क्या रोज पीआईएल दायर करने के लिए भाजपा तुम्हें फाइनेंस करती है: सुप्रीम कोर्ट
क्या रोज -रोज नई याचिकाएं दायर करने के लिए भाजपा तुम्हें फाइनेंस करती है। क्या कोर्ट में पॉलीटिकल एक्टिविज्म को बढ़ावा देने के लिए भाजपा तुम्हें प्रोत्साहित करती है? उक्त तल्ख टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रदेश भाजपा के एक प्रवक्ता पर की जिनकी रोज रोज की पीआईएल (जनहित याचिका) दायर करने की आदत से शीर्षतम कोर्ट भड़क उठी।
खबर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट कोर्ट दिल्ली भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय के लगातार जनहित याचिका दायर करने से नाराज हो गई। कोर्ट ने उन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या यही वो काम है जो भाजपा ने आपको दे रखा है? क्या भाजपा आपको कोर्ट में उसका एजेंडा बढ़ाने के लिए फाइनेंस करती है?
असल में भाजपा के उक्त प्रवक्ता लगातार सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करते रहते हैं। उन्हीं की एक याचिका पर कोर्ट शुक्रवार को सुनवाई कर रही थी। जिसे कोर्ट ने तुरंत खारिज कर दिया।
अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर भड़की कोर्ट
इसी पर सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, आप एक पेशेवर पीआईएल एक्टिविस्ट बन हैं, और हम हर रोज आपको कोर्ट में पीआईएल दायर करते हुए देखते हैं। आपकी पार्टी सरकार में है आपको समस्याओं के निराकरण के लिए उनसे कहना चाहिए।
कोर्ट ने साफ कहा कि वह अपने यहां पॉलीटिकल एक्टिविज्म को बढ़ावा नहीं दे सकती। हम किसी को न्यायिक व्यवस्था के सहारे पॉलीटिकल एक्टिविज्म को बढ़ावा देने की छूट नहीं दे सकते।
बता दें कि पिछले महीने ही बांबे हाईकोर्ट ने कहा था कि 80 फीसदी पीआईएल सिर्फ ब्लैकमेल करने के लिए दायर की जाती हैं। बताया जा रहा है कि उक्त भाजपा प्रवक्ता ने शराब को लेकर देशभर में नेशनल लीकर पॉलिसी बनाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।