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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: केरल वक्फ बोर्ड को राहत: हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का हटाया कौन सा हिस्सा?

Tue, 21 Jul 2026 04:32 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 21 Jul 2026 04:32 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड को राहत देते हुए हाईकोर्ट के उस अंतरिम निर्देश को हटा दिया, जिसमें बोर्ड को राज्य सरकार के संयुक्त सचिव की निगरानी में काम करने के लिए कहा गया था। शीर्ष अदालत ने माना कि बोर्ड की स्वायत्तता बनाए रखना आवश्यक है और संयुक्त सचिव केवल बोर्ड के सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।

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Supreme Court gives relief to Kerala Waqf Board deletes part of HC order asking function under joint secretary
सुप्रीम कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड को दी राहत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल वक्फ बोर्ड को बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च अदालत ने केरल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का वह हिस्सा हटा दिया, जिसमें बोर्ड को राज्य सरकार के संयुक्त सचिव की निगरानी में काम करने का निर्देश दिया गया था। सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि बोर्ड की स्वायत्तता बनाए रखना जरूरी है। इसके साथ ही अदालत ने इस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों का निपटारा कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में क्या कहा?
पीठ ने अपने आदेश में कहा, "पैरा 6 की शुरुआती पंक्ति को देखते हुए, जिसमें बोर्ड को अदालत की अनुमति के बिना कोई पूंजीगत खर्च नहीं करने का निर्देश दिया गया है, हमें लगता है कि पैरा 6 की अंतिम पंक्ति को बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए बोर्ड को सरकार के संयुक्त सचिव की निगरानी में काम करने का निर्देश हटाया जाता है। संयुक्त सचिव, जो बोर्ड के सदस्य हैं, उसी हैसियत से अपना कार्य जारी रखेंगे। मामला कल हाईकोर्ट में सूचीबद्ध है। हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि सभी पक्षों को अपने दावे और जवाब दाखिल करने का उचित अवसर देकर मामले का जल्द निपटारा करे।"
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हाईकोर्ट ने 15 जुलाई को दिया था अंतरिम आदेश
केरल हाईकोर्ट ने 15 जुलाई को अंतरिम आदेश जारी करते हुए राज्य वक्फ बोर्ड को अदालत की अनुमति के बिना कोई बड़ा फैसला लेने से रोक दिया था। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि बोर्ड बिना न्यायालय की स्पष्ट अनुमति के कोई पूंजीगत खर्च या नीतिगत फैसला नहीं करेगा।
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जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया था आदेश
हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया था, जिनमें आरोप लगाया गया था कि एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तीकरण, दक्षता और विकास अधिनियम के तहत आवश्यक दो गैर-मुस्लिम सदस्यों के बिना केरल वक्फ बोर्ड का गठन किया गया है और इसलिए उसका कामकाज वैध नहीं है।

वक्फ बोर्ड ने आदेश का किया था विरोध
वक्फ बोर्ड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि इतना असाधारण आदेश पारित करने से पहले बोर्ड के सदस्यों को याचिकाओं की प्रतियां तक नहीं दी गई थीं। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने बोर्ड के कामकाज पर रोक लगाने की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा, "सिर्फ इस एक मुद्दे की वजह से बोर्ड का कामकाज क्यों ठप किया जाए? आइए, पैरा 6 पर रोक लगा देते हैं।"

राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं पर भी हुई बहस
केरल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने पीठ को बताया कि मामला पहले से ही हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इस पर वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार याचिकाकर्ताओं का समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा, "आप याचिकाकर्ता का समर्थन क्यों कर रहे हैं? सामान्य समझ रखने वाला कोई भी व्यक्ति यह समझ सकता है कि आप याचिकाकर्ता का पक्ष ले रहे हैं।"


सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के उस हिस्से को बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है, जिसमें राज्य सरकार के वक्फ मामलों से जुड़े संयुक्त सचिव की निगरानी में बोर्ड के काम करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि संयुक्त सचिव बोर्ड के सदस्य के रूप में अपना दायित्व निभाते रहेंगे, लेकिन उनकी भूमिका निगरानी करने की नहीं होगी।
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