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SIR: एसआईआर को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में रखा पक्ष, चुनाव आयोग के तर्कों पर उठाए सवाल

Tue, 02 Dec 2025 11:16 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 02 Dec 2025 11:16 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकार्ताओं ने अपना पक्ष रखा है औऱ चुनाव आयोग की ओर से एसआईआर करने के पीछे दिए गए कारणों को पर सवाल उठाए। 

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Supreme Court Election Commission's reasons of rapid urbanisation, frequent migration for SIR untenable
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

देश के कई राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का सुप्रीम कोर्ट में विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं ने कहा कि एसआईआर के लिए चुनाव आयोग की ओर से दिए जा रहे तेज शहरीकरण और बार-बार पलायन के तर्क स्वीकार नहीं किए जा सकते। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि किसी भी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूचियों के संशोधन का उसका अधिकार उसे पूरे देश में ऐसा करने का अधिकार नहीं देता।

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा, यदि कारण समान हैं, तो उनमें तार्किक संबंध होना चाहिए। यहां तो कारण भी सबसे सामान्य दिए गए हैं, तेज शहरीकरण और लगातार पलायन। शहरीकरण तो कई वर्षों से चल रहा है। कोई क्षेत्र ग्रामीण से कब अर्धशहरी और फिर पूरी तरह शहरी हो जाता है यह पता नहीं चलता। तेज शहरीकरण एसआईआर के लिए कोई आधार नहीं हो सकता। पीठ ने कई राज्यों में चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों के चल रहे गहन पुनरीक्षण की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर लगातार तीसरे दिन सुनवाई जारी रखी।
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प्रशांत भूषण की दलील पर पीठ ने लिया कड़ा संज्ञान
सुनवाई के अंतिम चरण में पीठ ने वकील प्रशांत भूषण की उस दलील पर कड़ा संज्ञान लिया जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग को निरंकुश बताया था। उन्होंने एसआईआर के फैसले को अभूतपूर्व करार देते हुए कहा, पहली बार, मतदाता सूची एकदम नए सिरे से तैयार की जा रही है। यह एक नए सिरे से तैयारी है, कोई विशेष संशोधन नहीं। उन्होंने इस प्रक्रिया में की गई जल्दबाजी पर सवाल उठाया और जमीनी कर्मचारियों पर दबाव को 30 बीएलओ द्वारा आत्महत्या की खबरों से जोड़ा, और एक मीडिया जांच का हवाला दिया जिसमें बताया गया था कि एसआईआर (विशेष जांच रिपोर्ट) के बाद भी पांच लाख से ज्यादा डुप्लिकेट मतदाता बचे हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई लोग चुनाव आयोग को निरंकुश मानते हैं। सीजेआई ने कहा, हमें ऐसे व्यापक बयान नहीं देने चाहिए जो दलीलों में शामिल नहीं हैं। कृपया खुद को दलीलों तक ही सीमित रखें।
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नियमों का हवाला देते हुए, सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग को विशेष संशोधन करने का अधिकार है लेकिन इसके लिए भी प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए विशिष्ट कारणों की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा, किसी भी निर्वाचन क्षेत्र को हल्के में नहीं लिया जा सकता और इसका अर्थ सभी निर्वाचन क्षेत्र नहीं है। धारा 21(3) के तहत कारण व्यक्तिगत होते हैं और सभी निर्वाचन क्षेत्र पर एकसमान नहीं हो सकते। उन्होंने आगे कहा, यहां जो किया जा रहा है वह कानून का अतिक्रमण है। सिंघवी ने चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि आयोग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21 के तहत अपनी वैधानिक शक्तियों का अतिक्रमण किया है।

उन्होंने चुनाव आयोग पर सरकार के जगह पर खुद नागरिकता का परीक्षण करने का आरोप लगाया। सिंघवी ने आगे कहा कि गहन संशोधन केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 25 का हवाला देते हुए तर्क दिया कि किसी भी गहन संशोधन को वैधानिक ढांचे के अनुरूप ही होना चाहिए।


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बंगाल में अधिकारियों पर हमले का उठाया मामला
वकील अश्विनी उपाध्याय ने पश्चिम बंगाल में ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर कथित हमलों की ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया। इस पर सीजेआई ने कहा, अधिकारी इसका ध्यान रखेंगे। चिंता न करें। वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने तर्क दिया कि वर्तमान में जिस तरह से एसआईआर प्रक्रिया तैयार की गई है, वह वोटरों को बाहर निकालने के लिए डिजाइन है। उन्होंने जनवरी, 2025 के संशोधन की तुलना में ड्राफ्ट रोल में महिला मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, छह महीने पहले जो महिलाएं सूची में थीं, वे अब गायब हैं। 4 लाख से 79,000 तक की यह गिरावट जमीनी हकीकत को दर्शाती है जो महिलाओं को अलग तरह से प्रभावित करती है।

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