।
विज्ञापन
हम चाहते हैं कि फर्जीवाड़ा सामने आए और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। सुप्रीम कोर्ट ने आईएएस अधिकारी अनुराग रस्तोगी की नवीनतम जांच रिपोर्ट पर आपत्ति जताई, जिसमें सिर्फ एक प्रणालीगत विफलता की बात कही गई थी और किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से पेश असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल अनिल ग्रोवर से कहा, आपके हिसाब से सब कुछ प्रणालीगत विफलता है और कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन इस पूरे प्रकरण के पीछे स्वाभाविक रूप से कई लोग होंगे।
विज्ञापन
2018 में राज्य सरकार ने इस मामले की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस आरएस मदान से कराने का निर्णय लिया था। उनके द्वारा की गई सिफारिशों पर सिंचाई विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव को कुछ अधिकारियों की भूमिका की जांच करने के लिए कहा गया था।
क्या है मामला
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) द्वारा रोहतक में आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए 2002 में लगभग 850 एकड़ का अधिग्रहण करने का प्रस्ताव था। हालांकि, अप्रैल 2005 में 422 एकड़ के लिए अवार्ड जारी किया गया था। इस दौरान उद्दार गगन प्रॉपर्टीज लिमिटेड ने मार्च 2005 में कुछ किसानों के साथ करार किया। ये वे किसान थे, जिनकी भूमि एक कॉलोनी के विकास के लिए अधिग्रहण के अधीन थी। डेवलपर ने 280 एकड़ जमीन पर कॉलोनी विकसित करने के लिए लाइसेंस का आवेदन दिया था।
जून 2006 में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डायरेक्टर द्वारा लाइसेंस दे दिया गया और संबंधित भूमि को अधिग्रहण से मुक्त कर दिया गया था। लाइसेंस भूमि मालिकों को जारी किए गए थे लेकिन बिल्डर को दे दिए गए थे। इसके बाद पावर-ऑफ-अटॉर्नी के माध्यम से बिल्डर के पक्ष में सेल डीड तैयार कराई गई थी।
2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अधिग्रहण को किया था रद्द
मई 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अधिग्रहण से रिलीज की गई भूमि को रद्द कर दिया और डेवलपर का लाइसेंस हुडा को स्थानांतरित कर दिया। 13 मई, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश के जरिये राज्य सरकार को बिल्डर के आवेदनों को अवैध रूप से विचार करने और उसे जमीन जारी करने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच का आदेश दिया गया था।