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SC: जमानत आदेशों में 'गंभीर खामियों' पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, दिल्ली के जजों को प्रशिक्षण देने का दिया निर्देश

Tue, 30 Sep 2025 05:06 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 30 Sep 2025 05:06 PM IST
सार

Supreme Court: एक आदेश में, सुप्रीम कोर्ट ने 1.9 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले में जमानत आदेशों में 'गंभीर खामियों' को रेखांकित करने के बाद दो न्यायिक अधिकारियों को दिल्ली न्यायिक अकादमी में सात दिनों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण लेने का निर्देश दिया है।

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Supreme Court directs training for Delhi judges over 'serious lapses' in bail orders
Supreme Court - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में दिल्ली की निचली अदालतों के दो न्यायिक अधिकारियों को सात दिन का अनिवार्य प्रशिक्षण लेने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इन अधिकारियों की तरफ से दिए गए जमानत आदेशों में गंभीर खामियां रही हैं। मामला 1.9 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला एम/एस नेटसिटी सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड की अपील से संबंधित है। कंपनी ने आरोप लगाया था कि आरोपी दंपति, शिक्षा राठौर और उनके पति, ने जमीन स्थानांतरित करने के नाम पर पैसे लिए, जबकि वह जमीन पहले से ही बंधक रखी गई थी और बाद में तीसरे पक्ष को बेच दी गई। शिकायत 2017 में दर्ज हुई और इसके आधार पर 2018 में प्रीत विहार थाने में एफआईआर दर्ज हुई।
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आरोपी दंपति ने पहले कई बार अग्रिम जमानत मांगी, जिसे ट्रायल कोर्ट और बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी 2023 में खारिज कर दिया। इसके बावजूद अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट (एसीएमएम) ने नवंबर 2023 में उन्हें जमानत दे दी। सत्र न्यायाधीश ने अगस्त 2024 में इस आदेश को बरकरार रखा और फिर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कंपनी की चुनौती खारिज कर दी।


अहम तथ्यों को नजरअंदाज किया गया- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितम्बर के अपने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट और सत्र न्यायालय ने मामले को 'बहुत सरल' तरीके से देखा और अहम तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया। अदालत ने कहा कि एसीएमएम का यह मान लेना कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद हिरासत की जरूरत नहीं रही, पूरी तरह असंगत और कानूनी दृष्टि से गलत है। शीर्ष अदालत ने इस दौरान जांच अधिकारी (आईओ) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अदालत ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को आदेश दिया कि वे स्वयं जांच अधिकारियों के आचरण की जांच करें और आवश्यक कार्रवाई करें।

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मामले की सुनवाई को तेजी से पूरा करे ACMM- कोर्ट 
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन दो न्यायिक अधिकारियों ने विवादित जमानत आदेश पारित किए हैं, वे दिल्ली न्यायिक अकादमी में विशेष प्रशिक्षण लें। इस प्रशिक्षण में विशेष जोर इस बात पर रहेगा कि उच्च अदालतों के आदेशों को किस तरह महत्व दिया जाए और न्यायिक कार्यवाही कैसे संचालित की जाए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसीएमएम अब इस मामले की सुनवाई को तेजी से पूरा करे ताकि न्याय में देरी न हो।
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