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सुप्रीम कोर्ट: यूपी के मेडिकल कॉलेज को पांच करोड़ रुपये जुर्माना भरने के लिए मिली मोहलत

Wed, 02 Jun 2021 04:35 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Wed, 02 Jun 2021 04:35 AM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माने की राशि को रजिस्ट्री में जमा कराने के आदेश का पालन करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद को 12 हफ्ते का वक्त और दिया

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Supreme Court given 12 weeks time to UP medical college for pay fine of Rs 5 crore
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) को उत्तर प्रदेश के सरस्वती मेडिकल कॉलेज पर लगाए गए पांच करोड़ रुपये की जुर्माने की राशि को रजिस्ट्री में जमा कराने के आदेश का पालन करने के लिए और 12 हफ्ते की मोहलत दी है।

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जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के समक्ष एनएमसी की ओर से पेश हुए वकील गौरव शर्मा ने अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए और समय देने की मांग की। उन्होंने कहा, कोविड-19 के।कारण पूर्व निर्देश का पालन नहीं हो सका है, जिसके बाद पीठ ने एनएमसी को और 12 हफ्ते का समय दे दिया।
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फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने नियमों की अनदेखी कर अपनी मर्जी से अकादमी सत्र 2017-18 में 136 छात्रों का दाखिला लेने पर कॉलेज पर पांच करोड़ रुपये जुर्माना लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जुर्माने की राशि का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेज में दाखिले के इच्छुक जरूरतमंद छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में होगा।
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जेलों में कैदियों की संख्या कम करने में आडे़ नहीं आएगी समिति: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जेलों से कैदियों की संख्या कम करने के लिए राज्यों द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति आडे़ नहीं आएगी। यह रीमिशन बोर्ड के आपराधिक दंड प्रक्रिया (सीआरपीसी) की धारा- 432 और 433ए के तहत छूट या रियायत आवेदन के रास्ते में नहीं आएगी।


दरअसल, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन पीठ ने समक्ष दाखिल एक वकील के आवेदन  में कहा गया था कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन के बाद रीमिशन बोर्ड कैदियों की छूट या रियायत आवेदन पर विचार नहीं कर रहा है। इस पर पीठ ने साफ किया कि सात मई को उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन का आदेश रीमिशन बोर्ड को कैदियों के रीमिशन आवेदनों पर विचार करने से नहीं रोकता है।

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